५३ में से ३३ जिलों में जल संकट की दस्तक

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। राज्य में एक ओर जहां राज्य के ५३ जिलों में से ३३ से ज्यादा जिले ऐसे हैं जहां की आबादी जल संकट से जूझ रही है तो वहीं हमारी सरकार के मुखिया इन दिनों नमामि देवी नर्मदे यात्रा में लगे हुए हैं ऐसे में उन्हें उन ३३ जिलों से ज्यादा जिलों के निवासियों की कोई चिंता नहीं है, तो वहीं जिस धार में आगामी दिनों प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक होना है उस जिले के २०० से अधिक गांव के निवासी पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन फिर भी वहाँ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और अधिकारियों के सहयोग से होने वाली प्रदेश कार्यकारिणी की जोर-शोर से तैयारी की जा रही है, लेकिन जिले के प्रशासन को उन २०० से अधिक धार के ग्रामीणों की चिंता नहीं जो इन दिनों पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, सवाल यह उठता है कि राज्य के आधी आबादी से ज्यादा जिले के रहवासी पानी के संकट से जूझ रहे हैं तो इस समस्या का समाधान गर्मी आने से पूर्व क्यों नहीं खोजा गया। सवाल यह भी उठता है कि क्या राज्य में पेयजल संकट से निपटने की सारी योजनायें प्रदेश की अन्य योजनाओं की तरह भी कागजों पर ही सम्पन्न हुई हैं। इस संबंध में प्रदेश के विधायकों क ा यह भी कहना है कि हैण्डपंपों को कागजों में सुधार दिया गया जबकि जमीनी तौर पर हैण्डपंप आज भी खराब पड़े हुए हैं, बीते साल बुंदेलखण्ड सहित प्रदेश के अन्य अंचलों में पानी को लेकर खूब हंगामा मचा था, योजना में भ्रष्टाचार सामने आया था, लेकिन इसके बाद भी इस सरकार ने उस समस्या से कोई सबक नहीं लिया और आज भी एक रिपोर्ट के अनुसार तो वहीं प्रदेश के सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक और अन्य दलों के विधायकों की मानें तो हकीकत में प्रदेश के अधिकांश जिलों के हैण्डपंप सूखे पड़े हैं, पेयजल को लेकर तमाम बनाई गई योजनाओं के बावजूद भी प्रदेश में पेयजल समस्या सुधार होने का नाम नहीं ले रही है और उल्टी स्थिति यह है कि प्रदेश में जहां जल स्तर घटता जा रहा है जिससे प्रदेश में पेयजल की स्थिति को लेकर संकट खड़ा होता जा रहा है। इसको लेकर जैसा कि जानकारों का कहना है कि यह सब खेल लोगों के द्वारा अंधाधुंध पेड़ों की कटाई करना और नदियों से पर्यावरण के प्रति ध्यान न देने के साथ-साथ राज्य की जीवनदायिनी नदियों से अंधाधुंध रेत का उत्खनन होने के कारण प्रदेश में पेयजल संकट की स्थिति का सिलसिला जारी है, प्रदेश के पीएचई विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में २०१६-१७ में पाँच हजार हैण्डपंपों को नये प्लेटफार्म बनाकर शुरू करना था लेकिन महज ३०७० हैण्डपंप ही शुरू हो सके, इसी तरह ९४७ हैण्डपों की ही सुधारने का काम किया जा सका, रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कल पांच लाख ३२ हजार ४४७ हैण्डपंप ग्रामीण क्षेत्रों में हैं उनमें से महज ८३९६ हैण्डपंप बंद ही पड़े हैं, इसके विपरीत विधायकों की मानें तो उनके क्षेत्रों में ४० फीसदी हैण्डपंपों की रिपोर्ट सरकारी दस्तावेजों में गलत जानकारी दी गई, विधायकों के अनुसार हैण्डपंपों के सुधार कार्य केवल कागजों में ही हुआ, जबकि जमीनी तौर पर आज भी हैण्डपंप खराब पड़े हुए हैं और शायद यही वजह है कि पेयजल की समस्या को लेकर राज्यभर के विधायकों और जनप्रतिनिधियों के द्वारा आयेदिन जिला प्रशासन और पीएचई विभाग के अधिकारियों से बहस का दौर प्रारंभ हो गया है और समय रहते यदि इस समस्या से निपटने के लिये कोई कारगार कदम नहीं उठाया गया तो राज्य में पेयजल की समस्या को लेकर जो स्थिति बनेगी उसका तो अंदाजा ही लगाया जा सकता है। राज्य में पेयजल के इस संकट के लिये मध्यप्रदेश विद्युत मण्डल भी कम जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि एक ओर तो वह पाँच सौ रुपए का गरीब उपभोक्ता पर बकाया होने पर उसक कनेक्शन काट देती है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश के उद्योगपतियों और क्रेशर मालिकों के साथ-साथ सोम डिस्टलरी जैसे शराब उत्पादकों पर लाखों रुपए बकाया होने के बाद उनके कनेक्शन काटने की हिम्मत विभाग के अधिकारी नहीं जुटा पाते हैं लेकिन यह जरूर है कि वह ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित होने वाली पेयजल योजनाओं पर हजारों रुपए बकाया होने के चलते उनके कनेक्शन काटने में तत्परता दिखाते दिखाई देते हैं, फिर भले ही उनकी इस मनमानी के कारण ग्रामीण क्षेत्र में चल रही पेयजल योजना के अंतर्गत आने वाले ग्रामीणों के सामने पेयजल की समस्या उत्पन्न हो जाए, उन्हें इससे कुछे लेना-देना नहीं, राज्य में इस तरह की व्रिद्युत विभाग की कार्यप्रणाली के चलते कई ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली ग्रामीण पेयजल योजनाओं के बिल के बकाया होने और उनके विद्युत विभाग द्वारा कनेक्शन काटने को लेकर पेयजल संकट की स्थिति निर्मित हो रही है, हालांकि हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा सत्र के दौरान अपने विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा करते हुए राज्य के ऊर्जा मंत्री पारस जैन ने यह घोषणा की थी कि राज्य में चलने वाली ग्रामीण पेयजल योजनाओं के कनेक्शन नहीं काटे जाएंगे, लेकिन फिर भी उनकी इस घोषणा का असर कितना हुआ है यह तो उन ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों को पता है जिनकी पेयजल योजनाओं के कनेक्शन विद्युत विभाग द्वारा काट दिये गये और वह इस स्थिति से जूझ रहे हैं। इस सब मसले पर जैसा विपक्षी पार्टियंा और नेताओं की स्थिति होती रही है तो वैसा ही अपनी नेतागिरी चमकाने वाले यह बयानवीर केवल और केवल बयानबाजी करके ही अपने कर्तव्यों का निर्वहन समझ लेते हैं। ऐसा ही कुछ हमारे प्र्रदेश के प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा यह नीति अपनाई जा रही है कि वह जनता के संघर्ष में सहभागी न बनकर केवल बयान जारी करने में लगे रहते हैं। ऐसा ही कुछ उपनेता प्रतिपक्ष बाला बच्चन ने भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की दिशा में पीएचई विभाग पर निशाना साधते हुए यह कहते हुए कि पीएचई की हैण्डपों को चालू बताने वाली रिपोर्ट में चालीस फीसदी झूठी संख्या बताई गई है, सरकार में भ्रष्टाचार को खुलेआम संरक्षण दिया जा रहा है तो वहीं उपनेता प्रतिपक्ष की तरह राज्य के कुछ विधायकों को यह कहना है कि पानी को लेकर जनता की समस्या बढ़ती जा रही है और सरकार की अफसरशाही झूठी रिपोर्ट बताने में लगी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल को लेकर वहां के निवासी भारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं तो वहीं सरकार की अफसरशाही केवल भ्रष्टाचार में लगी है और सरकार उसे संरक्षण देती नजर आ रही है। नलजल योजना और हैण्डपंपों की स्थिति की जांच किये जाने की मांग भी यह विधायक करते नजर आ रहे हैं, कुल मिलाकर राज्य में भाजपा के शासनकाल में आंकड़ों की बाजीगरी और जनप्रतिनिधियों की अपने नेताओं की गणेश परिक्रमा के चलते उन्हें इतनी फुर्सत नहीं मिल पा रही है कि वह जल संकट से जूझ रहे लोगों की परवाह हो।

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