भाजपा और कांग्रेस के सामने सत्ता में बने रहने और आने की चुनौती

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०- अरुण पटेल

नया साल भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौतियों से भरा रहेगा, क्योंकि यह वही साल है जब मिशन 2018 की सफलता के लिए दोनों दल एड़ी-चोटी का जोर लगाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेंगे। भाजपा के सामने लगातार चौथी बार सत्ता में बने रहने का लक्ष्य पूरा करने की चुनौती होगी तो कांग्रेस को भी डेढ़ दशक बाद सत्ता में आने को एक चुनौती की तरह लेना होगा। विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए जीवन और मरण का प्रश्न बन गया है क्योंकि यदि यह चुनाव भी वह हार जाती है तो फिर उसकी हालत उत्तरप्रदेश-बिहार जैसी हो जाएगी। भाजपा और कांग्रेस दोनों को अपने-अपने लक्ष्य को हासिल करने के पूर्व यह तय करना होगा कि संगठन की बागडोर नंदकुमार सिंह चौहान और अरुण यादव के हाथों में ही रहेगी या कोई बदलाव होगा। भाजपा में ऐसे नये चेहरे की तलाश है जो चुनावी वर्ष में सत्ता व संगठन में तालमेल बनाते हुए कार्यकर्ताओं में नया जोश-खरोश फूंक कर 200 प्लस के लक्ष्य को छू सके। नंदकुमार चौहान की जगह नये चेहरे की तलाश नये साल के पहले माह में पूरी होने की संभावना है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि उनकी संगठन महामंत्री सुहास भगत से पटरी नहीं बैठ रही इसलिए बदलाव जरूरी है। दूसरी ओर कांग्रेस में भी अध्यक्ष का ऐलान होना बाकी है और जनवरी माह में इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यह ऐलान कर देंगे कि अध्यक्ष अरुण यादव ही रहेंगे या उनकी जगह कोई नया चेहरा आयेगा। अरुण यादव के रहते हुए किसी वरिष्ठ नेता की अध्यक्षता में एक हाई पॉवर कमेटी का गठन भी हो सकता है।

कांग्रेस को अभी यह भी तय करना है कि किसी का चेहरा सामने रखकर चुनाव लड़ेगी या सामूहिक नेतृत्व में चुनावी समर में कूदेगी। उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने बड़े नेताओं की सक्रियता ट्वीटर और सोशल मीडिया की जगह मैदानी स्तर पर उतारने की होगी। भाजपा के सामने हार्दिक पटेल की चुनौती पाटीदारों के बीच किस प्रकार कमतर की जाए उसके लिए रणनीति बनाने की होगी। हार्दिक पटेल ने ऐलान कर दिया है कि वे 2018 के विधानसभा चुनाव के पूर्व मध्यप्रदेश में भाजपा के विरोध में पाटीदारों को एकजुट करेंगे। मालवा व निमाड़ अंचल में पाटीदार समाज का रुझान सामान्यतया भाजपा की तरफ रहा है। इसके साथ ही रीवा व सागर संभाग में भी पाटीदार निवास करते हैं और उनकी संख्या प्रदेश में 1 करोड़ 82 लाख होने का दावा पाटीदार समाज करता है। कांग्रेस यह चाहेगी कि हार्दिक पटेल को आगे कर उस वोट बैंक में सेंध लगायें जो भाजपा का परम्परागत वोट बैंक है। हार्दिक पटेल गुजरात की तर्ज पर कह रहे हैं कि मैं कांग्रेस के साथ न गुजरात में था न ही मध्यप्रदेश में रहूंगा लेकिन जो समाजहित की बात करेगा उसके साथ रहेंगे। उनकी सक्रियता बढ़ेगी और क्या रणनीति होगी यह समाज के लोग मिल-बैठकर तय करेंगे। चुनाव आते-आते कांग्रेस और हार्दिक के बीच गुजरात की तरह किसी सहमति के बनने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। मध्यप्रदेश पाटीदार समाज के अध्यक्ष महेंद्र पाटीदार का दावा है कि प्रदेश में 24 प्रतिशत पाटीदार मतदाता हैं तथा पूरा समाज हार्दिक के साथ है। उनका कहना है कि प्रदेश की 58 विधानसभा सीटों पर पाटीदार चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। दावा चाहे कोई कितना भी करे लेकिन भाजपा को इस बात की पेशबंदी करना होगी कि उसके इस वोट बैंक में अधिक सेंध न लग पाये।

भाजपा में नये अध्यक्ष के रूप में जो चार-पांच नाम चल रहे हैं उनमें से ही किसी एक को चुनना होगा और ऐसा करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखना होगा कि वह ऐसा चेहरा हो जो संघर्षकाल यानी चुनाव में सबको साथ लेकर चल सके और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ भी जिसकी अच्छी जुगलबंदी हो। नया प्रदेश अध्यक्ष वह होगा जिसके नाम पर प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, संगठन महामंत्री सुहास भगत की सहमति बन जाये। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत और निवृत्तमान अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की भी राय ली जा सकती है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यह भलीभांति जानते हैं कि जो भी कर्मचारी संगठन और समाज के वर्ग किसी न किसी कारण से नाराज हैं उनकी नाराजगी को दूर किया जाए। इसीलिए उसके सारे सूत्र अब शिवराज ने अपने हाथ में ले लिए हैं और उनका प्रयास है कि जहां-जहां असंतोष है उसे कम किया जाए ताकि उसका असर चुनावी संभावनाओं पर न पड़े। कांग्रेस की कोशिश है कि किस प्रकार इस असंतोष को उभारकर अपनी चुनावी संभावनाओं को चमकदार बनाया जाए। चूंकि शिवराज के चेहरे को सामने रखकर भाजपा मैदान में जाएगी इसलिए शिवराज और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच पूरे साल तू डाल-डाल तो मैं पात-पात का खेल जारी रहेगा और इसमें कौन डाल-डाल और कौन पात-पात की राजनीति करने में सफल रहा इसका पता चुनाव नतीजों से चलेगा। भाजपा ने काफी पहले से 200 प्लस का नारा दे रखा है लेकिन यह तो एक लक्ष्य है, उसकी कोशिश यह होगी कि उसे इतना बहुमत मिल जाए जो उसकी मौजूदा सदस्य संख्या के आसपास रहे। यदि ऐसा होता है तो यह उसके लिए एक बड़ी उपलब्धि से कम नहीं होगा। कांग्रेस का लक्ष्य 116 प्लस का है ताकि वह डेढ़ दशक के अपने वनवास से मुक्ति पा सके।

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया की रणनीति के तहत वह नये ढंग से अपना संगठनात्मक ढांचा खड़ा कर रही है जिसकी घोषणा जनवरी माह में होने की संभावना है। कांग्रेस के महामंत्री संगठन चंद्रिका प्रसाद द्विवेदी का कहना है कि नए साल में जमीनी स्तर पर कांग्रेस पूरी मुस्तैदी से सक्रिय होगी और संगठन को एक नया स्वरूप देकर कार्यकर्ताओं की फौज को सुनिश्चित दायित्व सौंपे जायेंगे। कांग्रेस के मौजूदा संगठनात्मक ढांचे को यथावत रखते हुए केवल उसमें एक बदलाव यह होने जा रहा है कि ब्लाक कांग्रेस की संख्या अब बढ़कर 700 हो जाएगी। इस प्रकार 200 नये ब्लाकों में अध्यक्ष सहित नई कार्यकारिणी बनेगी जिनमें सदस्यों की संख्या ब्लाक के आकार को देखते हुए 50 के आसपास रहेगी। नये ब्लाकों में 10 हजार नये चेहरों को अवसर मिलेगा। कांग्रेस 2100 मंडलम् भी बनाने जा रही है जिसमें बड़ी संख्या में मैदानी स्तर के कांग्रेसजनों को दायित्व सौंपे जायेंगे। इसके साथ ही 6500 सेक्टर कमेटियां भी बनाई जा रही हैं, प्रत्येक कमेटी में लगभग 10 सदस्य हो सकते हैं इस प्रकार वह करीब 65000 कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने जा रही है। पैंसठ हजार बूथ कमेटियां भी अलग से गठित होंगी जिनका काम मतदाता से सीधे संपर्क कर उसे मतदान केंद्र तक पहुंचाना होगा। बूथ कमेटियों में भी प्रभारी सहित लगभग दस सदस्य हो सकते हैं, इस प्रकार करीब 6 लाख 50 हजार बूथ कार्यकर्ता तैनात करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य लेकर कांग्रेस जमीनी स्तर पर मैराथन प्रयास कर रही है। देखने की बात यही होगी कि कांग्रेस अपने लक्ष्य में कितना सफल होती है और कार्यकर्ताओं में जीत के प्रति कितना जोश, जुनून और जज्बा पैदा कर पाती है।

कांग्रेस के महामंत्री संगठन द्विवेदी का दावा है कि नये साल में कांग्रेस नए आक्रामक तेवरों के साथ मैदान में उतरेगी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणाओं की पोल खोलते हुए जमीनी वास्तविकताओं से मतदाताओं को अवगत करायेगी। कांग्रेस की कोशिश यही है कि विभिन्न वर्गों के बीच जो भी असंतोष है उसका अधिकतम फायदा अपना आधार बढ़ाने में किया जाए। इसी उद्देश्य से नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने आंदोलनरत अतिथि शिक्षकों, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया है कि 2018 में कांग्रेस सरकार बनने पर उनकी सभी मांगों को पूरा किया जाएगा। देखने की बात यही होगी कि कांग्रेस सत्ता में वापसी का जो गुब्बारा फुला रही है उसमें फूलने के पूर्व ही क्या शिवराज पिन चुभोकर हवा निकाल पायेंगे या नहीं या फिर कांग्रेस का ही कोई नेता मणिशंकर अय्यर की तर्ज पर उनके लिए मददगार साबित होगा।
०- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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