शिवराज के स्वर्णिम मध्यप्रदेश की बुदनी में खुल रही पोल

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल और खासकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के १३ वर्षों के शासनकाल में शिवराज सिंह चौहान द्वारा स्वर्णिम मध्यप्रदेश का खूब ढिंढोरा पीटा गया और इस जुमले के चलते विकास की ऊपर से लेकर नीचे तक जो भ्रष्टाचार की गंगोत्री बही उसमें विकास की क्या स्थिति रही इसका सामना तो मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह को बुदनी से अपने पति को विजयश्री दिलाने के लिए सबका साथ, सबका विकास, की उस हकीकत से दो चार होना पड़ रहा है जिसमें प्रदेश के दूर-दराज के वह आदिवासी इलाके नहीं जहां मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान मुख्य बजट में दी गई राशि चुपके से झाबुआ जैसे जिले से निकालकर भोपाल के विकास में लगाई गई, विकास की इस हकीकत का सामना श्रीमती साधना सिंह को अपने पति की विधानसभा क्षेत्र में विकास की बही गंगोत्री से वंचित महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि शिवराज सिंह के बुढ़ापे की काशी नर्मदा के पास स्थित रेहटी के निवासियों को पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है इसी समस्या से आक्र ोषित महिलाओं ने पहले तो परम्परागत रूप से साधना सिंह का स्वागत किया लेकिन बाद में उन्हें इस तरह से घेरा कि वह वहाँ से भाग खड़ी हुई। विकास में धांधली और विकास से वंचित और उनके विधानसभा में कितने गांव होंगे यह तो भविष्य बताएगा लेकिन मुख्यमंत्री के उस स्वर्णिम मध्यप्रदेश के ढिंढोरे की हकीकत उन्हें अपने ही विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिली, इससे पूर्व जब पूरे प्रदेश में हुए बलराम तलाबों के घोटाले की सरकार द्वारा जांच कराई गई थी तो १३९ बलराम तालाब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गृह जिले सीहोर में कागजों पर ही बने पाये गये थे, भ्रष्टाचार की पोल न खुले इसलिये मुख्यमंत्री ने इन आंकड़ों को नकारने की कोशिश की थी लेकिन तब भी उनके भाई जो तत्कालीन जिला जनपद सीहोर के अध्यक्ष थे उन्होंने मुख्यमंत्री के अधिकारियों को चुनौती देते हुए यह कहा था कि वह आयें हमारे साथ घूमें यहाँ १३९ नहीं बल्कि उससे अधिक बलराम तालाबों में फर्जीवाड़ा हुआ है अपने भाई की इस तरह की चुनौती और अधिकारियों के विकास के नाम पर फर्जीवाड़े से घबराये शिवराज सिंह ने इस विवाद को आगे नहीं बढऩे दिया। मुख्यमंत्री के गृह जिले में अकेले बलराम तालाब योजना में ही नहीं बल्कि अनेकों योजनाओं में फर्जीवाड़ा होने की खबरें हमेशा सुर्खियों में रहीं यह स्थिति उस स्वर्णिम मध्यप्रदेश की है जिसका ढिंढोरा पीट-पीटकर प्रदेश की जनता को विकास के नाम पर गुमराह करते हुए इस प्रदेश को मुख्यमंत्री दो लाख करोड़ से ज्यादा का कर्जदार बना दिया है और प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को लगभग ४० हजार रुपये का कर्ज का बोझ डाल दिया है। मुख्यमंत्री के सपनों के स्वर्णिम मध्यप्रदेश में हुए इस तरह के घोटाले के चलते मध्यप्रदेश के खजाने की यह हालत है कि वह खाली है और सरकार को कर्मचारियों की वेतन के लिए हर बार बाजार से कर्ज उठाना पड़ रहा है ऐसी स्थिति में अब इस प्रदेश की जनता को मुख्यमंत्री ने एक नया झुनझुना समृद्ध मध्यप्रदेश का थमा दिया है। ऐसी स्थिति में अब लाख टके का सवाल यह है कि जिस प्रदेश का खाली खजाना हो और कर्मचारियों की वेतन के लिये हर माह कर्ज लेना पड़ रहा हो ऐसी स्थिति में कहाँ से और कैसे और किस हालात में मुख्यमंत्री अपने सपनों के स्वर्णिम मध्यप्रदेश के बाद अब भ्रष्टाचार की नई गंगोत्री की इबारत समृद्ध मध्यप्रदेश के रूप में लिखने जा रहे हैं, वह कैसे पूरी होगी इसका खुलासा भी भाजपा को अपने घोषणा पत्र में करना चाहिए। कुल मिलाकर साधना सिंह के साथ रेहटी में अपने पति को विधायक बनाने के लिये किये जा रहे जनसम्पर्क के दौरान महिलाओं के जो आक्रोश का सामना करना पड़ा उससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि मुख्यमंत्री की पकड़ अपने ही विधानसभा क्षेत्र में कमजोर पड़ती नजर आ रही है और उनके क्षेत्र के लोग अब मुख्यमंत्री की जुमलेबाजी से भली-भांति परिचित हो गये हैं, अभी तो महिलाओं ने पानी की समस्या को लेकर साधना सिंह का विरोध किया अब आगे क्या-क्या होगा यह तो भविष्य बताएगा। लेकिन यह जरूर है कि जिस स्वर्णिम मध्यप्रदेश के जुमले के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को २०१३ के विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी प्रत्याशी महेन्द्र सिंह चौहान से १७ मतदान केन्द्रों पर पराजय का स्वाद चखना पड़ा था अब तो उनका सामना कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव से है। शायद यही वजह है कि दिग्विजय सिंह ने शिवराज सिंह को अब बुदनी न जाने की सलाह देते हुए कहा कि यही हाल है बुदनी का सीएम जब हेलीकाप्टर से नीचे उतरकर लोगों के बीच जायें तभी तो उन्हें सच्चाई पता चलेगी, बुदनी में मैंने ११ दिन और ११ रातें बिताई हैं वहां के लोगों में भाजपा सरकार के प्रति खासी नाराजगी है उन्होंने शिवराज सिंह को सलाह दी कि वे बुदनी न जाएं उनकी पत्नी साधना की तरह उन्हें भी जनता के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति है शिवराज सिंह के स्वर्णिम मध्यप्रदेश के विकास की जिसके चलते प्रदेश की जनता का नहीं बल्कि भाजपा के नेताओं और मुख्यमंत्री के परिजनों का विकास हुआ है जो विकास दिखाई दे रहा है, जनता तो आज भी चाहे मुख्यमंत्री के क्षेत्र की हो या दूरदराज के आदिवासी इलाकों की हो, सभी पेयजल की समस्या ही नहीं कई समस्याओं से आज भी जूझ रही है।

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