उद्योग के नाम पर करोड़ों की जमीन पर उद्योगपतियों का कब्जा

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रीवा। (हिन्द न्यूज सर्विस)। एकेवीएन द्वारा आवंटित की गई करोड़ों रुपए की भूमि पर पूंजीपतियों का मात्र कब्जा होकर रह गया है। उद्योग विहार में उद्योगों की स्थापना के लिए वर्षों पहले आवंटित जमीन अब भी खाली पड़ी हुई है। लिहाजा विभाग इस मामले पर पूरी तरह से चुप्पी यसस लिया है। उद्योग की स्थापना के साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने एवं बाजार में सामग्री उपलब्ध कराने के लिए कई बड़े उद्योगपतियों नरे जमीन तो आंवटित करा ली परंतु उनमें उद्योगों की स्थापना नहीं कर सके। ऐसे में रोजगार का वादा एवं स्थानीय बाजार में सामान की बिक्री कोरी साबित हो रही है। औद्योगिक केन्द्र एवं विकास निगम (एकेवीएन) के उद्योग विहार में लगभग १०९ लोगों को अब तक जमीन आवंटित की गई है। कई एकड़ जमीन पूंजीपतियों को लीज डीड के तहत चंद रुपए में दी गई है लेकिन बमुश्किल २० फीसदी ने प्लांट स्थापित किया है। करोड़ों की भूमि सालों से खाली पड़ी है। उद्योग संचालन के नाम पर पिछले कई वर्षों से प्रक्रिया जारी होने का हवाला दिया जा रहा है। नतीजा योजना के मुताबिक न उद्योगों की स्थापना हो पा रही है और न ही युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो पा रहा है। उद्योग विहार में कुछ ऐसे उद्योग हैं, जो कई एकड़ की भूमि पर कब्जा जमाए बैठे हैं लेकिन उद्योग का संचालन दसवें हिस्से से भी कम जमीन पर हो रहा है। वैसे तो नियमों के अनुरूप किसी उद्योग के संचालन के लिए कुछ जमीन हरियाली क्षेत्र सहित अन्य अभिप्रायों के लिए छोड़ी जाती है लेकिन निर्धारित नियमों की काड़ में उद्योग संचालक कई गुना जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं। हवाला उस प्रोजेक्ट का देते हैं, जो पिछले कई वर्षों से पूरा नहीं हो पाया है। उद्योग विहार के बड़े हिस्से पर कब्जा जमाने वालों के खिलाफ एकेवीएन के अधिकारियों ने कार्रवाई के तहत नोटिस जारी करने सहित अन्य प्रक्रिया शुरू तो की लेकिन नतीजा सिफर है। कुछ मामले में शासन स्तर पर अपील में चल रहे हैं तो कुछ कानूनी दांवपेंच में फंसकर रह गए हैं। अधिकारियों की सारी कवायद केकवल कागज तक सीमित होकर रह गई है। उद्योगों की स्थापना में होने वाले संभावित रोजगार उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उद्यमियों की मानें तो प्रस्तावित उद्योगों की स्थापना के बाद कम से कम पांच हजार से अधिक युवाओं को रोजगार संभव हो सकेगा। इसके अलावा किसानों की उपज का सदुपयोग और उन्हें वाजिब मूल्य की प्राप्ति हो सकेगी। उद्योग में १०० एकड़ से अधिक जमीन का उपयोग नहीं, ५.५ करोड़ की लीज डीड में आवंटन तथा २०० करोड़ जमीनों की है सामान्य कीमत साथ ही है इन बातों पर सबकी नजर जो इस प्रकार हैं बीटीएल को आवंटित ८० एकड़ भूमि, पांचएकड़ का हो रहा उपयोग, बिरला एरिक्शन को आवंटित १३ एकड़ का हो रहा उपयोग, उद्योग स्थापना के लिए प्रस्तावित १४ एकड़ भूमि, सात एकड़ का हो रहा उपयोग, उद्योग स्थापना के लिए प्रस्तावित १४ एकड़ में प्लाट आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है लेकिन पूंजीपतियों की कवायद धीमी है, औद्योगिक कर्मचारी सुविधा के नाम पर आरक्षित चार एकड़ का भी कोई उपयोग नहीं और कानूनी दांवपेंच में फंसी आधा दर्जन कंपनियों की २.६ एकड़ भूमि अनुपयोगी साबित होकर रह गई है।

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