१३३ करोड़ के कागजी प्रोजेक्ट में ठेकेदार को पहुँचाया करोड़ों का लाभ

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। पिछले कुछ दिनों से मध्यप्रदेश के कुछ भारतीय जनता पार्टी से जुड़े नेता और शिवराज मंत्रीमण्डल के कुछ मंत्रियों की कार्यप्रणाली को लेकर ऐसा नजर आ रहा है कि यह सब वह खेल खेल रहे हैं जिससे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनहितैषी छवि खराब हो और पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं में मुख्यमंत्री की किरकिरी हो। ऐसा ही कुछ खेल खेला जा रहा है और ऐसा लगता है कि यह खेल आज से नहीं बल्कि वर्षों से खेला जा रहा है। जिसके चलते जयंत मलैया और जुलानिया ने अपने विभाग में कुछ इस तरह की कारगुजारी करने में मस्त हैं जिसके चलते कागजी आंकड़ों में तो योजना की सफलता के झंडे गाड़े जाएं लेकिन कई योजनाओं की तो कागजी तैयारी के चलते करोड़ों रुपये राज्य के खाली खजाने को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। ऐसा ही खेल जयंत मलैया के विभाग द्वारा मुख्यमंत्री से कहीं अधिक राष्ट्रीय नेताओं में अपने माक्र्स बढ़ाने के खेल में भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता से जुड़ी सरला मेंटाना प्राइवेट लिमिटेड को लाभ पहुँचाने का प्रयास किया गया। अब जब इस योजना का खुलासा हुआ तो यह साफ जाहिर होता है कि मध्यप्रदेश में यूँ तो अधिकांश योजनाओं में फर्जीवाड़ा कर अपने लोगों को उपकृत करने की भाजपा सरकार की एक परम्परा सी बन गई है तो वहीं फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर हर योजनाओं में घोटाला करना भी एक परम्परा बन गई है। शायद देश का मध्यप्रदेश पहला राज्य होगा जहां भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के चहेतों और उनके परिजनों की तमाम कम्पनियां इस प्रदेश में सत्ताधीशों अधिकारियों के संरक्षण में योजनाओं की सफलता के कागजी घोड़े दौड़ाकर करोड़ों रुपये का लाभ उठाने में लगे हुए हैं ऐसी ही एक भाजपा के केन्द्रीय नेताओं से जुड़ी कंपनी सरला मेंटाना प्राइवेट लिमिटेड कंपनीे इन दिनों चर्चाओं में है इस कम्पनी को बाणसागर बांध से वीरसिंहपुर क्षेत्र में पानी लाने के लिये मझगवां साख नहर की योजना बनाई गई, कागज पर बनी १३३ करोड़ की इस योजना का लाभ क्षेत्र को तो नहीं मिला लेकिन ठेकेदार को जरूर दस करोड़ से अधिक का लाभ पहुंचा दिया गया। मजे की बात यह है कि इस कागजी योजना में केन्द्रीय जल आयोग के दिशा निर्देशों के विपरीत बाणसागर परियोजना के अधिकारियों ने भौगोलिक स्थिति का अध्ययन किए बिना मझगवां शाखा नहर के निर्माण की कार्य योजना बनाई। अपने चहेते ठेकेदार को काम दिलाया। बिना काम किए दस करोड़ का भुगतान कर दिया। भुगतान का खुलासा होने के बाद नहर निर्माण के डीपीआर में तकनीकी कमी का हवाला देकर नए सिरे से सर्वे कराए जाने का ढोंग शुरू कर दिया गया है। इस परियोजना को प्रदेश सरकार की उपलब्धियों में गिनाकर चार साल पहले तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया ने भूमि पूजन किया था। इसके बाद जल संसाधन विभाग (बाणसागर बांध) के अधिकारियों ने अमल शुरू किया। मझगवां बिरसिंपुर क्षेत्र की १९ हजार २१७ हेक्टेयर जमीन सिंचित किए जाने का प्रावधान किया गया। प्रदेश सरकार ने बिना किसी देरी के मझगवां शाखा नहर के लिए १३३ करोड़ रुपए की राशि आवंटित कर दी। नहर निर्माण कार्य का ठेका सरलार मेंटाना प्राइवेट लिमिटेड हैदराबाद को दिया गया। इसके बाद अधिकारियों की नीयत डोल गई। नहर के लिए जमीन अधिग्रहण किए जाने का ढोंग रचा। सूत्रों कील मानें तो सरला मेंटना प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को बिना किसी काम के दस करोड़ का भुगतान किया गया। अब इसी मझगंवा शाखा नहर के पूर्व में बनाए गए डीपीआर में तकनीकी कमी बताकर काम को बंद करा दिया गया। सवाल यह उठता है कि जब इस योजना को तैयार किया जा रहा था तो इन खामियों को नजरअंदाज क्यों किया गया तो वहीं पार्टी के राष्ट्रीय नेता से जुड़ी इस कंपनी को लाभ पहुंचाने की किसने कोशिश की इस तरह के खुलासे की मांग करते हुए भाजपा के नेता ही नहीं बल्कि कांग्रेस के कई नेता यह कहते नजर आ रहे हैं कि इस पूरी योजना में हुए गड़बड़झाले पर जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया को यह स्पष्ट करना चाहिए कि यह कंपनी पार्टी के किस राष्ट्रीय नेता से जुड़ी हुई है उसके नाम का खुलासा भी किये जाने की मांग उठी है। मंत्री के मुताबिक बाणसागर बांध परियोजना के पुरवा नहर के लिए केंद्रीय जल आयोग से स्वीकृति दी, लेकिन मझगवां शाखा नहर के निर्माण का कोई जिक्र नहीं। सवाल यह उाठ रहा है कि केंद्रीय जल आयोग को भेजे गए प्लान में मझगवां शाखा नहर के मंजूर नहीं होने पर अधिकारियों ने कार्य योजना क्यों तैयार की? मझगवां शाखा नहर के निर्माण से जुड़े कई सवाल अभी हैं ९२ किलोमटर पुरवा नहर को जीवित रखने के लिए ६.० क्यूमेक्स पानी चाहिए। इसी पानी के बहाव के हिसाब से नहर तैयार की गई, जबकि मझगवां शाखा नहर में नौ क्यूमेक्स पानी छोड़ा जाना है, यह पूरवा नहर से कैसे आएगा? नहर के फूटने का खतरा रहेगा। प्रोजेक्ट को लेकर जल संसाधन बाणसागर परियोजना के अधिकारियों की मंशा शुरू से ही सही नहीं थी। भौगोलिक स्थिति जाने बिना टोपोशीट आधार के १३३ करोड़ की कार्ययोजना कागजों में उतार दी। सरलार मेंटाना प्राइवेट कंपनी से नहर निर्माण के करार के बाद फील्ड सर्वे किया गया। कमी बताई गई कि मझगंवा शाखा नहर के कमांड क्षेत्र में कुबरी एवं अकौना का क्षेत्र भी शामिल होगा। साथ ही टेल माइनर के कमांड का भी कुछ हिस्सा मझगवां शाखा नहर में आ गया है। इस वजह से मझगवां शाखा नहर से १९ हजार २१७ हेक्टेयर की बजाए १२ हजार ५०० हेक्टैयर जमीन सिंचित होगी। सिंचाई का सात हजार हेक्टेयर से अधिक रकबा घट गया। ये खेल जलसंसाधन विभाग के वरिष्ठ अफसर के इशारे पर किया गया, जिसकी अंदरूनी पार्टनशिप मेंटाना के साथ जगजाहिर है। जल संसाधन विभाग इस प्रदेश का एक ऐसा विभाग है जिस विभाग के मुखिया रहे राधेश्याम जुलानिया के कार्यकाल में ऐसे एक नहीं अनेकों कार्य ऐसे सम्पन्न हुए जो सिर्फ कागजों पर तैयार कर कंपनियों को फायदा पहुंचाने का खेल खेला गया तो वहीं जुलानिया की हठधर्मी के चलते इस विभाग की कई योजनाओं में करोड़ों रुपये का शासन को नुकसान पहुंचाया गया लेकिन इसके बाद भी जुलानिया सरकार के हितैषी और आंख के तारे बने हुए हैं।

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