लगता है कि भाजपा के नेता अब मुख्यमंत्री को बदनाम करने में लग गए हैं ?

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। राज्य में जहां एक ओर मुख्यमंत्री मिशन-२०१८ की तैयारी में दिन-रात जुटे हुए हैं और प्रदेश में बिगड़े माहौल को और किसानों में पनप रहे असंतोष को शांत करने के प्रयास में लगे हुए हैं तो व हीं भाजपा के वह नेता जिन्हें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसी न किसी निगम की जिम्मेदारी सौंपी है वह मुख्यमंत्री के द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी का किस तरह से निर्वाहन करते हुए मुख्यमंत्री और शिवराज सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण है प्रदेश का नागरिक आपूर्ति निगम, जिसकी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने वर्षों तक भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी रहे हितोश वाजपेई पर इस बात का विश्वास करके कि वह मुख्यमंत्री द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी का ठीक से निर्वाहन करेंगे और प्रदेश के उन गरीब उपभोक्ताओं जिनकी पेट की आग बुझाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने राज्य की कुल आबादी के पाँच करोड़ ४४ लाख लोगों को एक रुपए किलो गेहूं और चावल बांटने का काम इस उद्देश्य से किया है कि लोग अपने और अपने परिवार का पेट भर सकें। तो वहीं राज्य में चल रही तमाम शिक्षण संस्थाओं, दिव्यांग बच्चों मदरसों में अध्ययन करने वाले विद्यार्थी (तुलबा) को भी समय पर भोजन मिले इसकी व्यवस्था शिवराज सरकार ने की लेकिन ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की इन सारे मंसूबों पर पानी फेरने का काम भाजपा के नेता हितेश वाजपेयी करने में लगे हुए हैं तभी तो जबसे उन्होंने इस नागरिक आपूर्ति की जिम्मेदारी संभाले तबसे लेकर आए दिन कुछ न कुछ ऐसी घटनायें घटित हो रही हैं जिनको लेकर भाजपा और विपक्षी दल के नेता यही कहते नजर आ रहे हैं कि लगता है कि हितेश वाजपेयई मुख्यमंत्री की हितकारी व जनहितैषी योजनाओं की बाट लगाकर ही वाजपेई मानेंगे। यह उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व इसी नागरिक आपूर्ति निगम का गेंहू और चावल में मिट्टी मिलाने का मामला उजागर हुआ था, जिसके उजागर होने पर सरकार को विधानसभा से लेकर सदन तक हंगामे का सामना करना पड़ा था तो मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश के किसनों की पीढ़ा समझते हुए वह प्याज जिसका कि उन्हें उचित मूल्य न मिलने के कारण किसान सड़कों पर फेंक रहे थे उसे आठ रुपये खरीदने की घोषणा कर किसानों को राहत पहुंचाने का काम किया था उसी प्याज खरीदी में हितेश वाजपेयी की अध्यक्षता वाले नागरिक आपूर्ति निगम ने जो खेल खेला अब उसके घोटाले प्याज की छिलके की तरह लोगों के सामने आ रहे हैं। तो अब भोपाल मण्डी में हाल ही में पकड़े गए गरीब आदमियों दिव्यांग बच्चों और मदरसों में पढऩे वाले विद्यार्थी (तुलबा) के हकों पर डाका डालकर करोंद मण्डी में बेचने का मामला उजागर हुआ तो वहीं यह खबरें भी अब सुर्खियों में हैं कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में नागरिक आपूर्ति निगम के गोदामों से वितरण किये जाने वाले गेंहू और चावल में गड़बड़झाला का खेल खेला जा रहा है। इससे यह साफ जाहिर होता है कि नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष हितेश वाजपेयी द्वारा अपने निगम के अधिकारियों पर पकड़ नहीं है या फिर वह जानबूझकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार की बाट लगाने की दिशा में लगे हुए हैं। करोंद मण्डी में जब्त किए गए सस्ते अनाज की घटना के बाद जो खबरें सामने आ रही हैं उसमें नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा एक के बाद एक घोटालों को अंजाम दिये जाने की घटनायें घटित हो रही हैं और अब लोग यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि प्रदेश में नागरिक आपूर्ति निगम के घोटाले दर घोटालों को अंजाम दिया जा रहा है एक ओर जहां करोंद मण्डी में जब्त किये गये सस्ते अनाज का मामला सामने आया तो वहीं भोपाल में मेंटली हेंडीकैप्ड स्कूल चलाने वाली सोसायटियों को बिना उनकी मांग के गेंहू सप्लाई किये जाने का मामल भी सामने आया जबकि नियम यह है कि सोसायटी की मांग और डीडी जमा किये जाने के बाद ही किसी भी संस्था को गेंहू सप्लाई किया जाता है, इस तरह की घटना उजागर होने के बाद यह उजागर होता है कि हितेश वाजपेई के अध्यक्षता वाली निगम में एक के बाद एक कारनामों को अंजाम दिया जा रहा है और यह सब सस्ता गेंहू बाजार में बेचने का खेल नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से धड़ल्ले से जारी है और इस तरह के एक के बाद एक उजागर होने वाले कारनामों के खुलासे होने के बाद लोग अब यह कहते नजर आ रहे हैं कि हितेश वाजपेई की अध्यक्षता वाला नागरिक आपूर्ति निगम भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा भोपाल के करोंद स्थित कृषि उपज मण्डी के लायसेंसी व्यापारी के गोदाम में दिव्यांगों व मदरसों के बच्चों के गेंहू की बरामदगी के बाद सामने आए घोटाले को लेकर नागरिक आपूर्ति निगम को भ्रष्टाचार का एक प्रमुख अड्डा बताते हुए निगम के अध्यक्ष हितेश वाजपेयी से इस्तीफा मांगा है मिश्रा का कहना है कि वाजपेई के कार्यकाल में सामने आया यह चौथा घोटाला है इससे पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बांटे गये गेंहू में मिट्टी मिलाने का मामला सामने आया था और अब इसके बाद प्याज खरीदी में भी करोड़ों ही हेराफेरी हुई। तो वहीं केके मिश्रा की तरह कई नेताओं और भाजपा के लोगों का यह कहना है कि हितेश वाजपेई के अध्यक्षता वाले निगम की यदि ठीक से जांच कराई जाऐ तो इस निगम में प्याज के छिलकों की तरह कई घोटाले उजागर होंगे।

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