अफसरों की उदासीनता ने छीना सैकड़ों मासूमों का निवाला

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०-सादिक खान
पन्ना। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मध्यप्रदेश में गंभीर कुपोषण के मामले में अव्वल पन्ना जिले के देवेंद्रनगर कस्बा के सभी 15 आंगनवाड़ी केंद्रों में दर्ज 3-6 वर्ष की आयु ंके बच्चे दो माह से भी अधिक समय से नाश्ता और मध्यान्ह भोजन से पूर्णत: वंचित हैं। सैंकड़ों मासूम बच्चों को इतने दिनों तक नाश्ता और मध्यान्ह भोजन वितरित न होने के कारणों की पड़ताल करने पर कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुये है। पोषण के लिये आंगनवाड़ी केंद्रों पर निर्भर सैंकड़ों मासूम बच्चे भूख से बिलबिला रहे हैं लेकिन इनकी चीख-पुकार जिम्मेदारों को सुनाई नहीं देती। नाश्ता और मध्यान्ह भोजन की समय रहते स्थायी व्यवस्था करने में गंभीर लापरवाही बरती जा रही है, जिसका दुष्प्रभाव जाने -अनजाने सैकड़ों गरीब नौनिहालों को कुपोषण के कुचक्र में धकेलने के रूप में सामने आ रहा है। इसे विडम्बना कहा जाये या दुर्भाग्य कि कुपोषण के कलंक को मिटाने की जिम्मेदारी शासन ने जिन्हें सौंपी गई वही लोग कर्तव्य के निर्वहन में धोर लापरवाही बरतते हुये कुपोषण को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। उल्ल्ेखनीय है कि देवेंद्रनगर के 15 आंगनवाड़ी केंद्रों में नाश्ता और मध्यानह भोजन वितरित करने वाले समूह को अचानक 18 सितंबर 2017 को व्यवस्था से पृथक कर दिया गया। वैकल्पिक व्यवस्था बनाने के नाम पर महिला एवं बाल विकास विभाग की परियोजना अधिकारी पन्ना द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मौखिक निर्देष देते हुये तदर्थ समितियों के माध्यम से स्थायी व्यवस्था होने तक बच्चों को नाश्ता और मध्यान्ह भोजन वितरित कराने के निर्देष दिये गये। देवेंद्रनगर के कतिपय केंद्रों पर बमुश्किल 4-6 दिनों तक तदर्थ समितियों द्वारा नाश्ता और मध्यान्ह भोजन वितरित कराया गया, लेकिन आर्थिक समस्याओं का हवाला देकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने हाथ खड़े कर लिये। जबकि अधिकांश केंद्रों पर तो तदर्थ समितियों ने एक भी दिन नाश्ता और मध्यान्ह भोजन का वितरण नहीं किया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा असमर्थता जताने के बाद भी जिम्मेदारों की ओर से स्थायी और सुचारू व्यवस्था बनाने के लिये कोई ठोस पहल नहीं की गई। तदर्थ समितियों की असफलता को छिपाने और स्वयं की कमियों पर पर्दा डालने के लिये जिम्मेदारों ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दबाव देकर उनसे टेक होम राशन के पैकेट से हलवा-खिचड़ी तैयार कराकर बच्चों को खिलाने के बाध्य किया गया। यह गलत व्यवस्था भी नहीं चल सकी।

आंगनवाड़ी नहीं आते बच्चे- देवेंद्रनगर कस्बा के सभी 15 आंगनवाड़ी केंद्रों पर करीब दो ढाई माह से बच्चों को नाश्ता और मध्यान्ह भोजन न मिलने के कारण गरीब बच्चों का आंगनवाड़ी से लगभग मोह भंग हो चुका है। अधिकांश बच्चों ने आंगनवाड़ी आना ही बंद कर दिया है। कुछ केंद्रों पर दो चार बच्चों को घरों से लाकर कार्यकर्ता और सहायिका आंगनवाड़ी के संचालन की महज औपचारिकता पूरी कर रहीं है। पत्रकारों का दल जब वार्ड क्रमांक 12 की आंगनवाड़ी पहुंचा तो वहां सन्नाटा पसरा था। कार्यकर्ता और सहायिका दोनो ही नदारत थीं। मौके पर मिली लक्ष्मी नामदेव ने बताया कि कार्यकर्ता और सहायिका के छुट्टी पर है और आंगनवाड़ी खोलने के लिये उन्हें चाबी दे गईं हैं । आंगनवाड़ी में एक भी बच्चा मौजूद न होने पर पर लक्ष्मी ने बड़े ही बेबाक अंदाज में बताया कि पिछले दो माह से बच्चों को नाश्ता और भोजन नहीं मिला इसलिये बच्चे आने से कतराते हैं। टीएचआर का हलवा-खिचड़ी बांटी- वार्ड क्रमांक 13 की आंगनवाड़ी में भी बच्चों की संख्या शून्य रही । सहायिका जानकी विश्वकर्मा ने बताया कि सर्दी के मौसम में कम बच्चे आंगनवाड़ी आते हैं। उनके केंद्र पर करीब दो माह से अधिक समय से बच्चों को नाश्ता और मध्यान्ह भोजन नहीं मिला इसलिये बच्चों ने आना बंद कर दिया हैं। सहायिका ने बताया कि कुछ दिन टीएचआर की हलवा-खिचड़ी घर पर तैयार कर बच्चों को खिलाई गई।

रोज-रोज बच्चों का भोजन पकाने के चक्कर में आंगनवाड़ी खोलने में देरी होने के कारण यह व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं चल सकी। वार्ड क्रमांक 14 की आंगनवाड़ी में भी निरीक्षण के समय एक भी बच्चा उपस्थित नहीं मिला। कार्यकर्ता हीरा कुशवाहा से अभी बातचीत चल ही रही कि इसी दौरान सहायिका सुमित्रा चौधरी पड़ोस से तीन चार बच्चों को उनके घर से जाकर ले आई। कार्यकर्ता हीरा कुशवाहा ने बताया कि समूह की व्यवस्था भंग होने पर कुछ दिन बच्चों को टीएचआर की हलवा-खिचड़ी बांटी गई। किसी तरह का बजट न मिलने के कारण बच्चों को नाश्ता और भोजन वितरण करना व्यहारिक तौर पर संभव नहीं था इसकी जानकारी सीडीपीओ को दी गई थी लेकिन अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं बन सकी।

इनका कहना है-
सीडीपीओ ने मुझे जानकारी दी थी कि तदर्थ समितियों के माध्यम से देवेंद्रनगर के आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को नाश्ता और भोजन का वितरण कराया जा रहा है। मैने पहले ही यह अंदेशा जताया था कि ज्यादा दिन तक तदर्थ समिति की व्यवस्था चल ही नहीं पाएगी। शीघ्र बच्चों को भोजन और नाश्ता वितरण नियमित रूप से सुनिश्चित कराने उचित व्यवस्था की जाएगी। करीब दो माह से नाश्ता और भोजन वितरण न होने की जांच कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
– सुशीला कुशराम परस्ते, जिला कार्यक्रम अधिकारी पन्ना

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