लोकतंत्र में मतदाता नहीं अधिकारी बनबाते है सरकार?

0
510

०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। पिछले दिनों राज्य के ग्रामीण एवं विकास मंत्री गोपाल भार्गव के राज्य के मंत्रालय स्थित कक्ष में राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुखर सचिव (एसीएस) राधेश्याम जुलानिया और राज्य के पंचायत सचिव एवं सरपंच संघ के पदाधिकारियां के बीच जिस तरह से एक-दूसरे पर आरोपों का दौर चला, उस दौर में राधेश्याम जुलानिया द्वारा राज्य के पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के मंत्री गोपाल भार्गव एवं लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह के समक्ष जुलानिया और पंचायत सचिव और सरपंच संघ के बीच हुई झड़प के दौरान धरमसिंह परमार (पंच-उपसरपंच संघ के अध्यक्ष, हाथ जोड़कर) जुलानिया से कहा कि भाजपा को मध्यप्रदेश से बाहर मत कर देना तो परमार के सवाल के जवाब में जुलानिया ने कहा कि आपको बहुत बड़ी गलत फहमी है, आपकी वजह से भाजपा सरकार में है, जुलानिया और इन पंचायत प्रतिनिधियों के बीच चली इस बहस के दौरान जुलानिया का यह कहना कि उन जनप्रतिनिधियों को गलत फहमी है कि आपकी वजह से भाजपा सरकार में है पता नहीं लोकतंत्र की प्रक्रिया का सर्वज्ञानी जुलानिया को जानकारी है या नहीं कि लोकतंत्र में जनता का शासन, जनता के लिये ही होता है न कि नौकरशाहों के लिये। लोकतंत्र की प्रक्रिया में मतदाता लोकतंत्र का एक दिन का राजा (मतदाता) होता है और वह यदि नाराज हो गया तो जो काम बुलैट नहीं कर पाती वह अपने बैलेट से कर दिखाता है। प्रदेश की भाजपा के शासनकाल के दौरान जिस प्रकार की कार्यशैली चल रही है उसके चलते पता नहीं क्यों प्रदेश के नौकरशाहों को यह गलत फहमी हो गई है कि उनकी बदौलत भाजपा विगत १३ वर्षों से सत्ता में है और वह यदि चाहेंगे तो भाजपा की सरकार के मुखिया से लेकर भाजपा संगठन से जुड़े नेता जो मिशन-२०१८ का सपना संजोए हुए हैं वह सफल हो पाएगा या नहीं? यह सब प्रदेश के एक दिन केक राजा मतदाताओं पर नहीं बल्कि प्रदेश की नौकरशाही पर ही निर्भर है, पता नहीं जुलानिया को यह गलतफहमी कैसे हो गई कि जिन पंचायत प्रतिनिधियों के साथ हुई बहस के दौरान वह इस तरह के शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। उससे तो उनका अहम उजागर हाता है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार प्रदेश की नौकरशाही के भरोसे ही कायम है न कि प्रदेश के मतदाताओं की बदौलत, खैर मामला जो भी बात जहां तक जुलानिया की है तो पता नहीं जुलानिया में ऐसा क्या है वह जो वह हर किसी के साथ दुव्र्यवहार करने में नहीं चूके फिर वह राज्य का कोई ठेकेदार हो या राजनेता या आम मतदाता, सभी को वह कम आंककर अपने आपको सुपर समझने में लगे हुए हैं जबकि इन्हीं जुलानिया की कार्यप्रणाली के चलते राज्य के इतिहास में मंत्रालय में एक आईएएस अधिकारी जो कि स्वयं (जुलानिया) ही थे कि बदौलत मंत्रालय के कक्ष की कुड़की हुई तो वहीं इन्हीं जुलानिया ाकी कार्यप्रणाली के चलते छतरपुर के एक व्यक्ति के मकान को तोडऩे के बाद सरकार के खजाने से करोड़ों रुपए उक्त मकान मालिक को सरकार की ओर से देना पड़ा तो वहीं जुलानिया की मनमानी के चलते राज्य के कई ठेकेदारों को न्यायालय के आदेश के चलते सरकार को करोड़ों की राशि अदा करनी पड़ी । बात यदि जुलानिया की ईमानदारी की ही रकें तो जिन लोगों के द्वारा जुलानिया की सम्पत्ति के संबंध में सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारियां निकलवाई उनहें देखकर साफ जाहिर हो जाता है कि जुलानिय कितने ईमानदार हैं यदि बात प्रशासनिक स्तर की करें तो इसी हेकड़ी को लेकर जब वह तत्कालीन झाबुआ कलेक्टरी के दौरान श्वेतकारी संगठन के कार्यकर्ताओं के साथ जिस तरह का दुव्र्यवहार किया था और वह मामला वर्षों तक चला और आखिरकार सर्वोच्च न्यायालयक का एक निर्णय के द्वारा जुलानिया के इस तरह की नारिदशाही के खिलाफ सवोच्च न्यायालय का यह आदेश है कि जुलानिया केा किसी भी जिम्मेदार पद पर नहीं रखा जाए खैर जिम्मेदार पद पर रखें या न रखें यह प्रदेश के सत्ताधीशां का अ प ना मामला है लेकिन जुलानिया के कारण आयेदिन राज्य की जो फजीहत हो रही है, उसको लेकर प्रदेा ही नहीं देशभर मं राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों की छवि के बारे में अचछे लोगों की अच्छी राय नहीं है, लेकिन पता नहीं ऐसे वो क्या कारण हैं जिसके चलते जुलानिया लोकतंत्र के उन जनप्रतिनिधियों पर हावी होने का प्रयास करते रहते हैं, तो वहीं दूसरी ओर उन पंचायत से जुड़े प्रतिनधियों को भी जिनकी बदौलत कोई भी सरकार बनती बिगड़ती है। लोकतंत्र की इस प्रक्रिया में उन जनप्रतिनिधियों के साथ भी अभद्र व्यवहार करने में जुलानिया नहीं हिचक रहे हैं, जुलानिया के इस तरह के रवैये को लेकर आम चर्चा यह है कि किसी न किसी इशारे पर राज्य के मंत्रियों, अधिकारियों और पंचायत विभाग से जुड़े जनप्रतिनधियों जो कि भारी संख्या में हैं उन सबकी बेइज्जती करने का जो रास्ता जुलानिया ने चुना है आखिर वह किस और किसके इशारे पर कर रहे हैं औरा कौन इसके पीछे हैं तो मुख्यमंत्री शिवराज के स्वच्छ और पारदर्शी और लोकप्रिय प्रशासन की छवि को बट्टा लगाने का काम कर रहा है।

०००००००००००००

LEAVE A REPLY