सबका साथ, सबके विकास के नारे पर भाजपा के शासन में हुआ जमकर घोटाले

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जबसे केन्द्र की सत्ता पर काबिज हुए हैं तबसे लेकर आज तक उन्होंने शायद ही ऐसा कोई अवसर छोड़ा हो जब अपने भाषणों में उन्होंने भ्रष्टाचार को लेकर कांग्रेस पर निशाना ना साधा हो तो अभी हाल ही में दिल्ली में सम्पन्न हुए राष्ट्रीय महा अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस राज का दूसरा नाम है घोटाला राज लेकिन शायद वह यह भूल जाते हैं कि उनके शासनकाल में राफेल को लेकर जो घोटाला हुआ है और इसी घोटाले को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कांग्रेस के नेता और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर उनपर कई गंभीर आरोप लगा रहे हैं तो वहीं सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एके पटनायक ने कहा कि आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के कोई साक्ष्य नहीं हैं जस्टिस पटनायक ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाले पैनल द्वारा आलोक वर्मा को हटाना बेहद उतावलेपन में लिया गया निर्णय था। इससे यह साफ जाहिर होता है कि मोदी सरकार में हुए राफेल घोटाले को मोदी और भाजपा के मंत्री और नेता दबाने के मामले में देश को गुमराह करने में लगे हुए हैं। भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा और मोदी सरकार हो या मध्यप्रदेश की सरकार की कथनी और करनी में काफी अंतर दिखाई देता है और यह साबित करता है कि भाजपा का सबका साथ सबका विकास के नारे के चलते जमकर भ्रष्टाचार हुआ है जिसका उदाहरण मध्यप्रदेश की १३ वर्षों की पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की सरकार है जिनके कार्यकाल में जमकर भ्रष्टाचार उस समय हुआ जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यह ढिंढोरा पीटते रहते हैं कि ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा, उनके इस जुमले से सवाल यह उठता है कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के हटते ही कैग की जिस रिपोर्ट में उनके शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार के एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं क्या मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जिन्होंने भाजपा के अधिवेशन के दौरान यह दावा किया कि मोदी की सरकार बेदाग है। क्या इन कैग की रिपोर्टों के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार को भी वह बेदाग का प्रमाण पत्र देेंगे। नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में राफेल तो वहीं इन दिनों सोशल मीडिया पर चल रही यह खबर भी सुर्खियों में हैं कि मोदी सरकार ने जो गुजरात में सरदार पटेल की प्रतिमा स्थापित की उसमें चीन और भारत के कारोबारियों ने जमकर कमीशनखोरी की तो वहीं शिवराज के शासनकाल में उनके ही स्वर्णिम मध्यप्रदेश के जुमले के चलते जो सबका साथ, सबका विकास के नाम पर चलाई गई योजनाओं में शायद ही ऐसी कोई योजना होगी जिसमें घोटाला ना हुआ हो लेकिन इस सबके बावजूद भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र कांग्रेस का राज घोटाले का दूसरा नाम जैसे जुमलों से देश को गुमराह करने में लगे हुए हैं। इससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि भाजपा के नेताओं चाहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हों या पार्टीे के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह हों या फिर १४ वर्षों तक मध्यप्रदेश की जनता को दरिद्र नारायण की सेवा करने के लिये राजनीति में आने का जुमला सुनाने वाले शिवराज सिंह के कार्यकाल में जहां उनके परिजनों से लेकर अधिकारियों और भाजपा के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने हर तरह के अवैध कारोबार से तो अपनी सम्पत्ति में इजाफा किया ही है तो वहीं १३ वर्षों के अपने शासनकाल में मैं डंडा लेकर आया हूँ किसी को नहीं बख्शूंगा का जुमला सुनाने वाले शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार की परतों का जिस तरह से कैग की रिपोर्ट में एक के बाद एक खुलासा हो रहा है उससे तो यह साफ जाहिर होता है कि दरिद्र नारायण की सेवा करने की राजनीति करने का ढिंढोरा पीटने के नाम पर शिवराज सिंह और उनके परिजनों के साथ-साथ भाजपा के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और उनके चहेते अधिकारियों ने शिवराज के स्वर्णिम मध्यप्रदेश के ढिंढोरे के नाम पर जमकर भ्रष्टाचार किया और अपने शासनकाल में भ्रष्टाचार को मूल मंत्र मानकर शासन करने की शुरुआत उनके सत्ता पर काबिज होते ही उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह ने अपनी पहचान छुपाकर खरीदे गये डम्परों से दी थी, जिसे राज्य के भाजपा नेताओं, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने शिवराज सरकार का मूल मंत्र मानकर जो जमकर भ्रष्टाचार किया उससे विकास प्रदेश का नहीं बल्कि उन भाजपाई नेताओं का हुआ जिनकी हैसियत शिवराज सरकार आने के पूर्व टूटी साइकिल तक की नहीं थी आज वह आलीशान भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे भरते हुए सड़कों पर चलने वाली जनता पर धुंआ उड़ाते नजर आ रहे हैं, यदि मध्यप्रदेश की कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार प्रदेश के भाजपाई नेताओं, जनप्रतिनिधियों की निष्पक्ष एजेंसी से ठीक से जांच करवा ले तो शिवराज सिंह के ही नहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपाई नेताओं का सबके साथ सबके विकास के नारे की असलियत जनता के सामने आ जाएगी कि विकास के इस जुमले के नाम पर देश या प्रदेश की जनता का विकास हुआ या भाजपाई नेताओं का, हाल ही में विधानसभा में रखी गई कैग की रिपोर्ट का एक-एक पृष्ठ शिवराज सरकार के विकास की पोल खोलता नजर आ रहा है क्या यही भाजपा के नेता मोदी, शाह और शिवराज का सबके साथ, सबका विकास का सही मकसद है। जिसके नाम पर हर भाजपा का नेता भ्रष्टाचार का खुला खेल खेलने में लगा हुआ है। शिवराज सरकार के १३ वर्षों के कार्यकाल में पूरे भ्रष्टाचार के कैग की रिपोर्ट में हो रहे खुलासे को लेकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि रिपोर्ट ने साबित कर दिया कि पिछली सरकार ने किस तरह का गठजोड़कर काम किया जा रहा था। तो वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि सरकार को तत्काल वित्त मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रीमण्डल समिति बनाकर दोषी लोगों पर कार्यवाही करना चाहिये। जैसा मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूर्व भाजपा की सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मामलों में जो कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है यदि उसकी जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाई तो यह साफ हो जाएगा कि सबका साथ, सबका विकास के नाम पर भाजपा की सरकार में क्या-क्या खेल खेले गये। हालांकि कैग की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि रिपोर्ट ने साबित कर दिया है कि पिछली सरकार में किस तरह का गठजोड़ काम कर रहा था। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जिस तरह से पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के कार्यकाल को वित्तीय अनियमितताएं व वित्तीय प्रबंधन की कमजोरियां उजागर हुई हैं, करोड़ों रुपए के नुकसान की बात सामने आई है। उससे यह स्पष्ट हो रहा है कि पिछली सरकार में किस प्रकार का गठजोड़ काम कर रहा था। भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा था। सारे मामलों की जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शुरू से कह रही है कि पिछली सरकार में बड़ा भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है। सरकार मामलों की जांच कराएगी। एक आयोग बनेगा, जिसे सारे मामले सौंपे जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं कैग की रिपोर्ट में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ५७ उपक्रमों के जरिए जहां सरकार को तीन हजार ६७२ करोड़ का चूना लगाया गया है, वहीं २५ सार्वजनिक उपक्रमों ने १८७ करोड़ के लाभ पर ३७.४९ करोड़ का लाभांश घोषित नहीं किया, जबकि १२० करोड़ की सहायता अकार्यशील उपक्रमों पर कर दी गई और छग बंटवारे के बाद भी ३६.९८ करोड़ की राशि वसूली नहीं गई और विभिन्न मामलों में ४५ करोड़ रुपए अतिरिक्त व्यय कर दिया गया। कैग की रिपेार्ट में कर, राज्य उत्पाद शुल्क, वाहन कर, भू-राजस्व, स्टाम्प तथा पंजयीन फ ीस ओर खनन प्राप्तियों सहित जलकर आदि का छ: हजार २७० करोड़ की राशि वसूली नहीं गई। इस गड़बड़ी में टैक्स का कम निर्धारण, कम आरोपण और राजस्व हानि के कारण सरकार को १४ हजार ९७४ प्रकरणों में इतना चूना लगा है। कैग ने यह भी कहा है कि विभागों के पास लंबित बकाया राजस्व का कोई विश्वसनीय डाटाबेस या बकाया संग्रहण की निगरानी करने के लिए कोई तंत्र नहीं है, जिसके कारण यह नुकसान हुआ है। कैग की रिपेार्ट में मप्र में ४० हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के नुकसान का मामला सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कैग की रिपोर्ट से जुड़ी खबरों को ट्वीट किया है। इन्हीं खबरों के साथ उन्होंने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार को तत्काल वित्त मंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमण्डल समिति बना कर दोषी लोगों पर कार्यवाही करना चाहिए। कैग की रिपोर्ट में कई वित्तीय खामियंा सामने आई हैं। कैग ने बताया है कि १२ संस्थानों ने राज्य सरकार को २० हजार ५९६ करोड़ रुपए गारंटी शुल्क के रूप में नहीं चुकाए हैं। कैग ने राज्य सरकार से कहा है कि सरकार की गारंटी का लाभ लेने वाली ये संस्थाएं जब तक पूरा शुल्क नहीं चुकाती, तब तक सरकार इन्हें गारंटी देना बंद कर दे। इसके साथ ही मप्र विद्युत पारेषण कंपनी और मप्र पुलिस आवास निगम को दी गई गारंटी शुल्क की जांच की जाए, इन्होंने जरूरत से ज्यादा गारंटी शुल्क चुका दिया। कैग ने कहा कि जल संसाधन विभाग में जल कर को लेकर १६२७ करोड़ रुपए की अनियमितताएं हुई है। विभाग यह कर वसूल नहीं सका। इसमें उद्योगों, स्थानीय निकायों और किसानों से लगीाग १४८९ करोड़ रुपए वसूले जाने थे। रेत खनन से सरकार को २०१६-१७ में ३१६८ करोड़ रुपए की कमाई होनी थी, लेकिन सिर्फ २६१० करोड़ रुपए का राजस्व ही मिला। इससे सरकार को ६०५ करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। रेत के अवैध परिवहन को रोकने पर्याप्त चौकियां नहीं थी। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि वाणिज्यिक कर विभाग ने १०३० करोड़ रुपए के कर का कम निर्धारण किया है। इससे सरकार सरकार के खजाने पर असर पड़ा है। पेंच परियोजना में ३७६ करोड़ की अनियमितता की गई। इसके अलावा वाटर टैक्स में ६२७० करोड़ का नुकसान, सार्वजनिक उपक्रमों में १२२४ करोड़ का नुकसान, छात्रावास संचालन में १४७ करोड़ की अनियमितता हुई है।

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