लोकतंत्र को न बनाएं मजाकतंत्र

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०-डॉ. वेदप्रताप वैदिक
देश की राजनीति किधर जा रही है? कोई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री को चोर और दललाल कहता है तो सत्तारूढ़ नेता अपने विपक्षी नेताओं को भ्रष्ट, भोंदू, मंदमति आदि क्या-क्या नहीं कह रहे हैं। देश के बड़े-बड़े दलों के नेताओं ने अपनी जुबान बिल्कुल बेलगाम कर दी है। पड़ौसी देशों में चुनावी दंगल होते हैं। वहां भी परस्पर विरोधी दलों के नेता एक-दूसरे के खिलाफ खम ठोकते हैं लेकिन मैले उन्हें कभी इतने नीचे स्तर पर उतरते हुए नहीं देखा। भारत तो दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा देश है। पड़ौसी देश उससे क्या सीखेंगे? इतना ही नहीं, आजकल लोकतंत्र को पलीता लगाने के लिए नया ढर्रा चल पड़ा है। आपके पास सत्ता है तो आप अपने विरोधियों को सभा, प्रदर्शन या जुलूस मत निकालने दो। अभी उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इलाहाबाद विश्वविद्यालय नहीं जाने दिया गया। उन्हें लखनऊ के हवाई अड्डे में जहाज पर चढऩे से पुलिस ने रोक दिया। पुलिस के पास लिखित आदेश भी नहीं था। उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि वे इलाहाबाद विवि के छात्र संघ के शपथ-विधि समारोह मेंशामिल होंगे तो वहां उपद्रव फैल जाएगा। उप्र की सरकार से कोई पूछे कि क्या इलाहाबाद में कोई सरकार नहीं है? अगर है तो उपद्रव फैलाने वालों को रोकने और पकडऩे की जिम्मेदारी उसकी है या नहीं? और अब उपद्रव हुआ कि नहीं? सिर्फ इलाहाबाद और लखनऊ में ही नहीं, कई जगह हो गया। यहां असली डर उपद्रव का नहीं, अपने विरोधी-नेता का होता है। यह डर ममता बनर्जी को भी था। इसलिए उसने भाजपा के अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान और योगी आदित्यनाथ के पश्चिम बंगाल में होने वाले कार्यक्रमों में अड़ंगा लगाया। मजा यह है कि यहां ममता गुरु और योगी चेला बन गए लेकिन गुरु ने चेले की भत्र्सना कर दी। ममता ने अखिलेश का साथ दिया। यह मामला कानून और व्यवस्था का उतना नहीं है, जितना राजनीतिक उठापटक का है। यही काम लालूप्रसाद यादव ने १९९० में लालकृष्ण आडवाणी को पकड़ कर किया था। उप्र के मुख्यमंत्री चौधरी चरणङ्क्षसह ने ऐसी ही धमकी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी दी थी। यह अपने कानूनी अधिकार का शुद्ध दुरुपयोग है। ऐसे मामलों को अदालत में चुनौती दी जानी चाहिए और इस तरह के आदेश जारी करने वालों पर जुर्माना भी ठोका जाना चाहिए वरना आजकल के चुनावी माहौल में कोई भी मुख्यमंत्री शांति और व्यवस्था के बहाने किसी भी नेता को गिरफ्तार कर लेगा। क्या ऐसे काम भारतीय लोकतंत्र को मजाकतंत्र में नहीं बदल देंगे?
०-नया इंडिया से साभार)
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