वित्त मंत्री जैसी मितव्ययिता को कब मिलेगी व्यापकता

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०- देवदत्त दुबे
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ लगातार फिजूलखर्ची रोकने की बात कहते आ रहे हैं, लेकिन अधिकांश मंत्री इस पर अमल करते दिखाई नहीं दे रहे। ऐसे में वित्त मंत्री तरुण भानोट ने स्वागत-सत्कार पर होने वाले सरकारी खर्च पर रोक लगाकर मिसाल पेश की है, लेकिन यक्ष प्रश्न यही है कि वित्त मंत्री जैसी मितव्ययिता को आखिर कब मिलेगी व्यापकता, जब सभी मंत्री और अधिकारी इस तरह के होने वाले खर्चों पर रोक लगा सकेंगे। दरअसल, सरकारी खर्चों के अनाप-शनाप हिसाब-किताब प्राय: देखने और सुनने को मिलते हैं। इसको रोकने की भी समय-समय पर बातें होती रहती हैं लेकिन अमल करने की जब बात आती है तब कोई दिखाई नहीं देता क्योंकि सरकारी खर्च पर कोई यह एहसास ही नहीं कर पाता कि आखिर यही जनता की गाड़ी कमाई का पैसा है। जो काम प्राइवेट में बहुत कम पैसे में हो जाता है वहीं काम सरकारी स्तर पर दुगने पैसों में होता है। यही कारण है कि सरकार द्वारा होने वाले किसी भी खर्च में भ्रष्टाचार की संभावना ज्यादा रहती है, खर्च भी दिल खोलकर किया जाता है। बहरहाल, प्रदेश के खाली खजाने की चाबी थामे वित्त मंत्री तरुण भानोट ने मितव्ययिता की शुरुआत करके अन्य मंत्रियों को भी संदेश दे दिया है कि वे प्रदेश के हित में वे भी ऐसा कर सकते हैं। प्रदेश की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए गैर जरूरी खर्चों में कटौती के निर्देश निकालने वाले वित्त मंत्री तरुण भानोट ने सबसे पहले उदाहरण पेश करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर सूचित किया है कि मंत्रालय स्थित आफिस में उनसे मिलने आने वाले मेहमानों, समर्थकों एवं कार्यकर्ताओं के सत्कार पर होने वाले खर्च को वे स्वयं वहन करेंगे। सत्कार खर्च पर होने वाली राशि सरकारी खजाने से खच्र नहीं होगी। भानोट ने पत्र में लिखा है कि उनके कार्यालय में सत्कार खर्च में वे स्वयं सक्षम हैं। यहां यह बताते चलें कि मंत्रालय में मंत्रियों से भेंट करने आने वाले अतिथियों के लिए चाय-नाश्ता आदि उसका भुगतान सामान्य प्रशासन द्वारा किया जाता है। इसके लिए सरकार के पास अलग से सत्कार मद है और जिसका सरकार भुगतान करती है। सो तरुण भानोट की इस पहल की सराहना तो मंत्रालय में हो रही है, लेकिन एक मंत्री के ऐसा करने से फिजूलखर्ची पर पूरी तरह रोक लगाना संभाव नहीं है। इसके लिए सभी मंत्रियों और अधिकारियों को पहल करना पड़ेगी। इसके पहले भी तरुण भानोट अधिकारियों को निर्देश दे चुके हैं कि एक अधिकारी केवल एक ही गाड़ी का उपयोग करेगा। कुल मिलाकर जिस फिजूलखर्ची पर रोक लगाने की नई सरकार बात कर रही थी उस पर अब तक एक मंत्री ने ही पहल की है। मितव्ययिता को व्यापकता मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ, मंत्रियों और अधिकारियों को कब तक तैयार कर पाएंगे। तब जाकर ही मितव्ययिता को व्यापकता मिल पाएगी।
०-नया इंडिया के कालम ”राजनैतिक गलियाराÓÓ से साभार)
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