शिवराज सरकार में बुंदेलखण्ड पैकेज में भी हुआ जमकर घोटाला

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान ना खाऊंगा और ना खाने दूंगा का जुमले से इस देश की जनता को झांसे के फेर में गुमराह करने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से लेकर मध्यप्रदेश को अपने सपनों का स्वर्णिम मध्यप्रदेश बनाने और राजनीति में दरिद्र नारायण की सेवा का व्रत लेकर राजनीति करने का ढिंढोरा पीटने वाले शिवराज सिंह चौहान ने उत्तरप्रदेश के बुंदेलखण्ड के अंतर्गत आने वाले जिलों में जमकर तत्कालीन समाजवादी पार्टी पर बुंदेलखण्ड पैकेज के नाम पर घोटाले होने के जमकर आरोप लगाकर समाजवादी पार्टी को बदनाम करने का खूब ढिंढोरा पीटा लेकिन बुंदेलखण्ड पैकेज के नाम पर समाजवादी पार्टी पर घोटाला करने का आरोप लगाने वाले भाजपा के यह नेता यह भूल गये थे कि उनकी ही पार्टी की शासित सरकार मध्यप्रदेश में भी यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान दिये गये ३८६० करोड़ रुपए के विशेष बुंदेलखण्ड पैकेज में हुए घोटाले के लिये जिम्मेदार वह शिवराज सिंह हैं जो मोदी और शाह के साथ उत्तरप्रदेश की तत्कालीन समाजवादी पार्टी को बुन्देलखण्ड पैकेज के नाम पर घोटाला होने का आरोप लगाने में लगे हुए थे लेकिन भाजपा की यह परम्परा है कि वह झूठ बोलती है और जोर से बोलती है और उसे इतना प्रचारित करती है कि अपने उस झूठ से जनता को गुमराह करने में सफलता हासिल कर लेती है यही वह भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का मूल मंत्र है जिसके झांसे में आकर लोग भाजपा के नेताओं को बड़ा ईमानदार और देशभक्त मानती है लेकिन वह देशभक्त कितने हैं इसका उदाहरण तो हाल ही में कटनी में घटित हवाला कांड से पाकिस्तान के जुड़े होने की जो खबर आई है उस हवाला कांड के आरोपी के भाजपा नेताओं से क्या संबंध हैं यह सभी जानते हैं तो वहीं शिवराज सरकार में भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं का खुलासा हुआ था जो पाकिस्तान को देश की सेना से जुडी़ जानकारियां भेजने के आरोप में पकड़े गये थे लेकिन बात यदि भ्रष्टाचार के मुद्दे की करें तो भाजपा के नेता चाहे मोदी हों या शिवराज सभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े-बड़े दावे करते नजर आते हैं लेकिन उनके शासनकाल में भी जमकर भ्रष्टाचार के खुलासे होते हैं, इससे यह साबित होता है कि भाजपा के नेता नये-नये जुमले गडऩे में बड़े माहिर हैं, शिवराज सिंह के गुरु पूर्व मुख्यमंत्री सुन्दरलाल पटवा भी अपने शासनकाल के दौरान प्रदेश की जनता को ‘ज्यों के त्यों, रख दीनी चुनरिया’ का जुमला अक्सर सुनाया करते थे और कहते थे कि ‘काजल की कोठरी’ के जुमले का भी उपयोग खूब किया करते थे, ठीक उन्हीं के पदचिन्हों पर चलकर शिवराज सिंह भी कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘मैं डंडा लेकर आयो हूँ किसी को नहीं बख्शूंगा’ लेकिन उनके इस जुमले को लेकर प्रदेश की जनता में ही नहीं बल्कि भाजपा के नेताओं में लोग चटकारे लेकर यह कहते नजर आते थे और आ रहे हैं कि जिन शिवराज के प्रदेश की सत्ता पर काबिज होते ही उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह ने अपनी पहचान छुपाकर डम्पर खरीदकर जो संदेश शिवराज सरकार की कार्यशैली को लेकर दिया था उससे क्या यह साफ नहीं होता कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शिवराज कितनी जंग लड़ेगे। बात जहां तक भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग की करें तो शिवराज सरकार में भ्रष्टाचार की ऊपर से लेकर नीचे तक बही भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाकर भाजपा के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने ही नहीं बल्कि उनके परिजनों ने भी शिवराज सरकार का लाभ उठाकर क्या-क्या खेल खेले यह तो उनकी वर्तमान आर्थिक स्थिति को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुबेर किस तरह से शिवराज सरकार पर उनके परिजनों पर मेहरबान हुए, यह तो उनकी वर्तमान माली हालत को देखकर ही हर कोई यह कहता नजर आता है कि भाजपा और शिवराज के सबका साथ सबका विकास का यही फार्मूला है, तभी तो शिवराज सरकार में जमकर भ्रष्टाचार का ताण्डव खेला गया लेकिन फिर भी अपने आपको पाक-साफ बताने का ढिंढोरा भाजपाई पीटते रहे। शिवराज सरकार में बहीं भ्रष्टाचार की गंगोत्री के चलते जहां उनके परिजनों की माली हालत में इजाफा हुआ ही है जिसे जनता भलीभांति देख रही है तो वहीं उन भाजपा के नेताओं की भी माली हालत में सुधार शिवराज सरकार में हुआ जो उमा भारती के शासनकाल में अपनी सम्पत्ति और कारोबार बेचकर भोपाल में रहने का मन बना रहे थे लेकिन शिवराज सरकार के आते ही उनकी जो लाटरी खुली कि आज वही भाजपा के नेता करोड़ों में तो खेल ही रहे हैं तो उन्होंने शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान अपनी सम्पत्ति सरकार में रहते बनाई उसे देखकर वहां से गुजरने वाला हर कोई शिवराज के और भाजपा के सबका साथ, सबका विकास को याद करते नहीं भूलता, लेकिन मजे की बात यह है कि कांग्रेस को भ्रष्टाचार पर घेरने वाले भाजपा के नेता भ्रष्टाचार के किस तरह से पक्षधर हैं यह तो शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान हुए जिस तरह से भ्रष्टाचार का खुलासा कैग की रिपोर्ट में हो रहे खुलासे से पता चल रहा है कि किस तरह से शिवराज ने अपने १३ वर्षों के शासनकाल में प्रदेश के दरिद्र नारायण की सेवा करने का व्रत लेकर राजनीति की इन्हीं दरिद्र नारायण की सेवा का व्रत लेकर राजनीति करने वाले शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में आजादी के बाद से विकास के लिये पिछड़े उस बुंदेलखण्ड के विकास के लिये भाजपा की मोदी सरकार ने नहीं बल्कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में बुंदेलखण्ड के नाम पर जो उसके विकास के लिये जो पैकेज प्रदेश की भाजपा की शिवराज सरकार को दिया गया उसमें किस तरह का घोटाला हुआ मजे की बात तो यह है कि शिवराज सरकार में हुए बुंदेलखण्ड पैकेज के नाम पर हुए घोटाले की हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच हो जाने के बाद भी बुंदेलखण्ड पैकेज में हुए इस घोटाले के दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने की भी शिवराज सरकार ने पहल नहीं की और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देते रहे वह जांच रिपोर्ट आज भी मंत्रालय के किसी बस्ते में बंद पड़ी धूल खा रही है, यह है शिवराज के उस डंडा लेकर आया हूँ किसी नहीं बख्शूंगा का सही नमूना इस तरह के जुमले प्रदेश की जनता को सुनाकर १३ वर्षों तक प्रदेश में राज करने वाले शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल मेें कहां-कहां भ्रष्टाचार हुआ यह तो भविष्य बताएगा और इस भ्रष्टाचार में भाजपा के कितने नेता संलिप्त रहे यह भी आनेवाले समय में सामने आयेगा यही सब वजह है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के नेताओं के साथ-साथ उनके परिजन जिन्होंने अवैध रेत के उत्खनन के साथ-साथ तमाम विकास कार्यों में अधिकारियों से मिलकर जो घोटाले किये अब सरकार जाने के बाद उन घोटालों का खुलासा होने की डर से यह सभी घोटालेबाज शिवराज सिंह और भाजपा के नेताओं को हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा बनाई गई कांग्रेस सरकार को गिराने की पहल करने में लगे हुए हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि जनता द्वारा बनाई गई सरकार के मुखिया कमलनाथ ने शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों की किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से जांच करा ली तो उसके क्या परिणाम होंगे यही डर शिवराज के साथ उनके परिजनों और भाजपा के नेताओं की नींद उड़ाये हुए हैं जिनकी हैसियत शिवराज के सत्ता पर काबिज होने के पहले जिनकी हैसियत टूटी साइकिल तक की नहीं थी आज वही भाजपा के नेता, जनप्रतिनिधि और शिवराज के परिजन आलीशान भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे भरते नजर आ रहे हैं। जीरो टालरेंस और डंडा लेकर आया हूं किसी को नहीं बख्शूंगा का जुमला १३ वर्षों तक अपने शासनकाल में इस तरह के जुमले सुनाकर प्रदेश की जनता को गुमराह करने वाले शिवराज सिंह की सरकार के कार्यकाल में जहां प्रदेश की विकास योजनाओं के नाम पर तो भ्रष्टाचार हुआ ही है तो वहीं यूपीए सरकार के द्वारा दिये गये ३८६० करोड़ के विशेष पैकेज में हुए भ्रष्टाचार की कमलनाथ सरकार जांच कराने की तैयारी में है। प्रदेश में सत्ता बदलते ही घोटाले की फिर से जांच की मांग उठने लगी है। नौ विभागों में हुए हजारों करोड़ के घोटालों में सैंकड़ों अधिकारी एवं कर्मचारियों को दोषी पाया गया, लेकिन शिवराज सरकार ने दोषियों पर कार्रवाई करने में ढिलाई बरती। साथ ही जांच रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई। बुंदेलखण्ड पैकेज के तहत के तहत पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, वन, कृषि, पशु पालन विभाग, लोनिवि, उद्यानिकी, लोक स्वास्थ्य एवं यांत्रिकीय विभाग समेत नौ विभागों ने काम कराएं। सीटीई जांच में ज्यादातर विभागों ने घटिया निर्माण कराया। सीटीई जांच में भ्रष्टाचार उजागर हुआ है, लेकिन राज्य सरकार ने दोषियों पर कार्रवाई करने में ढिलाई बरती। बुंदेखण्ड पैकेज में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रदेश कांग्रेस के सचिव पवन घुवारा लडऱ्ा लड़ रहे हैं। उन्होंने पहले भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया था। जब शिवराज सरकार ने घोटाले की जांच नहीं कराई तो घुवारा हाईकोर्ट की शरण में गए। हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार ने सीटीई (मुख्य तकनीकी परीक्षक) ये जांच कराई। सीटीई नौ विभागों में हुए भ्रष्टाचार की जांच रिपोर्ट दो साल पहले राज्य सरकार को सौंप दी थी। बुंदेलखण्ड पैकेजे में जो गड़बड़ी आई उसमें जांच एजेंसी ने जल संसाधन विभाग में ८८० करोड़ की योजनाओं में गड़बड़ी, ग्रामीण यांत्रिकी विभाग में २१० करोड़ से निर्मित ३५० रुपये से पशुधन खरीदने की मनमानी, उद्यानिकी विभाग में ६६ करोड़ रुपये खर्च करने में अनियमितताएं,वन विभाग में वाटरशेड की आड़ में पूरी डकार ली, कृषि विभाग में ५७४.५० करोड़ की राशि में मनमानियों को अंजाम, लोक स्वासथ्य यांत्रिकीय विभाग में १०० करोड़ से तैयार १२८७ नलजल योजनाओं में ९९७ शुरू नहीं हो पाई। बुंदेलखण्ड पैकेज में जिन विभागों में ज्यादा भ्रष्टाचार हुआ उसमें सबसे ज्यादा बजट डब्लयूडीआरडी और आरएसई को दिया गया। आरईएस को विशेष पैकेज से जिले के अंदर ५३ स्टाम्प डेमों के निर्माण के लिए १८ करोड़ ५५ लाख रुपए दिए थे जिसमें से १६ करोड़ ९१ लाख व्यय किया गया। दूसरे पर जल संसाधन विभाग रहा। जिसमें से नरगुंवा जलाशय योजना पर दस करोड़ रुपए खर्च हुए। जांच के दौरान बांध में पिचिंग कार्य की मोटाई निर्धारित अनुसार नहीं पाई गई। बांध के निमा्रण में काम्पेक्शन कार्य निर्धारित मानक स्तर से कम पाया गया। इसी तरह बड़ेरा जलाशय योजना पर ५.५ करोड़ रुपए खर्च किए गए, जांच में बांध के निर्माण में मिट्टी का कार्य मानक स्तर पर पाया गया। पिचिंग में निर्धारित साइज से छोटे पत्थर होने के कारण पिचिंग का कार्य मानक स्तर का नहीं होना पाया गया और पिचिंग की मोटाई भी कम मिली। इसके अलावा भिनौनी जलाशय योजना पर सात करोड़ ८९ लाख ८८ हजार रुपए खर्च किए गए। बांध के निर्माण में काम्पेक्शन मानक स्तर से कम पाया गया, पिचिंग में निर्धारित साइज से छोटे पत्थर होने के कारण पिचिंग कार्य की गुणवत्ता में कमी मिली। उधर जागपुरा जलाशय में चार करोड़ ८९ लाख रुपए खर्च हुए। जांच में जलाशय की पिचिंग कार्य बिना हाउसिंग एवं स्पांत के कराया गया, पिचिंग में पैकिंग नहीं की गई। इस बारे में सामाजिक कार्यकर्ता पवन घुवारा का कहना है कि शिवराज सरकार ने बुंदेलखण्ड पैकेज में घोटाला किया। जांच कराने के लिए हाईकोर्ट जाना पड़ा। कोर्ट के निर्देश पर सीटीई से जांच कराई लेकिन आज तक सरकार ने जांच रिपोर्ट उजागर नहीं की। विधानसभा में भी अभ्यावेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब चूंकि सतता परिवर्तन हो चुका है। हाल ही में राज्य सरकार से एक बार फिर बुंदेलखण्ड पैकेज में हुए घोटालों की जांच की मांग की गई है।

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