लोक निर्माण विभाग में चला भजकलंदार का खेल?

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। वैसे शिवराज सिंह चौहान के तेरह वर्षो के शासनकाल में ऊपर से नीचे तक बही भ्रष्टाचार की गंगौत्री के चलते लोक निर्माण विभाग भ्रष्टाचार के लिए काफी चर्चाओं रहा मगर कांग्रेस सरकार आने के बाद तो उसके चुनाव के समय दिए गए नारे “वक्त है बदलाव का ” के अनुरुप अब इस विभाग पूरी तरह से साकार होता दिखाई दे रहा है अभी तक यह विभाग अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के लिए ही चर्चित था लेकिन इस विभाग की कमान मुख्यमंत्री कमलनाथ के प्रबल समर्थक सज्जन सिंह वर्मा की कार्यशैली के चलते विभाग में कमलनाथ सरकार के सुपर चीफ मिनिस्टर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के दलित ऐजेंडा को लागू कर दिग्विजय सिंह की तरह अपने विभाग के साथ – साथ कर्मचारियों में असंतोष पैदा करने का कार्य तो किया ही है। तो वही चहते जिन आर के मेहरा ने तो विभाग के कायदे कानूनों को ताक में रखकर मंत्री के अस्वस्थ होने के बावजूद विभाग के मंत्री के नातों रिश्तेदारों और दलालों के दवा में नियम विरुद्घ विभाग के करीब तीस इंजीनियरों के स्थानांतरण कर डाले इसको लेकर विभाग में तरह – तरह की चर्चाओं का दौर जारी है? उलेखनीय है कि मेहरा अपनी अजब कार्यशैली के लिए काफी चर्चाओं में हमेशा रहें हैं? तो अनेकों अनियमितताओं के साथ – साथ अनेकों गंभीर आरोपों से घेरे हुए हैं ? यही वजह है कि हाल ही में जो बिना मंत्री के अनुमति के मेहरा द्वारा किए गए स्थानांतरण को लेकर जिस तरह की चर्चाओं का दौर जारी है। और लोग यह कहते नजर आ रहे हैं कि यह सारा खेल भजकलदारमं के चलते हुआ तो यह भी चर्चाओं का भी दौर जारी हैं कि यह विभाग में सक्रिय दलालों के दबाव में खेल खेला गया है। तो चर्चा यह भी विभाग में जारी है कि मंत्री अपने पुत्र को लोकसभा चुनाव में उतार की तैयारी में नजर आ रहे हैं इसके लिए शासन के द्वारा किए जाने बाले स्थानांतरण को चंदा एकत्रित करने के लिए किए गए । लेकिन इन स्थानांतरण किए गए? ममला जो भी मगर इसको लेकर चर्चाएं लोग चटखारे लेकर करते नजर आ रहे हैं? विभाग में चर्चाओं का दौर यह भी जारी है कि लोक निर्माण विभाग कमान हाथ में आते ही मंत्री के नातों -रिश्तेदारों के साथ – साथ दलालों की इस तरह से सक्रियता बढ गई थी और मंत्री के रिश्तेदारों ने भोपाल में एक होटल में कमरा ले रखा था जिसमें विभाग के राज्य भर के प्रभारी ए ई ई ने जमकर पैसों का लेन देन कर अपनी मन पंसद पद स्थापना कराने सफलता हासिल कर ली, इसी बीच इन रिश्तेदारों ने हर मिलने अधिकारियों से कमरे में भेंटकरने के पूर्व उनके मोबाइल रखवाने की बात का विरोध करना प्रारंभ कर दिया और दलालों व मंत्री के नातों रिश्तेदारों से सौदा करने की बजाय सीधे मंत्री की बीमारी का लाभ उठा खैर खबर लेने के बहाने सीधा सम्पर्क साधना शुरु कर दिया सूत्र बताते हैं कि मंत्री के बीमारी के दौरान जमकर स्थानांतरण का गोरखधंधा चला। विभाग में भजकलदारमं के खेल में एस एल रघुवंशी जिनके खिलाफ ईओडबल्यू में मामला चल रहा है रघुवंशी ने भी सौदा कर अधीक्षण यंत्री पद हथियाने में सफलता हासिल करली। रघुवंशी की इस पदस्थापना से अनेकों के हक मारने का भी काम किया। सूत्रों से छन छन कर विभाग से जो खबरें आ रही हैं उनमें यह बताया जा रहा है कि लोक निर्माण विभाग में सत्ता के बदलाव के बाद कांग्रेस के नारे “बक्त है बदलाव का ” जिस तरह से पालन किया गया उसमें मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने अपने दलालों, नाते रिश्तेदारों से यही कहा गया कि यह सारा खेल साहब के निर्देश पर लोकसभा चुनाव के लिए कर रहे हैं? मंत्री ने इस दावे में कितनी दम है यह तो मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस के नेताओं और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए जांच का विषय की लोक निर्माण विभाग में पदस्थापनाओ और स्थानांतरणों के नाम पर हुए करोडों का खेल किसकी सहमति या आदेश पर खेला गया? मगर यह तो सच्चाई है कि विभाग में बही भ्रष्टाचार की बही गंगौत्री में जमकर डुबकी विभाग के मंत्री से लेकर उनके नाते रिश्तेदारों और दलालों ने जमकर डुबकी लगाकर कर उस पन्द्रह वर्षो के और खासकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के तेरह साल के शासनकाल को कमलनाथ के 80 दिनों में पीछे छोड़ भ्रष्टाचार का इतिहास मुख्यमंत्री कमलनाथ के खसमखास माने जाने बाले लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने किया इसका प्रभार लोकसभा चुनाव में कितना होगा यह तो चुनाव परिणामों से पता चलेगा। मगर वर्मा ने अपने नेता की स्वच्छ छबि को बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी?
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