फिल्म एवं मीडिया पर अधिक अनुसंधान प्रकाशनों की जरुरत ‘-सुभाष घई

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गोवा। (हिन्द न्यूज सर्विस)। भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीटीआई), पुणे ने आज गोवा में अपनी त्रैमासिक शैक्षणिक पत्रिका ‘लेनसाइट के एक विशेष अंक का विमोचन किया जो गोवा में वर्तमान में जारी भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोह (आईएफएफआई) के अवसर के अनुरूप है।

विख्यात फिल्मकार एवं भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एफटीटीआई) के पूर्व छात्र सुभाष घई ने इस अवसर पर फिल्म एवं मीडिया पर इस सम्मानित पत्रिका, जो पिछले 26 वर्षों से अपनी विचारोत्तेजक एवं विद्वतापूर्ण सामग्री के लिए विख्यात रही है, के अक्तूबर-दिसंबर अंक का विमोचन किया। एफटीटीआई, पुणे के निदेशक भूपेंद्र कैंथोला एवं अमित त्यागी (डीन फिल्म्स) भी पत्रिका के विमोचन के अवसर पर उपस्थित थे।

सुभाष घई ने अपने संबोधन में कहा कि ‘पत्रिका लेनसाइट भारत एवं विदेश के फिल्म विद्वानों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं इस क्षेत्र में इस विषय वस्तु के अन्य विशेषज्ञों के लेखों एवं शोध पत्रों को प्रकाशित करती रही है। उन्होंने कहा कि सिनेमा के बारे में समझ को और व्यापक रूप से विकसित करने तथा विस्तारित करने के लिए आज ऐसी और कई पत्रिकाओं को प्रकाशित किए जाने की जरुरत है।

इस समारोह को संबोधित करते हुए भूपेंद्र कैंथोला ने कहा कि ‘ प्रत्येक कलाकार जिस एक थीम से जुड़ा होता है, वह है वास्तविकता और कल्पना का वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण मसला। उन्होंने कहा कि सिनेमा में हमारा वास्ता इसी से पड़ता है जहां वास्तविक चुनौतियां भी पेश आती हैं और सृजन का आनंद भी आता है। यह हमें इस प्रक्रिया को समझने के एक अनूठे अहसास से अवगत करता है जिसमें दर्द भी है, आनंद भी, दुख भी है तथा एक पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से जुड़ी हुई कठिनाइयां भी। उन्होंने कहा कि यह फिल्मकारों और सिनेमा के प्रेमियों, जो हमेशा ही अधिक से अधिक जानने को आतुर रहते हैं, के बीच परस्पर संवाद का एक अंतरंग स्थान प्रस्तुत करता है ‘

एफटीटीआई की पूर्व छात्र राजुला शाह इस अंक की अतिथि संपादक हैं। एक संवेदनशील फिल्मकार राजुला शाह की कृतियां कविता, सिनेमा और मानव शास्त्र के बीच की दरार को पाटती प्रतीत होती हैं। वह चित्र बनाती हैं, लिखती हैं, पुस्तकें, अधिष्ठापन, वेब पोर्टल तैयार करती हैं और कला के सदा परिवर्तनशील रूपों की दिशा में सृजन कार्यों की धुन में लगी रहती हैं।

राजुला शाह कहती हैं, ‘ यह फिल्म विद्यालय की शैक्षणिक पत्रिका है, इसलिए हमने इसका फोकस ‘प्रक्रिया, ‘अध्ययन, फिल्म के ‘निर्माण और एक फिल्मकार पर बनाये रखा है।

‘लेनसाइट पत्रिका में आरंभ में 1991 में प्रकाशित की गई थी जिसका फोकस सिनेमा से जुड़ तकनीकविदों को नई प्रौद्योगिकी के बारे में अवगत कराने के लिए तकनीकी लेखों को छापने एवं फिल्म निर्माण एवं वीडियो निर्माण में उपयोग में आने वाले उपकरणों की जानकारी देने पर था। 2008 में इसके कथ्य और कलेवर में परिवर्तन किया गया तथा फिल्म संबंधित लेखों, खासकर, सौंदर्य बोध मूल्यों पर जोर दिया गया।

पत्रिका के इस विशेष अंक में सतत सृजनशील फिल्मकारों की डायरियों एवं नोटबुक प्रकाशित किए गए हैं जो उनकी दैनिक कार्यप्रणाली के प्रमाण हैं। इस पत्रिका में योगदान देने वालों में एफटीटीआई के विख्यात पूर्व छात्र-छात्राएं हैं जिनमें नंदिनी बेदी जैसी विदेश में बस चुकी भारतीय नागरिक तथा आरवी रमाणी जैसी महत्वपूर्ण आवाज और मौसमी भौमिक जैसी उच्च स्तरीय संगीतज्ञ और अमेरिका में बस चुकी न्यूरोसाइंटिस्ट भी शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें हंसा थपलियाल, अमित दत्ता एवं एफटीआईआई की वर्तमान छात्रा पायल कपाडिया, जिनकी फिल्म द आफ्टरनून क्लाउड्स इस वर्ष केन्स में भारत की एकमात्र प्रविष्टि थी, भी शामिल हैं।

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