शिवराज के मुकाबले ज्योतिरादित्य होंगे कांग्रेस का चेहरा?

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०- अरुण पटेल

कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुकाबले के लिए चेहरा सामने रखकर चुनावी समर में कूदने का लगभग मन बना लिया है। संभवत: यह चेहरा पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का हो सकता है। कमलनाथ भी महत्वपूर्ण भूमिका में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए पूरी मुस्तैदी से सक्रिय रहेंगे। ऐसे संकेत मिले हैं कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति का ऐलान गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जल्द से जल्द करेगी। इस रणनीति में सिंधिया के साथ कमलनाथ की क्या भूूमिका होगी, यह भी स्पष्ट हो जाएगा। कमलनाथ भी अब पूरी तरह से ज्यादातर समय मध्यप्रदेश में ही सक्रिय रहेंगेे। चित्रकूट उपचुनाव में कांग्रेस की भारी मतों से हुई जीत ने कांग्रेसजनों में उत्साह का संचार कर दिया है। भाजपा अब पूरी ताकत लगायेगी कि मुंगावली व कोलारस में होने वाले विधानसभा उपचुनावों में वह हर हालत में जीत का परचम लहराये ताकि यह संदेश जाये कि एक-दो उपचुनाव की हार से शिवराज के चुनाव जिताऊ आभामंडल पर कोई असर नहीं पड़ा है।

चित्रकूट उपचुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तीन दिन में 44 छोटी-बड़ी सभाएं की थीं। इसके अलावा तुर्रा और सरभंगा गांव में रात बिताई थी। इन दोनों गांवों में भाजपा कांग्रेस से पिछड़ गई। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री के रात्रि विश्राम सहित 12 स्थानों पर जहां उन्होंने अधिक ताकत लगाई थी उनमें भाजपा कांग्रेस से न्यूनतम 191 और अधिकतम 1238 मतों से पिछड़ी थी। वैसे तो एक उपचुनाव के नतीजे से कोई फर्क नहीं पड़ता है परन्तु कांग्रेसी तो कम, कुछ भाजपाई अंदरखाने इस बात को प्रचारित कर रहे हैं कि मुख्यमंत्री की चुनाव जिताऊ छवि इससे प्रभावित हुई है। इसलिए जरूरी हो गया है कि मुंगावली व कोलारस की सीटें कांग्रेस से भाजपा छीने और मुख्यमंत्री की चुनाव जिताऊ छवि पर जो कुछ खरोंचें चित्रकूट उपचुनाव से आई हैं उसकी जगह नये ब्यूटी स्पॉट लगाये जा सकें।

चित्रकूट के चुनाव नतीजे ने जहां एक ओर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह का कद व महत्व कांग्रेस की राजनीति में बढ़ा दिया वहीं दूसरी ओर 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी उत्साह बढ़ गया है जिससे उनकी सक्रियता बढ़ेगी। इसके साथ ही दिग्गज नेताओं में एकजुटता के प्रयास भी तेज होंगे। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह की प्रतिक्रिया थी कि यह जीत जनता व कांग्रेस कार्यकर्ताओं के नाम रही है और चित्रकूट की जनता के जनादेश से पूरे देश में कांग्रेस को ऊर्जा मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया, वरिष्ठ नेता कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव के प्रचार अभियान से कांग्रेस की जीत सुनिश्चित हुई है। इसका मतलब भी साफ है कि अब इस नतीजे के बाद कांग्रेस में एकता के प्रयासों को बल मिलेगा, क्योंकि अजय सिंह ने श्रेय देने में पूरी उदारता बरती है जो कि पिछले डेढ़-दो दशकों से चल रही कांग्रेस नेताओं की आपसी प्रतिस्पर्धा से अलग थी।

अब मुंगावली-कोलारस भी भाजपा के लिए आसान नहीं: चित्रकूट की जीत के बाद अब मुंगावली और कोलारस की डगर भी भाजपा के लिए आसान नहीं बची है क्योंकि ये क्षेत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। हाल की जीत से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नये सिरे से जोश भी आ गया है, उन्हें लगने लगा है कि मुख्यमंत्री के सघन दौरे और रोड-शो के साथ ही मंत्रियों व संगठन पदाधिकारियों की भारी भरकम फौज और सत्ता का दबाव होने के बाद भी भाजपा को हराया जा सकता है, यह विश्वास कांग्रेसजनों में पैदा हो गया है। शिवराज के मुकाबले कांग्रेस का चेहरा ज्योतिरादित्य ही होंगे, इसलिए यहां का चुनावी परिदृश्य इन दोनों के बीच मुकाबले का बन ही जायेगा। अजय सिंह ने मुकाबला जीत लिया है तो उसने सिंधिया की राह भी आसान कर दी है। वैसे चित्रकूट की धरा भाजपा के लिए हमेशा पथरीली रही, जबकि मुंगावली और कोलारस उसके लिए वैसी नहीं है। इन दोनों क्षेत्रों में उसका भी दबदबा रहा है। शिवपुरी जिले का कोलारस विधानसभा क्षेत्र 2008 से सामान्य हो गया है जबकि इसके पूर्व यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था। इस क्षेत्र में 6 विधानसभा चुनाव 1990 के बाद से अभी तक हुए हैं जिनमें से दो बार कांग्रेस और चार बार भाजपा ने जीत दर्ज कराई है। इस क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी का भी असर है। उसे न्यूनतम 6.74 और अधिकतम 19.45 प्रतिशत तक मत इन चुनावों में मिलते रहे हैं। बसपा सामान्यतया उपचुनाव नहीं लड़ती और यदि उसने इन दोनों उपचुनावों में चित्रकूट की तरह अपने प्रत्याशी नहीं खड़े किए तो उसका भी फायदा भाजपा की तुलना में कांग्रेस को अधिक मिलेगा।

कोलारस में 1990 में भाजपा के ओमप्रकाश खटीक ने कांग्रेस के पूरनसिंह बेडिया को 19 हजार 130 मतों के अन्तर से पराजित किया था। 1993 में खटीक ने ही कांग्रेस के भगवान लाल जाटव को 11 हजार 701 मतों के अंतर से पराजित किया था। बसपा प्रत्याशी को इस चुनाव में 7 हजार 913 मत मिले थे। 1998 में कांग्रेस के पूरन सिंह बेडिया ने ओमप्रकाश खटीक को 2 हजार 977 मतों से पराजित कर इस सीट को कांग्रेस की झोली में डाला। इस चुनाव में बसपा के राजाराम बिसोर को 11 हजार 420 मत मिले थे। 2008 में सामान्य क्षेत्र होने पर भाजपा के देवेंद्र जैन ने 238 मतों के अंतर से कांग्रेस के रामसिंह यादव को पराजित किया। इस चुनाव में बसपा के लाखन सिंह बघेल को 19 हजार 912 मत मिले। लेकिन 2013 में रामसिंह यादव ने देवेंद्र जैन को 24 हजार 953 मतों के भारी अंतर से पराजित कर यह सीट भाजपा से छीन ली। इस चुनाव में बसपा को भी 23 हजार 920 मत मिले।

अशोकनगर जिले के मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में 1990 के बाद हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस का पलड़ा लगभग बराबरी का रहा और 6 चुनावों में से तीन-तीन बार दोनों ने यहां जीत दर्ज कराई। इस क्षेत्र में भी बसपा को काफी मत मिलते रहे हैं और उसके प्रत्याशी को न्यनूतम 7 हजार 354 और अधिकतम 13 हजार 754 तक मत मिले थे। 1990 में भाजपा के देशराज सिंह यादव ने निर्दलीय आनंद कुमार पालीवाल को 6 हजार 894 मतों से पराजित किया था। लेकिन 1993 में जब आनंदकुमार पालीवाल कांग्रेस उम्मीदवार हो गए तब देशराज सिंह यादव को उन्होंने 771 मतों के अन्तर से पराजित कर दिया। इस चुनाव में बसपा के कनईराम को 16 हजार 257 मत मिले थे। 1998 में देशराज सिंह यादव ने कांग्रेस के राजेंद्र सिंह लोधी को 7 हजार 736 मतों के अंतर से पराजित किया। लेकिन 2003 में जबकि प्रदेश में प्रचंड कांग्रेस विरोधी लहर थी उस समय कांग्रेस के गोपाल सिंह चौहान ने भाजपा के देशराज सिंह को 9 हजार 576 मतों के अंतर से पराजित कर दिया। 2008 में फिर यादव ने कांग्रेस के अरविंद कुमार को 20 हजार 878 मतों के अंतर से पराजित किया। इस चुनाव में बसपा के राजाराम नगेजी को 13 हजार 754 मत मिले। 2013 में कांग्रेस के महेंद्र सिंह कालूखेड़ा ने देशराज सिंह को 20 हजार 765 मतों के अंतर से पराजित कर यह सीट फिर जीत ली। कोलारस व मुंगावली दोनों उपचुनाव कांग्रेस विधायकों के निधन से रिक्त हुए स्थान की पूर्ति के लिए हो रहे हैं। यहां कांग्रेस के दोनों प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया की सहमति से तय होंगे। यहां कांग्रेस कालूखेड़ा और यादव के परिवार के किसी सदस्य को उम्मीदवार बनाकर सहानुभूति का लाभ भी लेना चाहेगी। प्रत्याशी चाहे जो हो, जिस तरह चित्रकूट में अजय सिंह ने चुनाव लड़ा, उसी तर्ज पर मुंगावली व कोलारस का चुनाव सिंधिया लड़ेंगे। देखने की बात यह होगी कि शिवराज इन दोनों क्षेत्रों को कांग्रेस से छीन पाते हैं या नहीं।
०- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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