कागजी दबंग काश्तकारों ने निकाला सहकारी बैंक का दिवाला

0
66

भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। जिले की विभिन्न समितियों और बैंक शाखाओं से कृषि ऋण के नाम पर लाखों रुपये लेने वाले दबंग बैंक का दिवाला निकालने पर आमादा हैं। कृषि को छोड़कर ठेकेदारी, व्यवाय या प्रापर्टी के पेशे से जुड़े लोगों ने चंद एकड़ जमीन के एवज में बैंक से ऋण लिया है। लेकिन उनसे पैसे वसूलने में बैंक ने घुटने टेक दियेहैं। कई ऐसे कागजी काश्तकार हैं जिनका राजनीतिक रसूख कवच बना है। यही वजह है कि बैंक का मैदानी अमला कई नोटिस देने के बाद थक गया और अब ऐसे कृषकों को कालातीत घोषित कर दिया है। कुल मिलाकर बैंक प्रबंधन ने मान लिया है कि ऋण में वितरित किये गये करोड़ों रुपये डूब गये हैं। ऐसे में जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक का ऋण न चुकाने वाले करीब २५ हजार किसानों को बैंक ने कालातीत घोषित कर दिया है। जिसकी रिपोर्ट बैंक प्रशासक को दी जा चुकी है। खेती का धंधा छोड़ प्रापर्टी डीलर्स एवं अन्य व्यवसायों में पैसा लगानेवाले बड़े काश्तकारों ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक से अपनी जमीन के कुछ हिस्से के एवज में लाखों रुपए का ऋण तो लिया परंतु उसे इसलिए नहीं जमा किया कि शासन द्वारा ऋण माफी की जाएगी। ऐसे में बैंक का पैसा दबाने वाले ८० फीसदी बड़े काश्तकार हैं। बताया गया है कि इस संबंध में तत्कालीन कलेक्टर द्वारा विभिन्न तहसीलदारों को आरआरसी जारी करने का आदेश दिया था परंतु अब तक कुछ हासिल नहीं हो पाया। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा जिला कलेक्टर को दी गई सूची के बाद बैंक प्रशासन ने ऐसे किसानों की सम्पत्ति कुर्क करने और बैंक की डूबी हुई राशि निकालने के लिए आरआरसी जारी किया था। जिसमें उनकी जमीन का हवाला देकर ऋण दिया गया है। ताकि संबंधित काश्तकार की जमीन चिन्हित कर कुर्की की कार्रवाई की जा सके। ऐसे में बैंक की डूबी हुई राशि भी निकल आएगी और बैंक कंगाली से बच जाएगा। हैरानी की बात यह है कि तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जारी की गई आरआरसी के बाद तहसीलदारों ने किसानों की कुर्की करने में हाथ पीछे कर लिए और डूब खाते की राशि वसूल नहीं हो सकी। सूत्रों की मानें तो ऐसे कृषक जो बड़े किसानों के साथ-साथ राजनीतिक पहुंच रखते हैं, उनका नाम सूची में तो आया परंतु राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी ऋण की एवज में दर्शाई गई भूमि और आराजी को कुर्क करने में अपने हाथ खींच लिए। यही वजह है कि जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक का करोड़ों रुपया डूब खाते में चला गया है। स्थिति यह है कि वह अब किसी किसान को उनके अनुरूप कृषि लोन एवं भूमि सुधार का ऋण दे पाने में असमर्थ हो गया है। किसानों की ऋण राशि की वसूली न हो पाने से जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक बंद होने की कगार पर है। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वसूली अभियान में छोटे और मध्यम स्तर के किसानों ने बैंक का कर्ज लौटा दिया है, लेकिन जितने बड़े किसान हैं वे ऋण लौटाने को तैयार नहीं हैं। फलस्वरूप बैंक का करोड़ों रुपये डूब गया। हालांकि बैंक ने अपने स्तर पर इस राशि को वसूलने का प्रयास किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। सूत्रों की मानें तो सहकारी केन्द्रीय बैंक अब यह स्थिति में नहीं रह गया है कि वह किसानों को खेती एवं भूमि सुधार के लिए उनके अनुरूप ऋण दे सके।

००००००००००

LEAVE A REPLY