वर्षों बाद सुर्खियों में है 74 बंगले का बी-8 बंगला

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश की राजनीति से जुड़े लोगों को इन दिनों कमलनाथ सरकार और भाजपा नेताओं के बीच चल रही नूरा कुश्ती को देखकर कई ख्याल आते होंगे और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जो अपनी १३ वर्षों के कार्यकाल की कार्यशैली के चलते सत्ता से तो बेदखल होने के बाद भी आज तक अपने आपको प्रदेश का मुख्यमंत्री होने का भ्रम पाले हुए हैं, उन्हीं पूर्व मुख्यमंत्री को आवंटित राजधानी के लिंक रोड ७४ बंगले पर स्थित बी-८ बंगला भी इन दिनों सुर्खियों में है। राजनीति से जुड़े लोगों को यह स्मरण होगा कि जब उमा भारती सत्ता में थीं तो उस समय भी यह बंगला उमा भारती के खिलाफ चली मुहिम के लिये चर्चाओं में था और उमा भारती के बाद प्रदेश की सत्ता पर काबिल पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर के समय तो ७४ बंगले में स्थित बी-८ इस कारण चर्चाओं में रहा कि उस दौरान बाबूलाल गौर के खिलाफ धरना-प्रदर्शन और आंदोलन की जो मुहिम चली उस मुहिम से जुड़े स्वयंसेवी संगठन और राजनेता जब भी कोई तत्कालीन मुख्यमंत्री गौर के खिलाफ कोई धरना-प्रदर्शन या आंदोलन करते थे तो उससे पूर्व वह इसी ७४ बंगले स्थित बी-८ से निकलते देखे जा सकते थे। इन दिनों जो कमलनाथ सरकार के खिलाफ जो भी मुहिम चलाई जा रही है उस मुहिम में भी बी-८ बंगले की अहम भूमिका है, पिछले दिनों किसानों की कर्जमाफी को लेकर भाजपा के नेताओं द्वारा जो कमलनाथ सरकार पर किसानों को गुमराह करने के आरोप लगाये गये तो कांग्रेस के नेताओं द्वारा किसानों से संबंधित कर्जमाफी से संबंधित बंडलों च्यवनप्राश और बादाम लेकर पहुंचे थे तो इसी बी-८ बंगले पर ही जबकि भाजपा की ओर से नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और पूर्व जल संसाधन और जनसम्पर्क मंंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के साथ-साथ पार्टी के संगठन के मुखिया राकेश सिंह सहित कई नेताओं ने किसानों के कर्जमाफी को लेकर कई गंभीर आरोप लगाये थे। लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने इसके विरोध में प्रदर्शन और दस्तावेजों का बण्डल पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के ७४ बंगले स्थित बी-८ पर भी जाकर प्रदर्शन किया था। बात जहां तक इस बंगले और आंदोलन से जुड़े इतिहास की बात करें तो इसी बंगले से दिग्विजय सिंह के शासनकाल के दौरान शिक्षकों का जो आंदोलन प्रदर्शन और धरने का दौर चला था उसके पीछे भी लोग इसी बंगले की रणनीति मानते हैं तभी तो इ दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में इस आंदोलन की सफलता के बाद जो खुशी का जश्न मना था तो इसी बंगले पर मनाया गया था और उस दौरान राजधानी के पत्रकारों और आंदोलनकारियों ने इसी बंगले पर जीत की खुशी में मिष्ठान का स्वाद चखा था, कमलनाथ सरकार के खिलाफ इसी बंगले को केन्द्र बिन्दु बनाने का काम जो कांग्रेसी नेताओं ने कर्जमाफी के बण्डलों, च्यवनप्राश और बादाम भेंट कर इस बंगले को और अधिक चर्चाओं में ला दिया इसके बाद कल जो आदिवासियों को लेकर राजधानी में शिवराज सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन हुआ वह प्रदर्शन भी उसी बंगले के निवासी शिवराज सिंह चौहान द्वारा ही किया गया और उस आंदोलन से घबराकर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदर्शन शुरू होने के चंद घंटों बाद उनको मंत्रालय में आमंत्रित कर उनके साथ जो बैठक की और उस बैठक के बाद जो संदेश इस प्रदेश की जनता में गया उस संदेश के माध्यम से शिवराज को हीरो बनाने का काम कमलनाथ ने पूरा किया। इस घटना के बाद तो अब यह लगने लगा है कि आगे ७४ बंगले में स्थित यह बी-८ बंगले में चल रही रणनीति क्या कमलनाथ सरकार के खिलाफ किस तरह की समस्यायें खड़ी करेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है, फिलहाल तो राजनीति से जुड़े लोग यह मानकर चल रहे हैं कि एक लम्बे समय से ७४ बंगला स्थित इस बी-८ बंगले से जो भी राजनीतिक उथल-पुथल हुई तो उसका श्रेय इस बंगले के रहने वाले राजनेता पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को ही मिला है। हालांकि बाबूलाल गौर की सरकार के खिलाफ आंदोलन की चली रणनीति के पर्दे के पीछे किसका हाथ था यह राजनीति से जुड़े सभी लोग जानते हैं।

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