थमने का नाम नहीं ले रहा किसानों का आक्रोश

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान किसानों की खेती को लाभ का धंधा बनाने का जिस जोर शोर से ढिंढोरा पीटा गया उसी क्रम में किसानों के नाम पर चलाई जा रही योजनाओं में डाका डालने का काम भी प्रदेश में सक्रिय मंत्रियों, अधिकारियों, सत्ता के दलालों और ठेकेदारों के रैकेट के द्वारा किया गया। शायद यही स्थिति है कि आज शिवराज सरकार के १२ वर्षों के शासनकाल में किसानों के नाम पर गठित गोरखधंधों के कारण किसानों में असंतोष भी खूब पनपा और किसानों का यह असंतोष प्रदेश के उस मालवा क्षेत्र में जाकर फूटा जो कभी संघ की सबसे बड़ी प्रयोगशाला हुआ करता था, लगभग मालवा जैसी स्थिति अब पूरे प्रदेश में बन गई है और आये दिन प्रदश्ेाभर में कहीं न कहीं से किसानों के आक्रोश और किसानों द्वारा चक्काजाम की खबरें भी इन दिनों सुर्खियों में बनी रहती हैं। मजे की बात यह है कि एक ओर जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर भाजपा से जुड़ा हर जनप्रतिनिधि किसानों में पनप रहे असंतोष को लेकर चिंतित है तो वहीं राज्य की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की चहीती नौकरशाही इन किसानों के समक्ष कोई न कोई ऐसी हालत पैदा कर देते हैं जिनकी वजह से किसानों में आक्रोश भड़क रहा है ऐसी ही तीन घटनाएं प्रदेशभर में हाल ही में घटी जिनकी वजह से कहीं किसानों ने चक्काजाम किया तो कहीं किसान भड़के तो कहीं हंगामा खड़ा किया पहली घटना है विदिशा जिले की जहां नई मण्डी मिर्जापुर में धान के सही दाम न मिलने के कारण गुस्साए किसानों ने एनएच पर चक्काजाम कर दिया, हालांकि सूचना मिलने पर अधिकारी वहां पहुंच गए और गुस्साए किसानों को समझाबुझाकर मामला शांत किया, तो वहीं दूसरी घटना रायसेन जिले की है जहां धान के सही दाम नहीं मिलने से किसान आक्रोशित हो गए और नाराज किसानों ने कृषि उपज मण्डी के सामने हाईवे पर ट्रेक्टर-ट्राली लगाकर चक्काजाम कर दिया। किसानों के समर्थन में जिला कांग्रेस व युवक कांग्रेस ने भी प्रदर्शन किया और इस दौरान हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतार लग गई करीब तीन घण्टे चले इस प्रदर्शन में प्रशासन ने किसानों को मनाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं मानें, इसके बाद किसानों के साथ हुई बैठक जिसमें किसानों के हित में तय हुए बिन्दुओं के बाद शाम को चार बजे किसानों ने चक्काजाम खत्म किया तो वहीं एक अन्य घटना में दतिया जिले के इन्दगढ़ के कृषि उपज मण्डी के पास स्थित खाद गोदाम पर प्रभारी की मनमानी के चलते सैंकड़ों किसान खाद न मिलने पर भड़क गये गोदाम बंद था और सुबह से बैठे किसान खाद न मिलने पर वापस लौट आए किसानों को नए खाद के साथ तीन साल पुराना रिजेक्ट खाद थमाये जाने की शिकायतें किसानों ने की नगर कृषि उपज मण्डी के पास जिला सहकारी विपणन केन्द्र खाद गोदामों पर किसानों को खाद न दिये जाने पर किसान भड़क गये और अधिकारियों पर मनमानी के आरोप लगाये। खाद के लिये यहां महिलायें भी कतार में लगी हुई थीं मगर खाद गोदाम बंद था । एक अन्य घटना में कृषि हरदा जिले के खिरकिया में कृषि उपज मण्डी में दोपहर करीब दो बजे किसानों द्वारा उड़द का भाव कम लगाने के चलते मण्डी में नीलामी का कार्य बन्द करा भाव ज्यादा की मांग कर हंगामा खड़ा कर दिया और मण्डी के गेट के बाहर ट्रेक्टर रोड जाम कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही यातायात सुचारू रूप से करने के लिये पुलिस जाम हटाने का भरसक प्रयाास करती रही इसी बीच एसडीएम और नायब तहसीलदार भी वहां पहुंच गए और किसानों से चर्चा कर अपनी उपस्थिति में नीलामी कार्य शुरू कराया। इस हंगामे के बीच करीब दो घंटे मंडी बंद रही भाव कम लगने वाले किसानों के साथ वह किसान भी परेशान हुए जो पिछले दो दिनोंसे मण्डी में उपज बेचने आये थे। मण्डी में हुए हंगामें में किसानों ने सरकार को खरी खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि सरकार की भावांतर योजना में किसानों का शोषण हो रहा है। कुल मिलाकर राज्य में किसानों से जुड़ी संस्थाओं के कर्मचारियों की लापरवाही और मनमानी के चलते आयेदिन ऐसी स्थिति निर्मित हो रही हैं?

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