विधानसभा में हुई गलत नियुक्तियों को निरस्त करने की उठने लगी मांग

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मध्यप्रदेश विधानसभा में वर्षों से पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के हकों से वंचित करने और अपने चहेते लोगों की मनमानी नियुक्तियां करने को लेकर अब विधानसभा के कर्मचारियों में आक्रोश पनपने लगा है और यह अधिकारी और कर्मचारी भाजपा के शासनकाल में हुई तमाम नियुक्तियों को निरस्त करने की मांग को लेकर आवाज उठाने लगे हैं हालांकि इसी विरोध के चलते मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व स्पीकर डॉ. सीतासरन शर्मा के लोगों पर गाज गिरना शुरू हो गई स्पीकर पद से हटने से पहले डॉ. शर्मा ने जिन रिटायर्ड डिस्ट्रिक जज शशिकां चौबे को विधानसभा सचिव बनाया था उन्हें एक महीने के अंदर हटा दिया गया है विधानसभा सचिवालय में भाजपा के शासनकाल में सचिवालय में संविदा पर रखे गये कई कर्मचारियों को हटाने के निर्देश दिये गये हैं इसके अलावा डॉ. शर्मा के कार्यकाल में हुई तमाम नियम विरुद्ध नियुक्तियों एवं डिजिटलाईजेशन के करोड़ों के काम में हुए घपले की जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि इसी से संबंधित जानकारी संसदीय और सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने विधानसभा सचिवालय से सूचना के अधिकार के तहत मांगी थी लेकिन उन्हें यह जानकारी नहीं दी गई थी अब डॉ. गोविंद सिंह संसदीय कार्यमंत्री हैं तो उन्होंने यह सभी जानकारी विधानसभा सचिवालय से मांगी है खबर यह भी है कि इसमें करोड़ों का घोटाला हुआ है और इस घोटाले के खिलाफ डॉ. शर्मा के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। यह उल्लेखनीय है कि डॉ. शर्मा ने अपने कार्यकाल में ऐसे ही मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करा चुके हैं जिसके कारण दिग्विजय सिंह को चार घंटे जहांगीराबाद थाने में पूछताछ के लिये बैठाया गया था। दिग्विजय सिंह अपने जीवन में इस अपमान को भूले नहीं हैं और वह डॉ. शर्मा को इसका सबक सिखाना चाहते हैं। यूँ तो भाजपा के शासनकाल में विधानसभा सचिवालय में हुई कई संविदा नियुक्तियां, प्रतिनियुक्तियों के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय नेता के चहेते जिसके माध्यम से २००८, २०१३ और २०१८ के विधानसभा चुनाव में उक्त अधिकारी के माध्यम से उक्त भाजपा के राष्ट्रीय नेता ने तमाम पार्टी के उम्मीदवारों को टिकट बेचने का गोरखधंधा किये जाने की खबरें भी चर्चाओं में हैं उक्त अधिकारी की विधानसभा में नियुक्ति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं तो वहीं विधानसभा सचिवालय में वर्षों से पदस्थ अधिकारी और कर्मचारी उक्त भाजपा के नेता के सहयोगी अधिकारी की नियुक्ति को असंवैधानिक और गलत नियुक्ति मानकर चल रहे हैं। हालांकि उक्त अधिकारी की नियुक्ति के संबंध में भाजपा के शासनकाल में कई बार सूचना के अधिकार के तहत जानकारी चाही गई लेकिन जिस प्रकार से डॉ. गोविन्द सिंह के द्वारा डिजिटलाईशन जानकारी देने से मना कर दिया था इसी तरह से उक्त अधिकारी की नियुक्ति के संबंध में जानकारी लेने वालों को सचिवालय से मना किये जाने की चर्चा है। अब चूंकि कांग्रेस की सरकार सत्ता में है और वर्षों से भाजपा के शासनकाल में विधानसभा में हुई तमाम नियुक्तियों और प्रतिनियुक्तियों के खिलाफ कर्मचारियों में आवाज उठने लगी और सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की मांग है कि जिन लोगों ने हमारे हकों पर डाका डाला उन सभी की नियुक्तियां निरस्त की जाएं, इस तरह की मांग अब उठने लगी है। देखना अब यह है कि भाजपा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्रीयुत श्रीनिवास तिवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के शासनकाल में हुई नियुक्तियों के खिलाफ भाजपा के शासनकाल में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा ने उन सभी नियुक्तियों को लेकर जहांगीराबाद थाने में श्रीनिवास तिवारी और दिग्विजय सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी क्या अब कांग्रेस के वर्तमान शासनकाल में भाजपा के शासनकाल के दौरान विधानसभा अध्यक्ष सीतासरन शर्मा के कार्यकाल में हुई तमाम नियुक्तियों और प्रतिनियुक्तियों के खिलाफ उठ रहीं विधानसभा सचिवालय के कर्मचारियों व अधिकारियों के आक्रोश को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति कार्यवाही करेंगे और उन सभी नियुक्तियों और प्रतिनियुक्तियों पर पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को विधानसभा से विदा करने की कार्यवाही करेंगे तो वहीं भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता के चहेते अधिकारी की नियुक्ति जिसको लेकर विधानसभा सचिवालय में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और विधानसभा के अधिकारी और कर्मचारी उक्त नेता के चहेते अधिकारी की नियुक्ति को पूरी तरह से अवैध और गलत तरीके से की गई नियुक्ति मानकर चल रहे हैं उन सभी के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष कोई कारगर कदम उठायेंगे।

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