सोशल ऑडिट और स्मार्टफोन घोटाले को लेकर ‘सरकार’ की घेराबंदी

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०- अरुण पटेल


एक ओर जहां मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नर्मदा सेवा यात्रा की महती सफलता के बाद 47 आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा का वोट बैंक बढ़ाने,आदिवासी अधिकार यात्रा निकालने का रोड मैप तैयार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर नर्मदा सेवा यात्रा का सोशल आडिट करने का आगाज पूर्व विधायक और भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे गिरिजा शंकर की अगुवाई में तीन सदस्यीय कमेटी ने कर दिया है। कमेटी द्वारा पांच जून को ‘विचार मध्यप्रदेश के बैनर तले इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक किया जाएगा। विचार मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया के नाम पर मध्यप्रदेश में शून्य टर्नओवर वाली कंपनी को 3 लाख 75 हजार स्मार्टफोन सप्लाई करने का आदेश देने का आरोप लगाते हुए शिवराज सरकार की घेराबंदी करना प्रारंभ कर दिया है। नर्मदा में अवैध उत्खनन को भी आने वाले समय में एक बड़ा मुद्दा बनाने में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और विचार मध्यप्रदेश अपनी पूरी ताकत लगाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखेंगे।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान काफी समय पूर्व से ही पूरी तरह से चुनावी मोड में आ चुके हैं और उनका प्रयास केवल 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार बनाना ही नहीं बल्कि 230 में से 200 से अधिक विधानसभा सीटें जीतने का है। नर्मदा सेवा यात्रा के माध्यम से जो अनुकूल व सकारात्मक माहौल इस अंचल में बना है उसका पूरा-पूरा फायदा विधानसभा चुनाव में निश्चित तौर पर भाजपा को मिलेगा। प्रदेश में सत्ता का रास्ता नर्मदांचल यानी जहां-जहां से नर्मदा प्रवाहित होती है वह और आदिवासी अंचल के बीच से होकर गुजरता है। इस इलाके में जिसे भी बहुमत मिलेगा वह आसानी से प्रदेश में सरकार बना लेगा। नर्मदा अंचल में शिवराज ने अपनी एक अलग ‘नर्मदा सेवक की छवि बनाई है। इसके बाद अब वे आदिवासी अधिकार यात्रा निकाल कर इन वर्गों में भाजपा की पकड़ को और मजबूत करना चाहते हैं। कांग्रेस को भी आदिवासियों से विशेष समर्थन की उम्मीद है। ऐसे में शिवराज की यह यात्रा कांग्रेस के 15 साल बाद सत्ता में वापसी के मंसूबों पर पानी फेर सकती है। कांग्रेस,चौपाल के माध्यम से जगह-जगह सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। अन्य आरोपों के साथ ही मुख्य रुप से वह नर्मदा नदी सहित अन्य स्थानों पर हो रहे रेत के अवैध उत्खनन का मामला जोरशोर से उठा रही है। आम आदमी पार्टी से अलग हुए कुछ सोशल एक्टिविस्ट, कुछ सेवानिवृत्त आला अधिकारी और दो पूर्व विधायकों सहित राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय रहे लोगों ने विचार मध्यप्रदेश के बैनर तले शिवराज सरकार की घेराबंदी प्रारंभ कर दी है। यदि यह काम केवल राजनीतिक दल करते तो सरकार आसानी से इन आरोपों को नकार सकती थी लेकिन भाजपा के ही नेता और पूर्व मंत्री कमल पटेल ने जिस आक्रामक ढंग से हरदा जिले में अवैध उत्खनन का मामला उठाया तथा विचार मध्यप्रदेश के बैनर तले सोशल आडिट की जो कमेटी गठित हुई है और जिसमें भाजपा मेें सक्रिय रहे नेता शामिल हैं, वह भी अवैध उत्खनन का मुद्दा उठा सकती है क्योंकि वह जो प्रश्न पूछ रही है उसमें यह मुद्दा भी शामिल है।
नदियों में बढ़ते अवैध खनन और परिवहन की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए अब राज्य सरकार ने भी इसकी रोकथाम के लिए कड़ा कदम उठाने का मन बना लिया है। अधिकारियों को अवैध खनन व परिवहन में लगी मशीनों व वाहनों को राजसात करने के अधिकार देने संबंधी अधिसूचना जारी कर दी गयी है। मुख्यमंत्री ने नर्मदा में अवैध खनन और परिवहन रोकने के लिए कड़ा फैसला लिया है। होशंगाबाद, हरदा, देवास और सीहोर के लिए खनिज विभाग की चार विशेष टीमें गठित की कई गई हैं। शिवराज ने सख्त निर्देशों के साथ अधिकारियों को फ्रीहैंड दे दिया है। अवैध उत्खनन आने वाले समय में बड़ा मुद्दा बन पायेगा या नहीं? यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन कितनी प्रभावी कार्रवाई करता है। इस कारोबार में लगे चेहरों को देखकर उसके हाथ यदि कांपने लगे और वह रस्म अदायगी करने लगा तो फिर यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।
विचार मध्यप्रदेश ने तीन सदस्यीय नर्मदा सेवा यात्रा के सोशल आडिट के लिए जो कमेटी गठित की है उसकी अगुवाई गिरिजा शंकर शर्मा कर रहे हैं और उसके अन्य सदस्यों में नरसिंहपुर के पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष महंत पीतमपुरी और डॉ संजीव चांदुलकर शामिल हैं। गिरिजा शंकर शर्मा भाजपा के विधायक रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर पीतमपुरी भी भाजपा प्रत्याशी के रुप में नगरपालिका अध्यक्ष चुने गये थे। डॉ. चांदुलकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयंसेवक रहे हैं और भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ में भी प्रमुख पदाधिकारी रह चुके हैं। सोशल आडिट कमेटी अमरकंटक, डिंडोरी होते हुए जबलपुर पहुंच चुकी है। वह 5 जून को अपनी आडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करेगी। आडिट कमेटी के तीनों ही सदस्य होशंगाबाद और नरसिंहपुर जिले के हैं और यहां से नर्मदा नदी प्रवाहित होती है। विचार मध्यप्रदेश ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि नर्मदा यात्रा समाप्त होते ही वह इस यात्रा का सोशल आडिट करेगा और इसका सच जनता के सामने रखेगा। सोशल आडिट खासकर इस मुद्दे पर होगा कि सेवा यात्रा निकलने के पूर्व क्या स्थिति थी और बाद में उसमें क्या बदलाव आया। विचार मध्यप्रदेश का कहना है कि शिवराज सरकार ने मॉ नर्मदा के संरक्षण के नाम पर विश्व का सबसे बड़ा नदी संरक्षण अभियान चलाने का जोरशोर से दावा किया है। इस यात्रा को लेकर प्रारंभ से यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह यात्रा वाकई सेवाभाव से की जा रही है ताकि मॉ नर्मदा को संरक्षित किया जा सके या केवल दिखावे की राजनीति के लिए है। क्या इसमें सेवाभाव है या मेवा पाने की लालसा है। विचार मध्यप्रदेश के अक्षय हुंका का कहना है कि नर्मदा यात्रा तीन माह पूर्व डिंडौरी से गुजरी थी और अब तीन माह बाद कमेटी ने पाया है कि हालात में कोई बदलाव नहीं आया है, गंदगी जस की तस है और गंदे पानी के नाले पूर्व की भांति नर्मदा में मिल रहे हैं। अमरकंटक में मॉ नर्मदा का आशीर्वाद लेकर कमेटी की यह यात्रा प्रारंभ हुई है और 19 मई से 2 जून तक सामाजिक, राजनीतिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सोशल आडिट कर रही है।
सोशल आडिट कमेटी जो 10 प्रश्नों का प्रोफार्मा नर्मदा किनारे के लोगों से भरवा रही है उसमें स्थानीय कार्यक्रम में कितना पैसा खर्च हुआ तथा आयोजक कौन था, घाट किनारे शौचालय व कपड़े बदलने की व्यवस्था कब तक प्रारंभ होगी, क्या पंच परमेश्वर योजना से कलश रखने वाले लोगों को पैसे दिए गए या नहीं? फिल्म कलाकारों को कार्यक्रम में बुलाना क्या उचित था, क्या अभी भी रेत का खनन हो रहा है, क्या नदी में शहर का गंदा पानी, औद्योगिक गंदगी और नाले मिलना बंद हो गए हैं। आपके क्षेत्र में कितने पेड़ लगने वाले हैं और उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, नर्मदा सेवा यात्रा वाकई में सेवा के लिए की गयी या केवल राजनीति के लिए और क्या नर्मदा सेवा यात्रा से वाकई मॉ नर्मदा के संरक्षण में मदद मिलेगी। जो प्रोफार्मा तैयार किया गया है उसका मकसद यही प्रतीत होता है कि जनमानस में यह बात उजागर की जाए कि नर्मदा सेवा यात्रा अपने उद्देश्य में कितनी सफल रही और इसका मंतव्य केवल सेवाभाव था या विशुद्ध राजनीति?


स्मार्टफोन वितरण में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए विचार मध्यप्रदेश के अक्षय हुंका ने कहा है कि मई 2016 में मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रानिक डेवलपमेंट कारपोरेशन ने 3.75 लाख फोन के लिए टेंडर निकाला था और यह टेंडर फोरस्टार अमोस्टा 3जी5 मॉडल के फोन के लिए कार्वी डाटा मैनेजमेंट सर्विस लिमिटेड को मिला था। आरोप है कि कंपनी का 2014-15 और 2015-16 का टर्नओवर शून्य था और इस कंपनी ने कामर्शियल आपरेशन इस आदेश के मिलने के बाद अक्टूबर 2016 में आरंभ किया था। टेंडर स्वीकृति की प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े किए गए हैं जिसमें प्रमुख है कि कंपनी को स्मार्टफोन बनाने का कोई अनुभव नहीं था। हर स्तर पर जानबूझकर चीजों को नजरअंदाज कर घोटाले को अंजाम दिया गया और यह सब बड़े नेताओं, आला अफसरों के मिलीभगत के बिना संभव नहीं था। यह भी आरोप लगाया गया है कि जो स्मार्टफोन बांटे गए उनमें आपरेटिंग सिस्टम के नये वर्जन और एप्स ठीक से नहीं चल सकते हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि नर्मदा यात्रा के सोशल आडिट और स्मार्टफोन के कथित घोटाले को लेकर आने वाले समय में राज्य सरकार की घेराबंदी करने की कोशिश की जाएगी।
०- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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