वर्षों बाद सुर्खियों में आया शिवराज का ७४ बंगले में स्थित बंगला

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। पता नहीं ७४ बंगले में स्थित पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आठ नम्बर का बंगला बी-आठ इन दिनों खूब चर्चाओं में है क्योंकि वहां आये दिन कांग्रेसी नेता किसी न किसी मुद्दे को लेकर शिवराज सिंह को दस्तावेज सौंपने जा रहे हैं जिसके कारण यह बंगला इन दिनों चर्चाओं में है हालांकि इससे पूर्व भी यह बंगला उस समय चर्चित रहा जब शिवराज सिंह केवल सांसद हुआ करते थे तो उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती और बाबूलाल गौर के खिलाफ भी चल रहे आंदोलनों को हवा देने का काम बदस्तूर जारी था, हालांकि इससे पहले दिग्विजय सिंह के शासनकाल में भी कई आंदोलनों को हवा देने का काम भी इसी बंगले से हुआ तो वहीं जब दिग्विजय सिंह के शासनकाल में आंदोलनकारियों को मिली सफलता की मिठाई भी भले ही उन्होंने आपस में न बांटी हो लेकिन शिवराज के बी-आठ स्थित बंगले पर जश्न मनाते हुए उन्हें और मीडिया कर्मियों को जमकर मिठाई खिलाये जाने का दौर जारी रहा। लेकिन यह सिलसिला रुका नहीं और २००३ में उमा भारती के सत्ता पर काबिज होते ही इस बंगले में गतिविधियां बढ़ गई और उमा भारती को पद से हटाने की कई योजना इस बंगले पर ही बनीं तो वहीं उमा भारती के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के खिलाफ चले हर धरना-प्रदर्शन और आंदोलन के पीछे इस बंगले की अहम भूमिका रही क्योंकि गौर के खिलाफ आंदोलन कर रहे आंदोलनकारियों का अपने किसी आंदोलन धरना या प्रदर्शन को अंजाम देने के पूर्व इस बंगले से आता-जाता देखा गया है, पता नहीं इस बंगले पर यह सब उस समय तक पड़ोसी रही तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष जुमना देवी की आत्मा की छाया का असर है या फिर शिवराज सिंह के १५ वर्षों के शासनकाल में बहुचर्चित रही सत्ता की उस अदृश्य देवी की कार्यशैली और रणनीति का असर है जो यह बंगला हमेशा चर्चाओं में रहा शिवराज सिंह के शासनकाल के अंतिम दौर में यह बंगला किरार समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के बनते ही काफी सुर्खियों में रहा और यहाँ समाज के लोगों के अलावा भी तमाम उद्योगपति और कारोबारियों का भी इस बंगले में आने-जाने का क्रम जारी रहा। लेकिन शिवराज सिंह के सत्ता से हटने के बाद जिस प्रकार से यह बंगला फिर चर्चाओं में है ऐसा शायद ही भाजपा के किसी नेता भले ही उसमें नेता प्रतिपक्ष भी शामिल हों उनके बंगल पर इतनी रौनक नहीं रहती क्योंकि शिवराज सिंह आज भी अपने आपको मुख्यमंत्री होने का भ्रम पाले हुए हैं और उसी तरह की कार्यशैली और अपना व्यवहार वह कायम किए हुए हैं जिसके चलते ना तो नेता प्रतिपक्ष अपने दायित्वों का निर्वाहन कर पा रहे हैं और न ही उनके पूर्व संकटमोचन रहे नरोत्तम मिश्रा और जिन अपने चहेते करीबी नेता पूर्व परिवहन मंत्री भूपेन्द्र सिंह को शिवराज सिंह नेता प्रतिपक्ष बनाने की जुगाड़ में लगे हुए थे इतनी रौनक तो इन लोगों के बंगले पर नहीं रहती, रोनक विहीन बंगलों में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह की भी चर्चा है, उनका बंगला भी इतना चर्चित नहीं है जितना सांसद के समय से लेकर अभी तक शिवराज सिंह का ७४ बंगले स्थित बी-आठ का बंगला चर्चाओं में है। इसके पीछे का कारण भाजपा के नेता यह बताते हैं कि शिवराज सिंह ने पूरी भाजपा की कमान अपने हाथों ले रखी है जिसके चलते वह किसी भी प्रादेशिक भाजपा नेता चाहे वह नेता प्रतिपक्ष ही क्यों न हो कुछ करने ही नहीं देते हैं जब भी मौका मिलता है वह किसी न किसी मुद्दे को लेकर समाचार पत्रों की सुर्खियों में बने रहना चाहते हैं, विधानसभा चुनाव में सरकार गंवाने के बाद भी वह पूरे प्रदेश का दौरा करते रहे इसके लिये हवाई जहाज उन्हें किसने उपलब्ध कराया यह सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार व भाजपा के लिये जांच का विषय है कि कौन वह व्यक्ति है जिसके हवाई जहाज से उन्होंने लोकसभा चुनाव के पूर्व प्रदेश का दौरा किया इसका भार किसने उठाया और उसका मकसद क्या था। बात जहां तक भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान स्थिति की करें तो शिवराज की रणनीति और कार्यशैली के चलते भाजपा की जो छीछलेदर सत्ता जाने के बाद हो रही है उसको लेकर भी पार्टी के प्रदेश कार्यालय दीनदयाल परिसर से लेकर चौक-चौराहों और चाय की दुकानों से लेकर भाजपा के नेताओं में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं, भाजपा के लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि बार-बार शिवराज सिंह चौहान कांग्रेस की सरकार गिराने को लेकर जो बयान देते हैं उसके पीछे भी हर तरह के अवैध कारोबारी चाहे वह रेत माफिया हो या शराब माफिया व भूमाफिया सहित सभी तरह के अवैध कारोबारी शिवराज सिंह को इसलिये मदद कर रहे हैं क्योंकि जिस तरह का कारोबार शिवराज सिंह के शासनकाल में इन अवैध कारोबारियों का पनपा अब इस सरकार में उन्हें खतरा मंडरा रहा है। भाजपा के नेता तो यहाँ तक दावा करते हैं कि इन अवैध कारोबारियों के अपने १३ वर्षों के शासनकाल में संरक्षक रहे शिवराज सिंह चौहान की सत्ता में उस अदृश्य देवी की अहम भूमिका रही है और वही सत्ता की देवी को इन दिनों सत्ता का सुख खटक रहा है और सत्ता की वह अदृश्य देवी ही उमा भारती और बाबूलाल गौर के शासनकाल की तरह कमलनाथ के खिलाफ भी आंदोलन की नई-नई रणनीति तैयार कर कमलनाथ सरकार के सामने परेशानी खड़ी करने की कोशिश में लगी हुई है। सूत्रों की यदि मानें तो सत्ता की इस देवी की इस तरह की रणनीति में कुछ कांग्रेसियों की भी अहम भूमिका होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। देखना अब यह है कि सत्ता के सुख से वंचित शिवराज सिंह के शासनकाल में हमेशा सुर्खियों में रही सत्ता की उस अदृश्य देवी की रणनीति के परिणाम आने वाले दिनों में भाजपा और सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिये क्या रंग लायेंगे यह तो भविष्य के गर्त में है?

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