विपक्ष को नहीं पचती भारत की बढ़ती लोकप्रियता

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०- जयकृष्ण गौड़

सच्चाई को जो नकारते है, उन्हें भी झूठ के पैरोकार बनने के दोष का परिणाम भुगतना पड़ता है। यही स्थिति है भारत के विपक्ष की, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश के लिए किये गये कार्यों की आँख मीच कर विरोध करते है। मीडिया जब मोदी के कार्यों की सराहना करता है, तब कांगे्रस और अन्य सेक्यूलर जमात यह कहकर विरोध करती है कि मीडिया टीआरपी के लिए मोदी के पक्ष में समाचार प्रसारित कर रहा है। अब विदेशी एजेन्सी अपनी रेटिंग में सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बताती है तो विपक्षी दलों को दर्द होने लगता है। जब अमेरिका की फोब्र्स पत्रिका ने  दुनिया के सभी नेताओं से सबसे अधिक लोकप्रिय नेता मोदी को बताया तब भी मोदी विरोधी नेता इस सच्चाई को स्वीकार करने को तैयार नहीं हुआ, द्वेषभाव से प्रेरित विपक्ष को यह भी ध्यान नहीं रहता कि प्रधानमंत्री मोदी सवा सौ करोड़ भारतीयों के प्रधानमंत्री है, केवल भाजपा के नहीं विदेश की पत्रिका या एजेन्सी मोदी की लोकप्रियता की सराहना करते है तो इससे केवल मोदी की नहीं भारत की भी सराहना होती है। इस बारे में उल्लेख करना होगा कि जब 1971 में इंदिरा गांधी की सरकार ने पूर्वी बंगाल की जनता को पाकिस्तान के पंजे से मुक्त कराने के लिए सैनिक कार्यवाही का निर्णय लिया तो उस समय जनसंघ के नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिराजी की सराहना की थी, क्योंकि उस समय देश का सवाल था, लेकिन लगता है कि वर्तमान में कांग्रेस के नेतृत्व को राष्ट्रहित और राष्ट्रीय गौरव से कोई सरोकार नहीं है, उनके दिलो दिमाग में केवल चुनाव और वोट रहते है और सत्ता सुख चले जाने की छटपटाहट। अंतर्राष्ट्रीय एजेन्सी मूडी ज इनवेस्टर्स सर्विस के विश्व बैंक के कारोबारी आसानी सूचनांक के सर्वे में भारत ने लंबी छलांग लगाते हुए रेटिंग बीएए-3 से सुधारकर बीएए-2 कर दी है। इसके साथ ही आउट लुक भी सकारात्मक से बदल कर स्थिर कर दिया है। रेटिंग के सुधार के साथ भारत को उन देशों की सूची में रखा गया है, जहां निवेशकों के हित सुरक्षित है। उद्योग जगत और शेयर बाजार ने मूडीज के इस कदम का स्वागत किया है। इस अंतर्राष्ट्रीय एजेन्सी के सर्वे की सच्चाई भी कांग्रेस को पच नहीं रही है। कांग्रेस प्रवक्ता राजीव शुक्ला का कहना है कि यह सच्चाई से दूर है। कांग्रेस की स्थिति उन तीन बंदरों की तरह है जो सच्चाई को न सुनना चाहते है, न देखना चाहते है और न बोलना चाहते है। भारत की रेटिंग में सुधार पर जब एक चैनल में बहस चल रही थी, कांग्रेस के प्रवक्ता इसकी भी आलोचना करने लगे, तब एंकर रूबिका ने तमतमाते हुए कहा कि आप भाजपा के साथ क्या देश से भी नफरत करते है।

कांग्र्रेस नेतृत्व का डीएनए विदेशी है, इसलिए उसका देशहित से सरोकार नहीं हो सकता। देशी चोले से विदेशी आत्मा की धडकऩ में केवल वोट है। सवाल यह नहीं है कि जनता के द्वारा नकारा गई कांग्रेस और अन्य सेक्यूलर का मोदी और देश के बारे में क्या रवैया है, महत्व यह है कि जनता मोदी के नेतृत्व और काम से संतुष्ट है। यह भी जानना होगा कि तेरह वर्ष बाद मूडी ज में भारत की रेटिंग में सुधार हुआ है। इस सच्चाई का भी उल्लेख करना होगा कि गत एक डेढ़ माह में जो सर्वे प्रसारित हुए है उन सबने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बढ़ते लोकप्रियता के ग्राफ और मोदी सरकार के कार्यों की सराहना की है। हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय एजेन्सी पियू का सर्वे प्रसारित हुआ, उसमें बताया गया कि 85 प्रतिशत जनता मोदी सरकार पर विश्वास करती है और 88 प्रतिशत लोग मोदी को लोकप्रिय प्रधानमंत्री मानते है। इसी प्रकार इंडिया टूडे के कार्बे इन साइड सर्वे में बताया गया कि अभी तक के प्रधानमंत्रियों में सबसे अधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी है, 37 प्रतिशत रेटिंग के साथ वे पहले नंबर पर है इसके बाद इंदिरा गांधी का नंबर है, जिनकी रेटिंग 17 प्रतिशत है। तीसरे नंबर पर अटल बिहारी वाजपेयी है, जिनकी रेटिंग नौ प्रतिशत बताई है। इसके बाद अर्थात चौथे नंबर पर पं. जवाहर लाल नेहरू है, जिनका रेटिंग केवल आठ प्रतिशत है। अन्य प्रधानमंत्रियों को रेटिंग में शामिल नहीं किया गया। क्रांतिकारी बदलाव के साथ अपने मंत्रियों को सत्ता भोगी की बजाय कार्यों के प्रति समर्पित करने के लिए कामकाज और उपलब्धियों की जानकारी रखने के लिए सतत मानिटरिंग करने से जो परिणाम आये है, उससे दुनिया ने माना है कि भारत उभरती हुई महाशक्ति है, देश में हुए सकारात्मक बदलाव और दुनिया में भारत के बढ़ते प्रभाव को कांग्रेस पचा नहीं पा रही है, द्वेषभाव के साथ उनके अंदर यह अपराध भाव है कि कांग्रेस या उनके गठबंधन की सरकारे ऐसा कुछ भी नहीं कर पाई, जिससे अपनी सरकारों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने प्रस्तुत कर सके। भ्रष्टाचार, कालाधन और जनता के पैसों से ऐश करने की प्रवृत्ति बढ़ती गई। सत्ता सेवा की बजाय भोग के लिए है। जनता के धन की लूट पर मोदी सरकार अंकुश लगाने में सफल रही है। काले कारोबार वालों का पैसा बाहर आ रहा है। विपक्ष इतना घबराया हुआ है कि वह सरकार के हर जनहित के निर्णयों को समझे बिना विरोध करने लगता है, कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की शिक्षा दीक्षा की जानकारी तो नहीं है लेकिन अभी तक के रिकार्ड के अनुसार वे असफल और जनता के द्वारा नकारे गये नेता है, आम लोगों के बीच उनकी छवि छीछोरी एवं छुट भैया नेता से अधिक नहीं है। घबराहट का कारण यह भी है कि राहुल गांधी का रेटिंग धूल चाट रहा है और मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ उस ऊँचाई को छूने लगा है, जिसे आजादी के बाद का कोई नेता नहीं छू सका। विपक्ष नोटबंदी और जीएसटी को जनता के संकट का कारण बताकर मोदी सरकार की आलोचना करता है। उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी इन निर्णयों को मुद्दा बनाने की कोशिश की, लेकिन जनता ने विपक्ष के इस प्रचार को नकारने के साथ भाजपा की ऐतिहासिक जीत दर्ज की। जनता नये बदलाव की परेशानी को सहन करते हुए सरकार के निर्णय के साथ खड़ी रही। गुजरात सरकार चुनाव में भी कांग्रेस उसी घिसी पीटी रिकार्ड को बजाकर लोगों को भ्रमित करना चाहती है। जनता की समझ राजनैतिक नेतृत्व की समझ से गहरी है। आम लोग इस सच्चाई को जानते है कि उनके भविष्य के लिए कौन ईमानदार है और कौन धोकेबाज है। भारत की जनता ने जिस तरह भारत के लोकतंत्र को परिपक्व किया उसी के साथ नारों और मुद्दों से प्रभावित हुए बिना उसने जनहित के कामों की कसौटी निर्धारित की है। गुजरात चुनाव में मोदी सरकार के कार्य के साथ गुजरात की अस्मिता का सवाल भी है, इसलिए गुजरात और हिमाचल चुनाव परिणाम की इबारत दीवार पर लिखी जा चुकी है, अब पर्दा हटना शेष है। सच्चाई को नकारने की स्थिति में कांग्रेस अपनी दुर्गती की ओर बढ़ रही है। उसके मोदी विरोधी प्रचार का परिणाम यह हो रहा है कि जनता का गुस्सा कांग्रेस पर केन्द्रित हो गया है। वैसे भी कांगे्रस की प्रासंगिकता भारतीय राजनीति में इसलिए समाप्त हो रही है कि कांगे्रस के पास न लोकप्रिय नेतृत्व है और न विचार है। भारतीय राजनीति में कांग्रेस ऐसी बोझ बन गई है, जिसको छूना कोई पसंद नहीं करता। भाजपा और मोदी के विराट स्वरूप के सामने कांग्रेस काफी बौनी हो गई है। भारत में वैचारिक दृष्टि से आजादी के बाद त्रिकोणी विचार प्रवाह रहे, सेक्यूलर, साम्यवादी और राष्ट्रवादी। सेक्यूलरी तुष्टीकरण पर केन्द्रित होने से इससे भारत के राष्ट्रीय समाज की न केवल भावना आहत हुई बल्कि देश के सामने गंभीर संकट पैदा हो गये। इसी विकृत सेक्यूलरी के कारण कश्मीर, आतंकवाद के संकट पैदा हुए। साम्यवादी विचार भारत की जड़ से जुड़ा नहीं होने से उसको भारत की जनता ने ही श्रद्धांजलि अर्पित कर दी। अब जनता राष्ट्र केन्द्रित राजनीति और ऐसा ही ईमानदार नेतृत्व पसंद करती है। देश के लिए जीवन समर्पित करने वाला नेतृत्व नरेन्द्र मोदी का है, उनके विचार संकल्प और कार्यों में भारत की जनता अपने महान भविष्य की तलाश कर रही है।
०-लेखक – वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक हैं।
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