सरकार के नौकरशाहों को नहीं पता है राजेन्द्र मिगलानी और संजय श्रीवास्तव कौन है

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मध्यप्रदेश में सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से दिए गए जवाब में सभी को चौंका दिया है। मामला मुख्यमंत्री कमलनाथ से जुड़ा है। हाल ही में मुख्यमंत्री के सलाहकार और ओएसडी की नियुक्ति को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे की ओर से एक आरटीआई लगाई गई जिसमें मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेन्द्र मिगलानी और ओएसडी संजय श्रीवास्तव तथा मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ अन्य अशासकीय लोगों की योग्यता और नियुक्ति के रिकार्ड की मांग की गई थी। लेकिन जो जवाब सरकार की ओर से दिया गया वह हैरान कर देने वाला है। जवाब में कहा गया है कि उक्त जानकारी ढूंढने में दिक्कत है सरकार को सम्बन्धित व्यक्तियों के बारे में जानकारी नहीं है। अत: फाइल पर नम्बर और अन्य विवरण उपलब्ध कराएं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि अपने आरटीआई में संबंधित व्यक्ति या फिर फाइल का नम्बर, तारीख नहीं बताई है जिसके बारे में आपकी जानकारी चाहिए। इसलिए आपके द्वारा चाही गई जानकारी देने में समस्या आ रही है। उल्लेखनीय है कि राजेंद्र मिगलानी मुख्यमंत्री कमलनाथ के एडवाइजर निुयकत किए गए हैं। वहीं संजय कुमार श्रीवास्तव को विशेष कर्तव्य अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह नियुक्तियां संविदा पर की गई हैं। दोनों ही नाम मुख्यमंत्री कमलनाथ के विश्वासपात्र माने जाते हैं। सरकार के कुछ नौकरशाह इन नियुक्तियों से खफा बताए जा रहे हैं। उनका मानना है कि इन नियुक्तियों के बाद सरकारी कामकाज में व्यवधान बढ़ा है। उनका दावा है कि प्रदेश में हुए ताबड़-तोड़ तबादलों के कारण भी शासन प्रभावित हुआ है। दिसम्बर में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद कनिष्ठों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सरकारी अधिकारियों के कई-कई बार तबादले हुए हैं, जिनमें राज्य में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी शामिल हैं। इन सब तबादलों को लेकर सोशल एक्टिविस्ट अजय दुबे ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। दुबे का आरोप है कि दिसम्बर में नई सरकार के सत्ता में आने के बाद राज्य में जूनियर से लेकर शीर्ष स्तर तक सभी श्रेणियों में नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के भारी संख्या में तबादले हुए हैं। इन तबादलों में भ्रष्टाचार भी हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ नौकरशाह अपना न्यूनतम कार्यकाल पूरा करने के बाद भी स्थानान्तरित हो रहे हैं। इसी तरह कमलनाथ सरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के तबादले के लिए बने सिविल सर्विस बोर्ड की बैठक का कार्यवाही विवरण देने से बचने के लिजए गोपनीयता का सहारा ले रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने यह जानकारी देने से मना कर दिया है। विभाग ने इसे गोपनीय जानकारी होने के कारण देने से मना कर दिया है। प्रत्येक राज्य में नियमानुसार नौकरशाहों के स्थानान्तरण और पोस्टिंग पर निर्णय लेने के लिए एक सिविल सेवा बोर्ड होना चाहिए। मुख्य रूप से भारतीय प्रशासनिक सेवाएं, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेव के अधिकारियों के लिए दुबे का कहना है कि राज्य सरकार सिविल सेवा बोर्ड की बैठक के दौरान लिए गए फैसलों का ब्यौरा संबंधित वेबसाइट पर नहीं डाल रही है। यह केन्द्र सरकार द्वारा तय किए गए नियमों का उल्लंघन है।

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