शोरगुल थमा धड़कन बढ़ी

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०- देवदत्त दुबे
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। जिन आठ लोकसभा सीटों पर १२ मई को मतदान होना है यहां पर शुक्रवार शाम ६.०० बजे शोरगुल थम गया लेकिन प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की धड़कन बढ़ गई है। दरअसल चुना में जब दोनों ही दल बराबरी से चुनाव लड़ें तब मतदाता के दिन तक हार जीत के समीकरण बनते बिगड़ते हैं ऐसी स्थिति इस समय प्रदेश में है जहां भाजपा और कांग्रेस पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ रहे हैं भाजपा को जहां १५ बरसों के बाद पाँच महीने पहले ही प्रदेश में सत्ता हाथ से छीनी है वहीं केंद्र में भाजपा की अभी सरकार है ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं के मनोबल भी बड़े हुए हैं साथ ही संसाधनों में भी कोई कमी नहीं रही है दूसरी ओर १५ वर्षों के बाद प्रदेश में सत्ता में वापसी करने के बाद कांग्रेस के कार्यकर्ता उत्साहित हैं और उनका आत्मविश्वास विधानसभा चुनाव जीतने के बाद लोकसभा चुनाव जीतने के लिए बड़ा है यही कारण है कि दोनों ही दल पूरी ताकत से चुनाव लड़ रहे हैं प्रचार अभियान में कोई कमी नहीं छोड़ी गई है दोनों ही दलों की चिंता मतदान के दिन अपने अपने वोटर को मतदान केंद्र तक पहुंचाने की है। बहरहाल १२ मई को भोपाल विदिशा सागर राजगढ़ गुना भिण्ड मुरैना और ग्वालियर लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होना है जिसके लिए शुक्रवार शाम को चुनाव प्रचार थम गया है लेकिन प्रत्याशियों ओर उनके समर्थकों की धड़कनें बढ़ गई हैं कि आखिर मतदाता कौन से मुद्दे को लेकरवोट डालने जाएगा लगभग एक महीने तक चले प्रचार अभियान में किसी भी मुद्दे को जनता तक पहुंचाने के लिए किसी भी दल में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी इन सीटों में भोपाल लोकसभा सीट का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हो गया है जिस पर प्रदेश ही नहीं पूरे देश की निगाहें लगी हैं यहां प्रचार करने भी देश के कोने-कोने से दोनों दलों के समर्थक आए सार्वजनिक स्थानों के साथ साथ होटलों और मेहमानों के यहां ठहरे इन समर्थकों को लोकसभा क्षेत्र से बाहर करने की चुनौती भी चुनाव आयोग के पास है चप्पे-चप्पे पर किसी न किसी दल का समर्थक देखा जा रहा है जोकि अपने प्रत्याशी के लिए वोट मांग रहा है अंतिम ४८ घंटे दोनों ही दलों के लिए महत्वपूण्र हो गए क्योंकि जो मतदाता अब तक दुविधा में थे उनका मन पार्टी की तरफ बनाना ही पार्टी की जीत तय करेगा चाय चौपालों से लेकर मंत्रालय तक में भोपाल सीट की चर्चा चल रही है जबकि प्रदेश की अन्य सीटों पर भी मुकाबला कांटे का माना जा रहा है। भाजपा की ओर से जहां संगठन के बड़े नेता प्रदेश में डेरा डाले हुए हैं वहीं कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कमलनाथ पूरी बागडोर संभाले हुए हैं वे जहां भी गए वहां के स्थानीय कांग्रेसी नेताओं को सख्त हिदायत चुनाव जीतने की देकर आए हैं। उनका साफ कहना था कि यदि चुनाव नहीं जीते तो फिर भोपाल किसी काम के लिए मत आता उन्होंने विधायकों और मंत्रयों को भी जीत का स्पष्ट लक्ष्य दिया है इसका असर भी हुआ है जो कांग्रेसी अब तक औपचारिकता के लिए चुनाव अभियान में भाग लेते थे वे अब दिन रात मेहनत कर रहे हैं शायद इसी का नतीजा है कि लंबे अरसे के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है भाजपा को जहां मदद मोदी फैक्टर की मिल रही है वहं कांग्रेस को बेहतर प्रत्याशी चयन की इसी के चलते अब तक भाजपा जिन सीटों को दो लाख से ऊपर वोटों से जीत रही है वहां भी अब हार जीत के अनुमान लगाना आसान नहीं रहा मतदताओं से जिस तरह का फीडबैक मिल रहा है उसी के चलते चुनाव प्रचार अभियान थमने के बाद अब धड़कन बड़ी हुई है।
०-नया इंडिया के कालम ”राजनैतिक गलियारा” से साभार)
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