इसरो ने लॉन्च किया भारत का 100वां सेटेलाइट

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श्रीहरिकोटा। (हिन्द न्यूज सर्विस)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो ने आज अपना 100वां उपग्रह कार्टोसेट-2 सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। पीएसएलवी श्रृंखला के सैटेलाइट का नाम कार्टोसैट-2, है। इस सैटलाइन को आई इन द स्काइ के नाम से भी जाना जा रहा है, क्योंकि ये अतंरिक्ष से तस्वीरें लेने के लिए ही बनाया गया है। चेन्नई से 110 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से इस 100वें उपग्रह के साथ 30 अन्य उपग्रह यानी कुल 31 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे गए हैं। सभी सैटलाइट्स अंतरिक्ष की कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित हो गए इसरो की ओर से पीएसएलवी सी-40 रॉकेट के जरिए लॉन्च किए गए 31 सैटलाइट्स में 28 विदेशी और 3 स्वदेशी उपग्रह शामिल हैं। विदेशी सैटलाइट्स की बात की जाए तो इनमें कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के उपग्रह शामिल हैं।

पीएसएलवी-सी 40 की सफल लॉन्चिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसरो को बधाई दी है। पीएम ने इसे नए साल का तोहफा करार देते हुए कहा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में तेजी से प्रगति और बदलाब देश के नागरिकों, किसानों और मछुआरों आदि की मदद में सहयोगी होगी। उन्होंने कहा कि इसरो द्वारा 100वें उपग्रह का शुभारंभ अपनी शानदार उपलब्धियों और भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के उज्ज्वल भविष्य को दर्शाता है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी इसरो को बधाई देते हुए कहा,भारत के 100वें उपग्रह कार्टोसैट-2, दो सह-यात्री उपग्रहों और छह अनुकूल राष्ट्रों के 28 उपग्रहों का प्रक्षेपण हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। इसरो की टीम को बधाई।

इसरो और भारत की इस उपलब्धि पर पाकिस्तान हैरान-परेशान नजर आ रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की ओर से इसरो के 100वें उपग्रह की लॉन्चिंग से पहले कहा कि भारत जिन उपग्रहों का प्रक्षेपण कर रहा है, उससे वह दोहरी नीति अपना रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इन उपग्रहों का इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उदेश्य में किया जा सकता है। उसने कहा है कि इसका इस्तेमाल सैन्य क्षमताओं के लिए न किया जाए, अगर ऐसा होता है तो इसका क्षेत्र पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

कार्टोसैट-2 का मुख्य मकसद उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें भेजना है। इसका इस्तेमाल नक्शे बनाने में किया जाएगा। इसमें मल्टी स्पेक्ट्रल कैमरे लगे हुए हैं। इससे तटवर्ती इलाकों, शहरी-ग्रामीण क्षेत्र, सड़कों और जल वितरण आदि की निगरानी की जा सकेगी।

ये लॉन्चिंग भारत के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले पीएसएलवी-39 मिशन फेल हो गया था। भारतीय वैज्ञानिकों ने इसकी मरमत की और दोबारा इसे लॉन्च किया। दरअसल, एक मिशन को मरमत करके फिर से लॉन्च करना आसान काम नहीं होता है।

गौरतलब है कि चार महीने पहले 31 अगस्त 2017 को इसी तरह का एक प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी की निम्न कक्षा में देश के आठवें नैविगेशन उपग्रह को स्थापित करने में असफल रहा था। इसरो के मुताबिक हीट शील्ड अलग न होने के कारण प्रक्षेपण आंशिक रूप से असफल हुआ था

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