संघ के सर्वे के अनुसार टिकट वितरण न होने से साफ है कि बिके हैं टिकट

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। भारतीय जनता पार्टी भले ही अपनी चौथी पारी की सत्ता में आने की तैयारी के लिये तमाम जोड़तोड़ में लगी हुई है लेकिन वहीं दूसरी ओर वह सब खेल भाजपा में इन दिनों बड़े ही रोचक ढंग से अपनाये जा रहे हैं जिनको लेकर वह अक्सर कांग्रेस को घेरा करती थी २००८ में जब विधानसभा चुनाव हुए थे तो उस समय प्रदेश कांग्रेस की कमान पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुरेश पचौरी के हाथों में थी और कांग्रेस के पक्ष में प्रदेश में माहौल था लेकिन सुरेश पचौरी की कारगुजारी के चलते उस समय टिकटों का वितरण में बेचने का दौर तो चला ही वहीं टिकट वितरण में मनमानी होने का आरोप उस समय सुरेश पचौरी पर लगा था ऐसी ही परिस्थितियां इन दिनों भारतीय जनता पार्टी की हैं, उसके नेताओं की वर्तमान चुनावी रणनीति से तो यही नजर आ रहा है कि प्रदेश भाजपा के नेता चौथी बार सत्ता में काबिज होने के लिये जिस प्रकार से नित्य रोज नई-नई नौटंकियां करने में लगे हुए हैं उससे लगता है कि वह चौथी बार सत्ता में काबिज होना नहीं चाहते क्योंकि उन्हें पता है कि प्रदेश की आर्थिक हालत क्या है और सत्ता में काबिज होते ही आर्थिक स्थितियों से जूझने से लेकर तमाम परिस्थितियों से उसे दोचार होना पड़ेगा ऐसे में प्रदेश की जनता में असंतोष का माहौल पैदा होगा और उस माहौल से निपटने में सरकार में बैठे लोगों को पसीना आएगा लेकिन केन्द्रीय नेता जिनका असल मकसद प्रदेश की सत्ता पर काबिज होना नहीं बल्कि इसके बहाने २०१९ में होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियां मुख्य उद्देश्य हैं तभी तो अमित शाह से लेकर पूरा लाव-लश्कर झूठ को सच में तब्दील करने वाले प्रवक्ताओं की टीम भी इन दिनों मध्यप्रदेश में चौथी बार सत्ता पर काबिज होने के लिये नित्य नई-नई रणनीति अपनाकर प्रदेश के मतदाताओं को २०१४ में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव के पूर्व जिस तरह का माहौल नरेन्द्र मोदी से लेकर अमित शाह की टीम ने देश की जनता को झूठे वायदों की बौछारें इसलिये करने में लगे हुए थे क्योंकि उन्हें पता था कि भाजपा की सरकार बनने वाली नहीं है तो देश को सुनहरे सपनों का मायाजाल क्यों न फेंका जाए लेकिन उन दिनों भाजपा के द्वारा फेंके गये शब्दों और वायदों के मायाजाल में देश की जनता इस तरह से फंसी कि उसे अच्छे दिन की कल्पना करने से ही सिहर उठती है। ठीक उसी तरह के शब्दों और वायदों के मायाजाल प्रदेश की जनता को फंसाने में भाजपा के राष्ट्रीय नेता प्रदेश के नेताओं से कुछ ज्यादा ही सक्रिय दिखाई दे रहे हैं क्योंकि उन्हें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और राजस्थान के मुख्यंत्री वसुंधरा राजे की चिंता नहीं यदि उन्हें चिंता है तो वह सिर्फ और सिर्फ नरेन्द्र मोदी को देश पर दोबारा देश का प्रधानमंत्री के कुर्सी दिलाने की, शायद यही वजह हो सकती है कि प्रदेश में चौथी बार सत्ता पर काबिज होने के लिये चुनाव पूर्व हुए तमाम सर्वे जिसमें संघ के सर्वे भी शामिल थे उनमें यह साफ निलकलर आया था कि प्रदेश में शिवराज नहीं बल्कि भाजपा के मंत्रियों, विधायकों और नेताओं के खिलाफ जनता में आक्रोश व्याप्त है तभी तो किसी सर्वे में चालीस प्रतिशत तो किसी में सत्तर विधायकों को बदलने की बात कही गई थी तो संघ के सर्वे में वर्तमान विधायकों में से ९० विधायकों को चुनावी समर में न उतारने की बात सामने आई थी, लेकिन पार्टी व संघ द्वारा कराये गये तमाम सर्वे को रद्दी की टोकरी में फेंककर टिकट वितरण की नीलामी की गई और जिसने ज्यादा रुपये की बोली लगाई उसे टिकट से नवाजा गया, यही वजह है कि आज भाजपा नेताओं और रणनीतिकारों को चारों तरफ असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। यदि यही स्थिति रही तो भाजपा को चौथी बार सत्ता मेें आना टेढ़ी खीर नजर आ रही है।

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