विजयवर्गीय के बंगले पर लगे होर्डिंग ‘देखो-देखो कौन आया, शेर आया से भाजपा में गर्माई सियासत

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश में यूँ तो पिछले कुछ महीनों से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की कार्यशैली को लेकर सत्ता और संगठन को लेकर तरह-तरह कीचर्चाओं का दौर जारी है लेकिन इस कड़ाके की ठंड में पिछले दिनों उज्जैन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के साथ-साथ शिवराज सिंह चौहान और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की भागवत से हुई डेढ़ घंटे की बैठक के बाद प्रदेश की राजनीति में कुछ गर्माहट आ गई है और वह गर्माहट अब क्या रूप लेगी इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं तो वहीं इसी बीच उमा भारती को लेकर यह खबर सुर्खियों में रही कि मंगलवार को सरकारी हेलीकाप्टर से उमा नागपुर गईं ओर वहां संघ प्रमुख से करीब एक घंटे से अधिक उनकी चर्चा हुई और इस चर्चा के साथ ही प्रदेश की राजनीति में यह खबर चलने लगी और प्रदेश के नेतृत्व परिवर्तन को लेकर भी चर्चाएं जोर पकडऩे लगी, इन खबरों के साथ ही लोग यह अंदाजा लगाने लगे कि प्रदेश में आखिरकार नेतृत्व परिवर्तन सत्ता के मुखिया के तौर पर होगा या पोखरण विस्फोट की परम्परा की तोड़कर संगठन के संगठन के मुखिया को। खैर, मामला जो भी हो गुजरात चुनाव में भाजपा को मिली कांग्रेस और युवाओं की तिकड़ी पटेल, जिग्वानी मेवानी, अल्पेश ठाकोर की वजह से भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ संघ प्रमुख भी काफी चिंतित हैं क्योंकि मध्यप्रदेश की स्थिति गुजरात से भिन्न है यहां विकास के नाम पर सिर्फ और सिर्फ भाजपा से जुड़े लोगों का ही विकास नजर आ रहा है न कि प्रदेश के अंतिम छोर के व्यक्ति का जिसको लेकर भाजपा के सत्ताधीश ढिंढोरा पीटा करते हैं वह आज भी उसी स्थिति में हैं, लेकिन यह जरूर है कि प्रदेश के सत्ता और संगठन से जुड़े नेता और सत्ता के दलाल और नौकरशाह की हालत में जरूर परिवर्तन प्रदेश की जनता को दिखाई दे रहा है, इसी तरह की चर्चाओं से जहां राजनीति गमाई हुई है तो वहीं इसी बीच पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बंगले पर लगे इस होर्डिंग ‘देखो-देखो कौन आया, शेर आयाÓ तो इस होर्डिंग को देखकर लोगों के मन में विचार उठने लगे अब लोग इस होर्डिंग में लिखी इबारत के आगे यह जोड़कर चर्चा करने लगे कि देखो-देखो कौन आया, शेर आया और किसको करेगा ढेर? इस ढेर की इबारत को जोड़ते हुए लोग तरह-तरह के कयास लगाने लगे हैं तो वहीं यह चर्चा भी गर्म है अब अब प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनायें कुछ ज्यादा ही प्रबल हैं बस लोग इस प्रतीक्षा में हैं कि परिवर्तन सत्ता के मुखिया का होगा या संगठन के मुखया का ? हालांकि इसके साथ ही यह कयास भी जोरों पर हैं कि प्रदेश में अब कैलाश विजयवर्गीय के साथ-साथ उमा भारती भी सक्रिय होंगी, अब इन दोनों को क्या जिम्मेदारी संघ देता है इसकी प्रतीक्षा में सभी की निगाहें लगी हुई हैं, यह सर्वविदित है कि शिवराज सिंह के शासनकाल में सबका साथ, सबका विकास का नारा तो खूब बुंलद हुआ लेकिन विकास केवल फाइलों पर ही सिमटकर रह गया और इसकी पुष्टि विदिशा में चल रही संघ प्रमुख के साथ चिंतन मंथन बैठक में भी खुलासा हुआ प्रदेश के अधिकांश संघ से जुड़े स्वयंसेवकों ने संघ प्रमुख के सामने यह बात रखी कि प्रदेश में अफसरशाही हावी है जिस मंशा को लेकर सरकार या संगठन काम करना चाहता है वो न तो पूरे हो पा रहे हैं और न ही यह काम जमीन पर नजर आ रहे हैं तो वहीं इस बैठक में इस बात को लेकर भी चर्चा हुई कि प्रदेश में निचले स्तर पर भ्रष्टाचार व्याप्त है तो उसके साथ ही प्रदेश सरकार द्वारा चलाये जा रहे शिक्षा के मामले को लेकर प्रयासों पर भी सवाल खड़े किये गये और यह कहा गया कि प्रदेश में शिक्षा का स्तर ठीक नहीं है, सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के गिरते स्तर व सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत पर भी चर्चा हुई। साथ ही इस बात पर भी जोर दिया गया कि प्रदेश में उच्च शिक्षा के स्तर भी ठीक नहीं है। कुल मिलाकर पिछले पिछले १०-१५ दिनों से प्रदेश की राजनीति में इस कड़ाके की ठंड में गर्माहट सत्ता और संगठन को लेकर दिखाई दे रही है और तरह-तरह के कयासो का दौर जारी है। देखना अब यह है कि पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कै लाश विजयवर्गीय के बंगले पर लगे इस होर्डिंग का असर प्रदेश की राजनीति में क्या असर दिखाता है, ‘देखो कौन आया, शेर आया को कितना सार्थक करते हुए शेर के मध्यप्रदेश आगमन पर कौन ढेर होता है यह तो आने वाला समय ही बता पाएगा?
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