संजय के खिलाफ भाजपा के उम्मीदवार योगेन्द्र निर्मल के पक्ष में शिवराज करेंगे प्रचार

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश में हुए नगरीय निकाय चुनाव के समय बालाघाट जिले में अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को विजयश्री दिलाने के लिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़ी कड़ी मेहनत की थी और वहां रात रुके थे फिर भी भाजपा को वहां से उतनी सफलता नहीं मिल पाई थी। अब सवाल यह उठता है कि जो शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह मसानी ने अपनी बहन के साथ मिलकर अपने जीजा शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज करने के लिये जिस तरह की रणनीति और शह मात की राजनीतिक बिसात बिछाई थी और उसी बिसात के चलते उन्होंने जब तक अपनी मुहिम बन्द नहीं की थी तब तक उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने जीजा शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज नहीं कर दिया था। वही उनके साले आज जब अपनी राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते उस समय जब शिवराज सिंह चौहान और भाजपा को चौथी बार सत्ता में काबिज होने के लिये एक-एक सीट के लिये कड़ी मेहनत मशक्कत करनी पड़ रही है, उस समय उनके साले संजय सिंह द्वारा जीजा और भाजपा का साथ छोड़ कांग्रेस का दामन थाम कमलनाथ और कांग्रेस की तारीफ में जिस तरह के कसीदे पढ़े गये उन कसीदों को प्रदेश के भाजपा के नेताओं के साथ-साथ प्रदेश के राजनीतिक पंडित मायने तलाशने में लगे हुए हैं और उनका कहना है कि जिस तरह से शिवराज के साले संजय सिंह ने अपनी बहन शिवराज की धर्मपत्नी साधना सिंह के साथ मिलकर तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और उमा भारती के खिलाफ उपजे असंतोष को हवा देकर प्रदेश में इनके खिलाफ इस तरह का माहौल बनाया था कि उस उपजे आक्रोश के कारण एक राजनैतिक नौटंकी के चलते बाबूलाल गौर को तो पद छोडऩा ही पड़ा तो वहीं उन उमा भारती जिन्होंने कड़ी मेहनत मशक्कत कर २००३ में भाजपा को भारी भरकम बहुमत से सत्ता पर काबिज कराया था उन उमा भारती को भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं ने संजय सिंह और उनकी बहन साधना सिंह की रणनीति का हिस्सा बन उमा भारती को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया था अब जब शिवराज के साले संजय सिंह के कांग्रेस में शामिल होते ही जिस तरह का बयान उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यालय में कमलनाथ को लेकर दिया और कहा कि अब प्रदेश को कमल की नहीं बल्कि नाथ की जरूरत है। क्या अपने इस बयान को अमलीजामा पहनाने के लिये संजय सिंह उसी तरह की रणनीति अपनाकर कमलनाथ या उनकी किस पार्टी के नेता को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज करके दम लेंगे, यह उल्लेखनीय है कि हालांकि संजय सिंह की इस रणनीति में उनकी बहन शिवराज की धर्मपत्नी साधना सिंह शामिल नहीं हैं, लेकिन संजय सिंह की अपने जीजा को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज करने के लिये खेली गई रणनीति के कायल भाजपा के नेता ही नहीं बल्कि प्रदेश के कई राजनीतिज्ञ कायल हैं और अब सभी इस लाख टके का सवाल का हल खोजने में लगे हुए हैं कि संजय सिंह द्वारा कांग्रेस के प्रवेश के दौरान दिये गये अपने उस बयान कि प्रदेश को कमल की नहीं बल्कि नाथ की जरूरत है को कैसे मूर्त रूप दे पाएंगे ? तो वहीं दूसरी ओर लाख टके के सवाल को खोजने में भाजपा के एक गुट के नेताओं सहित राजनैतिक पंडित खोजने में लगे हुए हैं कि जिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह ने ऐसे समय में जबकि भाजपा के राष्ट्रीय नेता दूसरी बार नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज करने के लिये इन तीनों प्रदेशों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी के लिये हर तरह के हथकंडे अपनाने में लगे हुए हैं ऐसे में क्या शिवराज सिंह चौहान अपने साले संजय सिंह मंसानी जो कि कांग्रेस की तरफ से बालाघाट की वारासिवनी विधानसभा क्षेत्र से चुनावी समर में उतरे हुए हैं और उनके खिलाफ भाजपा की ओर से पार्टी के प्रत्याशी योगेन्द्र निर्मल के पक्ष में उतरकर संजय सिंह के खिलाफ उसी तरह समय देकर प्रचार करेंगे जिस तरह से उन्होंने नगरीय निकाय के चुनाव के समय बालाघाट को प्रदेश के अन्य निकायों के चुनाव की तुलना में अधिक समय दिया था। यह अलग बात है कि उस समय भाजपा को वहां से उतनी सफलता नहीं मिल पाई थी। लेकिन इस चुनाव में क्या शिवराज सिंह चौहान योगेन्द्र निर्मल को विजयश्री दिलाकर अपने साले संजय सिंह को पराजय का स्वाद चखा पाएंगे कि नहीं इसके साथ ही संजय को लेकर इस तरह की चर्चाओं का दौर जारी है कि जिन संजय सिंह ने अपनी बहन के साथ जीजा शिवराज सिंह को एक सोची समझी रणनीति के चलते मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाकर ही दम लिया था अब वह भाजपा और जीजा से नाराज होकर उस कांग्रेस में आये हैं जिसके नेताओं ने इन्हीं संजय सिंह पर कई गंभीर आरोप लगाकर विधानसभा की कई बैठकों को हंगामों की भेंट तक चढ़वा दी थी, वह संजय सिंह अब कांग्रेस के किस नेता को मुख्यमंत्री के पद पर बैठाकर उन प्रदेश के कामगारों की उपेक्षा का बदला अपने जीजा या भाजपा को सत्ता से बेदखल कर जीजा की तरह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाकर बदला लेंगे?

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