शिवराज के साले संजय ने सेक्स रैकेट के आरोपी अपने मित्र को सरकारी गवाह बनाने के मामले की क्या कांग्रेस जांच कराएगी

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। ३१ जुलाई २०१५ को मध्यप्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने एक पत्रकार वार्ता के माध्यम से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह जो राजनैतिक महत्वाकांक्षा के चलते अपनी जीजा शिवराज सिंह का दामन छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गये उन पर केके मिश्रा ने आरोप लगाया था कि व्यापमं महाघोटाले के संरक्षक मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के (ई) मानदार परिवार पर एक गंभीर और प्रमाणिक आरोप लगा रही है, जिसके अनुसार बालाघाट जिले में मई २०११२ में हुए बहुचर्चित चंदोरी सेक्सकांड के एक कॉलोनाईजर आरोपी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह के मित्र मनोज पिता स्वर्गीय गोविंदास नेमा को सरकारी गवाह बनाने का आरोप लगाते हुए उनकी मित्रता का आधार भी उजागर कर रही है। जिसके अनुसार बालाघाट जिला मुख्यालय की गोविंद मंगलम् कॉलोनी, जिसके कॉलोनाईजर संजय सिंह के मित्र मनोज नेमा हैं, की इस कॉलोनी में बगीचे के लिए आरक्षित ३५१० वर्गफुट भूमि, जिसका वर्तमान बाजार मूल्य ८० (अस्सी) लाख रुपए है, को मुख्यमंत्री के साले संजय सिंह पिता घनश्यामसिंह मसानी, जाति किरार, निवासी १२०-क, आजाद वार्ड, बालाघाट, तहसील व जिला बालाघाट द्वारा अवैध तरीके से न केवल कम दामों में खरीदी गई, बल्किी उसकी अवैध रजिस्ट्री कराते वक्त स्टाम्प चोरी भी की गई है। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि इस भूमि की रजिस्ट्री संजय सिंह ने मात्र ४.२५ लाख रुपये में कराकर सिर्फ ४२ हजार रुपये के स्टाम्प लगाये हैं। लिहाजा, उनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाये। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि संजय सिंह पिता घनश्याम सिंह मसानी, निवासी-गोंदिया (महाराष्ट्र) में रहते हैं, तब रजिस्ट्री में क्रेता के बतौर उनका पता १२०-क, आजाद वार्ड, बालाघाट तहसील व जिला बालाघाट के साथ परिचय पत्र क्रमांक आईवीबी ००५९६५९ क्यों लिखाया गया, यह भी जाँच का विषय है? दिनंाक ३१ जुलाई २०१५ को तत्कालीन कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा ने अपने आरोप को स्पष्ट करते हुए कहा था कि वैसे भी अपने आरोप को स्पष्ट करते हुए मिश्रा ने कहा कि वैसे भी विकसित कॉलोनी के लिए आरक्षित बगीचे की बिक्री और उसकी रजिस्ट्री दोनों ही गैर कानूनी है, उसे कानूनी जामा सिर्फ इसलिए पहनाया गया कि इसके क्रेता मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह हैं। कांग्रेस की मांग है कि अवैध क्रय-विक्रय में संबंधित शासकीय अधिकारियों व संबंधित रजिस्ट्रार के विरुद्ध भी आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाये। उल्लेखनीय है कि बहुचर्चित चंदोरी सेक्स कांड को लेकर बालाघाट जिले की वारासिवनी थाने में मामला दर्ज हुआ था, जिसके जांच अधिकारी थानेदार गुलबाजे थे और मनोज नेमा को इस सेक्स कांड में आरोपित होने के बाद तत्कालीन सीएसपी प्रवीण भूरिया ने उन्हें बतौर आरोपी होने के दौरान अपने कार्यालय में तीन नेाटिस देकर बुलवाया था, किन्तु अपने राजनैतिक संरक्षक आका और मुख्यमंत्री के साले संजय सिंह का उन्होंने पूरा दुरुपयोग कर पुलिस पर अनैतिक दबाव बनाया और मनोज नेमा को संजय सिंह ने सरकारी गवाह बनवा दिया, किसी बहुचर्चित सेक्सकांड के आरोपी को अपनी राजनैतिक शक्ति की बदौलत मुख्यमंत्री के पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी गवाह बनाना किस शुचिता और संस्कारों की ओर संकेत कर रहा है? बेटी बचाओ अभियान और महिला शक्ति की कथित तौर पर सम्मान की निगाह से देखने वाले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इतने बड़े सेक्स स्केंडल के आरोपी को अपने साले द्वारा सरकारी गवाह बना देने जैसे दुष्कृत्य को बड़ी खामोशी से कैसे देखते रहे? कांग्रेस की मांग है इस समूचे सेक्सकांड की जांच सीबीआई को सौंपी जाये और आरोपित मनोज नेमा से संजय सिंह के संबंधों की भी जांच सार्वजनिक हो। कांग्रेस मुख्यमंत्री यह भी मांग है कि बालाघाट जिले में मेग्नीज खदानों के वैध-अवैध उत्खनन किसकी अतिकृपा से और किन-किन लोगों द्वारा संचालित किये जा रहे हैं, यह भी न केवल सार्वजनिक हो, बल्कि इस वैध-अवैध उत्खनन की जांच भी सीबीआई को सौंपी जाये? सवाल अब यह उठता है कि आज भले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साले संजय सिंह कांग्रेस का दामन थाम वारासिवनी से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में चुनावी समर में उतरे हों लेकिन उन पर कांग्रेस के ही तत्कालीन मुख्य प्रवक्ता केके मिश्रा द्वारा ३१ जुलाई २०१५ को लगाये गये इस गंभीर आरोप की क्या कांग्रेस आज जांच कराने के पक्ष में है कि नहीं इस बात का खुलासा होना चाहिए।

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