व्यापमं मुद्दे पर भाजपा को घेरने वाली कमलनाथ सरकार खुद सवालों के घेरे में

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान १५ वर्षों और खासकर शिवराज सिंह चौहान के १३ वर्षों के शासनकाल में प्रदेश की राजनीति में सदी का सबसे बड़े हुए व्यापमं घोटाले की जाँच कराने का दावा करने वाली कमलनाथ सरकार स्वयं कई सवालों के घेरे में है, क्योंकि अचानक से एसटीएफ जाँच रोकने और इस जाँच के मामले को ठंडे बस्ते में डालने के बाद मंत्रालय से लेकर राजनीतिक गलियारों में कमलनाथ सरकार के जाँच के दावे की घोषणा को लेकर तरह तरह की चर्चाएं लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं तो वहीं यह सवाल भी खड़े करते नजर आ रहे हैं कि जिस व्यापमं घोटाले की जाँच कमलनाथ सरकार एसटीएफ से कराने का दावा कर रही है उसी एसटीएफ से जब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा जाँच कराई जारही थी तब कांग्रेसी नेता और खासकर दिग्विजय सिंह यह सवाल उठाते थे कि जो एसटीएफ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अण्डर में आती हो वह व्यापमं घोटाले की क्या निष्पक्ष जाँच कर पाएगी, हालांकि इन आरोपों के चलते एसटीएफ ने जो भी जाँच की उसको लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं लेकिन बाद में इसकी जाँच सीबीआई को सौंप दी गई तो सीबीआई ने भी इस पर काफी समय तक जाँच की लेकिन सत्ता में काबिज होते ही कमलनाथ सरकार ने पूरे मामले की जाँच एसटीएफ को सौंप दी थी अब न तो जाँच में तेजी दिख रही है और न ही सरकार के स्तर पर व्यापमं जाँच को लेकर कोई सरगर्मी दिखाई दे रही है, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद व्यापमं घोटाले की जाँच एसटीएफ ने जाँच की दिशा में आगे कदम बढ़ाया था लेकिन इसी दौरान प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेज की लॉबी का दबाव कमलनाथ सरकार पर इस तरह से प्रभावी हुआ कि इस दबाव के चलते सरकार ने अपने व्यापमं जाँच के मामले में ढील दे दी, व्यापमं घोटाले में नये सिरे से जाँच को लेकर लोगों का यह मानना है कि कमलनाथ सरकार द्वारा नये सिरं से जाँच कराये जाने की घोषणा केवल एक राजनीतिक सुर्खियां बटोरना ही था तो वहीं अपने विधानसभा चुनाव के पूर्व अपने वचन में दिये इस घोटाले की जाँच कराने के दिये वचनों में एक वचन व्यापमं घोटाले की जांच का भी था कमलनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रदेश की जनता को विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस पार्टी द्वारा दिये वचन पत्र के माध्यम से दिये वचनों से मुकरने के कई उदाहरण सामने आये हैं, राज्य के निजी मेडिकल कॉलेजों की लॉबी की दबाव के चलते अब व्यापमं घोटाले की जाँच में सरकार द्वारा जो नीति अपनाई जा रही है उससे यह साफ नजर आ रहा है कि इस व्यापमं घोटाले की जाँच के मामले में दिये वचन पत्र से भी अब सरकार मुकरने की तैयारी कर रही है, हालांकि एसटीएफ ने इसकी तैयारी भी कर ली थी और इसको लेकर व्यापमं घोटाले के व्हिसिल ब्लोअर डॉ. आनन्द राय को एसटीएफ ने नोटिस देकर बयान देने के लिये बुलाया था लेकिन इसी बीच जाँच की रफ्तार की गति पर ब्रेक लग गया, विधानसभा चुनाव के दौरान दिये अपने वचन-पत्र में किये गये वादों से मुकरने के लिये अब सरकार के द्वारा दलील यह दी जा रही है कि इस मामले में कानूनी सलाह ली जाएगी कानूनी सलाह लेने के बाद जांच करने के बाद और नहीं करने के बारे में अंतिम फैसला लिया जाएगा। कुल मिलाकर व्यापमं घोटाले की इस जाँच में मुकरने के पीछे इस बात को लेकर चर्चा है कि प्रदेश के निजी मेडिकल लॉबी के दबाव में किया जा रहा है।
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