टोटका के चलते इन्दौर में खूब बिक रहे कपूर व इलायची

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इन्दौर। (हिन्द न्यूज सर्विस)। शहर में जब भी कोई बीमारी फैलती है, उसके बचाव के लिए तरह-तरह के नुस्खे मार्केट में आ जाते हैं। अब जमाना सोशल मीडिया का है, इसलिए इस प्रकार के नुस्खे और टोटके खूब तेजी से फैलते हैं। इन दिनों चिकनगुनिया, डंगू, स्वाइन फ्लू और सामान्य वायरल (सर्दी-खांसी बुखार) से बचने के लिए लोग कपूर और इलायची का टोटका खूब अजमा रहे हैं। इस टोटके में लोग इलायची और कपूर के मिश्रण को मिलाकर किसी सूती कपड़े में बांधकर अपने और परिजनों के बाजू या गले में बांध रहे हैं ताकि वे इन बीमारियों की चपेट में न आएं। वैसे यह टोटका शहर में वर्ष २००९-१० और २०१४-१५ में जब स्वाइन फ्लू फैला तब भी बहुत चला था। बिना सोचे-समझे, बिना सलाह लिए भेड़चाल की तर्ज पर लोग कपूर इलायची का इस्तेलाम कर रहे हैं, लेकिन जिन लोगों को कपूर से एलर्जी है, वे इससे बीमार भी हो रहे हैं। कपूर और इलायची के मिश्रण से तेज खुशबू उठती है, जो हरेक को सहन नहीं होती। कुछ लोग इसे बार-बार सूंघते हैं, जो उसके लिए परेशानी का कारण भी बन जाता है और इससे सिरदर्द और सर्दी-जुकाम की शिकायत भी हो जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका इस्तेमाल अब तक सही साबित नहीं हुआ है, लेकिन यदि इस्तेमाल कर भी रहे हैं, तो इसमें सावधानी बरतें, खासकर जिन्हें एलर्जी, अस्थमा आदि की शिकायत है। वायरसजनित बीमारियों के इलाज में जमकर दुकानदारी शुरू हो गई है। कई लोगों ने इन बीमारियों से बचने के लिए इम्युनिटी (रोग-प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने और बीमारियों से बचने की दवा बेचना शुय कर दी है। लोग डरकर इन दवाओं का सेवन भी कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह की ज्यादातर बीमारियों के इलाज के लिए दवा नहीं वेक्सीन होता है। साथ ही इन बीमारियों से लडऩे के लिए शरीर में एंटीबाडी बनती है जो वायरस को समाप्त कर देती है। कुछेक बीमारियों जैसे स्वाइन फ्लू में टेमीफ्लू दवा दी जाती है, लेकिन डेंगू और चिकनगुनियाव आदि में तो बुखार और दर्दनाशक दवा दी जाती है। ऐसे में कपूर-इलायची या अन्य पैथी की दवा कितनी कारगर होगी, यह कह नहीं सकते। इससे बेहतर है, अपने आस-पास मच्छर को नहीं पनपने दें। इस बार शहर में वायरल का खतरनाक प्रकोप है। हालात यह हैं कि हर घर में कोई न कोई बीमारी की चपेट में है। कागदीपुरा के दिलशाद नकवी ने बताया कि यहां हर घर में यह बीमारी फैली हुई है। नालियां चोक हैं, गंदगी के कारण मच्छरों की भरमार है। नगर निगम, सीएम हेल्प लाइन में शिकायत की तो निगमकर्मी आकर एक-दो फावड़े चलाकर चले गए। समस्या जस की तस है। लोग बीमार हो रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि बीमारी फैलाने वाले इन मच्छरों से कैसे बचें। शहर में फैल रही बीमारियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग तो थोड़ा सक्रिय हुआ है, लेकिन मलेरिया विभाग और नगर निगम अभी भी नींद में है। जानकारों का कहना है कि जब वायरस का प्रकोप समाप्त होने का समय आएगा तब वे विभाग इन बीमारियों से बचने और लोगों को जागरूक करने के लिए जगह-जगह होर्डिंग्स लगाएंगे। दीवारों पर स्लोगन लिखवाएं जाएंगे। एंटी लार्वा टीम घर-घर दौड़ेगी और जहां लार्वा मिलेगा, वहां पर जुर्माना करेगी और फिर बीमारी खत्म होने का श्रेय में लूट लिया जाएगा। पिछले वर्षों के अनुभव से इन्हें मालूम है कि फील्ड में कब सक्रिय होना है ताकि वाह-वाही भी मिल जाए और जेब भी भर जाए।

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