आकाशवाणी से ‘रमन के गोठ’ की 27वीं कड़ी-आ गया धान खरीदी का समय-डॉ. रमन सिंह

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रायपुर। (हिन्द न्यूज सर्विस/वीएनएस)। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने आज सवेरे अपनी मासिक रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ में प्रदेशवासियों को सम्बोधित करते हुए कहा – इस वर्ष धान बेचने के लिए पिछले साल के मुकाबले एक लाख 27 हजार से ज्यादा किसानों ने अपना पंजीयन करवाया है। इन्हें मिलाकर राज्य की सहकारी समितियों में धान बेचने के लिए पंजीयन कराने वाले किसानों की संख्या 15 लाख 79 हजार हो गई है। पिछले वर्षों की तुलना में यह सबसे ज्यादा है।

उल्लेखनीय है कि आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र से आज प्रसारित मुख्यमंत्री की रेडियो वार्ता ‘रमन के गोठ  का यह 27वां एपिसोड था। उनकी वार्ता का प्रसारण राज्य में स्थित आकाशवाणी के सभी केन्द्रों से एक साथ किया गया। गांवों और शहरों में लोगों ने सामूहिक रूप से भी उनका प्रसारण सुना। कुछ टेलीविजन चैनलों ने भी ‘रमन के गोठ का प्रसारण किया।
डॉ. रमन सिंह ने अपनी रेडियो वार्ता में कहा- खरीफ मौसम 2017 में हुई धान की फसल खरीदने का समय आ गया है। उन्होंने कहा – धान खरीदी 15 नवम्बर से शुरू हो रही है, जो 31 जनवरी तक चलेगी। सारी व्यवस्थाएं कर ली गई हैं। किसान भाई-बहनों को अपना धान बेचने के लिए ज्यादा दूर न जाना पड़े इसके लिए औसतन प्रत्येक साढ़े पांच ग्राम पंचायतों के बीच एक धान खरीदी केन्द्र खोला गया है। प्रदेश में धान खरीदी केन्द्रों की संख्या एक हजार से बढ़ाकर एक हजार 992 अर्थात् दोगुनी कर दी गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा- खरीदी और भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था की गई है। जिस दिन धान खरीदी होगी, उसी दिन किसानों के बैंक खातों में राशि चली जाएगी। इस वर्ष धान के समर्थन मूल्य में 80 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इसके फलस्वरूप मोटा धान 1550 रूपए और पतला धान 1590 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा। किसानों को वर्ष 2018 में इसके लिए प्रति क्विंटल 300 रूपए का बोनस भी दिया जाएगा। इस प्रकार उन्हें प्रति क्विंटल धान पर 1900 रूपए तक मिलेंगे। एक फसल का दो बार भुगतान होगा, जो पहले दाम के रूप में और बाद में बोनस के रूप में होगा। मुख्यमंत्री ने किसानों से धान को सुखा कर और साफ-सफाई करके समितियों में बेचने के लिए लाने की अपील की है, ताकि उन्हें खरीदी केन्द्रों में सुविधा हो सके। उन्होंने कहा – समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे खरीदी केन्द्रों में किसानों की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखे।

डॉ. रमन सिंह ने बताया – मक्का की खरीदी भी 15 नवम्बर से शुरू होगी और 31 मई तक अर्थात् करीब साढ़े छह महीने तक चलेगी। इस वर्ष मक्के का समर्थन मूल्य 1365 रूपए से बढ़ाकर 1425 रूपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है। इस प्रकार मक्के की दर में भी 60 रूपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। जहां धान की पैदावार कम होती है, वहां मक्के की पैदावार बढ़ रही है। विशेष रूप से राज्य के आदिवासी इलाकों में मक्के की खेती किसानों की आमदनी का एक बड़ा माध्यम है। डॉ. सिंह ने कहा – जिन केन्द्रों में धान खरीदी होगी, उन्हें केन्द्रों में मक्के की भी खरीदी की जाएगी और उसका भुगतान भी किसानों के बैंक खातों में तुरंत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा – धान की फसल छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाकों की जीवन रेखा है तो तेन्दूपत्ता वन क्षेत्रों और आदिवासी बहुल इलाकों की जीवन रेखा है। हमने समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और किसानों को बोनस देने की व्यवस्था करके लगभग 14 लाख किसानों को एक नई ताकत दी है। लगभग इतनी ही संख्या में वनवासी और आदिवासी परिवारों को तेन्दूपत्ते के कारोबार से लाभ देने की व्यवस्था की गई है। डॉ. सिंह ने कहा – बस्तर और सरगुजा संभाग के जिलों के अलावा आंशिक रूप से राजनांदगांव, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चाम्पा आदि जिलों में भी तेन्दूपत्ता होता है, जिसके संग्रहण और बिक्री का लाभ स्थानीय ग्रामीण जनता को मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा यह लगभग 14 लाख परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है। इस बात को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने तेन्दूपत्ता संग्रहण का पारिश्रमिक 450 रूपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 1500 रूपए और 1800 रूपए तक पहुंचाया और अब नये सीजन के लिए इसकी संग्रहण दर 2500 रूपए प्रति मानक बोरा करने का निर्णय लिया गया है। इस प्रकार हमने तेन्दूपत्ता संग्रहण का पारिश्रमिक 555 प्रतिशत या साढ़े पांच गुणा से ज्यादा बढ़ा दिया है। एक बार में 700 रूपए प्रति मानक बोरा पारिश्रमिक बढ़ाना बहुत बड़ा कीर्तिमान है। धान की तरह हम तेन्दूपत्ता मजदूरों को भी बोनस देते हैं। वर्ष 2016 के तेन्दूपत्ता बोनस के रूप में 274 करोड़ 38 लाख रूपए का भुगतान किया जाएगा। यह राशि 901 प्राथमिक वनोपज समितियों के 14 लाख तेन्दूपत्ता श्रमिकों को मिलेगी। तेन्दूपत्ता बोनस तिहार मनाने का निर्णय लिया गया है। यह तिहार एक दिसम्बर 10 दिसम्बर तक चलेगा। इसमें सिर्फ बोनस ही नहीं बांटा जाएगा, बल्कि वनवासियों के जीवन में बदलाव लाने वाली योजनाओं का प्रचार-प्रसार करते हुए हितग्राहियों को उनका लाभ भी दिलाया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि विगत 13 वर्षों में राज्य सरकार ने तेन्दूपत्ता संग्राहकों को एक हजार 842 करोड़ रूपए का पारिश्रमिक और एक हजार 235 करोड़ रूपए का बोनस दिया है। डॉ. सिंह ने तेन्दूपत्ता श्रमिकों के लिए संचालित चरण पादुका योजना, उनके परिवारों के बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए की गई व्यवस्था की भी जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के बच्चों को हर साल लगभग पांच करोड़ रूपए की छात्रवृत्ति दी जा रही है। संग्राहकों को इस साल भी चरण पादुका दी जाएगी। उन्होंने कहा – राज्य सरकार ने अपने ऐसे कदमों से आदिवासी – वनवासी भाई-बहनों का विश्वास जीता है। यही वजह है कि आज तेन्दूपत्ता मजदूरों के परिवारों में भी शिक्षा के प्रति, सेहत के प्रति और विकास के प्रति चेतना जागी है। हमारे ‘प्रयास’ आवासीय विद्यालयों में तेन्दूपत्ता मजदूरों के बच्चे भी रहते हैं, पढ़ते हैं, कोचिंग पाते हैं और कई बच्चे मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री ने नारायणपुर जिले के ग्राम गढ़बेंगाल निवासी लखेश्वर प्रधान के बेटे विमल कुमार का भी जिक्र किया, जो अब मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे हैं।

उन्होंने अपनी रेडियो वार्ता में कहा – राज्य सरकार ने अब तक तीन लाख 63 हजार से ज्यादा परिवारों को वन अधिकार मान्यता पत्र दिया है और करीब 12 हजार सामुदायिक वन अधिकार मान्यता पत्र भी दिए हैं। खेती के लिए वनवासी परिवारों को दो लाख 58 हजार हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। तेन्दूपत्ते के अलावा महुआ बीज, साल बीज, चिरौंजी गुठली, हर्रा, रंगीनी लाख, कुसुमी लाख और ईमली की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर करने की व्यवस्था की गई है। इससे वनवासियों के घरों में 100 करोड़ रूपए से ज्यादा अतिरिक्त राशि पहुंची है।

मुख्यमंत्री ने ‘रमन के गोठ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित सौभाग्य योजना पर भी प्रकाश डाला। डॉ. सिंह ने कहा – यह हर घर में बिजली पहुंचाने के लिए ‘सहज बिजली-हर घर योजनाÓ है। प्रधानमंत्री ने 25 सितम्बर 2017 को इसकी शुरूआत की है। छत्तीसगढ़ में अब तक 98.67 प्रतिशत गांवों का विद्युतीकरण हो चुका है। अब केवल 465 गांवों और 7 हजार मजरो-टोलों का विद्युतीकरण होना बाकी है। हम वर्ष 2018 तक विद्युतीकरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लेंगे। प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना के तहत हम निश्चित तौर पर सितम्बर 2018 तक हर घर में बिजली पहुंचाएंगे।

डॉ. रमन सिंह ने रेडियो वार्ता में कहा – मैं चाहता हूं कि जल्द ही राज्य में ‘ऊर्जा उत्सवÓ की शुरूआत हो। जिस गांव में विद्युतीकरण के बाद हर घर में बिजली का कनेक्शन पहुंचे, हर गांव में विद्युत विकास का काम तेजी से पूरा हो और वहां ऊर्जा उत्सव मनाया जाए। उन्होंने कहा- ऊर्जा उत्सव के दौरान बिजली की कम खपत वाले एलईडी बल्ब, ट्यूबलाईट, पंखे, सौर ऊर्जा के लिए रूफ टॉप योजना, सार्वजनिक उपयोग की पेयजल योजना, सोलर हाई मास्ट लैम्प आदि के लिए भी जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा – प्रधानमंत्री सौभाग्य योजना अर्थात् सहज बिजली – हर घर योजना वास्तव में विद्युत विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक को दिलाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है, जिसमें मिली सफलता को हम ‘ऊर्जा उत्सवÓ के रूप में व्यक्त करेंगे, ऐसी हमारी योजना है।

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