लाल किताब ने पूरे नहीं किए ख्वाब

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०-संतोष कुमार
मेरे लिए रेल बजट की सबसे बड़ी हेडलाइन यही है- लाल किताब ने नहीं चमकाई टैकस पेयर की किस्मत। बजट से अपने कंधों पर देश का बोझ उठाने वाले नौकरीपेशा शहरी को कुछ नहीं मिला। सिथति यथावत बनती रहती तो चलो बर्दाश्त कर लेता, लेकिन टैक्स की आह-पेट्रोल-डीजल तक जाते-जाते चीख में बदल गई। निर्मला सीतारमण ने पेट्रोल-डीजल के जरिए जो जख्म दिए हैं, उसका दर्द लंबे वक्त तक महसूस होगा। खाने-पीने की हर चीज महंगी होगी।
यकीन हेा तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी लेकर चिराग जलता है
सूटकेस की जगह लाल कपड़े में पिलटे बजट, (जिसे अब बही-खाता कहना है) को पढ़ते हुए वित्त मंत्री ने जब ये शेर फेंका तो सबसे पहले टैक्सपेयर ने ही लपका लेकिन अफसोस उनके लिए निर्मला जी कोई रास्ता नहीं निकाल पाई। बजट से पहले एक्सपर्ट से लेकर आम आदमी तक यही कह रहा था कि प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई सरकार अपने वोटर को धन्यवावद कहेगी, टैक्स में कुछ छूट देगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अंतरिम बजट में जो ऐलान था, वहीं फुलस्टॉप लग गया। आम आदमी को कुछ मला नहीं और खास आदमी सोच रहा है कि हाथ में खास क्यों हुआ। सरकार ने दो करोड़ से ज्यादा आय पर सरचार्ज लगा दिया है। दो-पाँच करोड़ की आय पर तीन फ ीसदी सेस और पाँच करोड़ से ज्यादा की आय पर सात फीसदी सेस का सितम ढाया है। अमीरों पर एक मार और पड़ी है वो ये कि साल भर में बैंक से एक करोड़ से ज्यादा कैश निकाला तो २.५ प्रतिशत टीडीएस लगेगा। वैसे जिनकी जेब में कुछ मोटी गड्डियां नहीं आ रहीं उनके लिए खबर है कि एक, दो पाँच, दस बीस के नए सिक्के आ रहे हैं। बजट से आम आदमी को सबसे बड़ा झटका ये लगा कि पेट्रोल-डीजल दो रुपए प्रति लीटर महंगे हो गए हैं। तेल खरीदने वालों के साथ तो खेल हुआ ही, लेकिन डीजल का डंक सबको सताएगा। डीजल महंगा होने पर माल ढुलाई महंगी होगी और खाने-पीने की हर चीज महंगी हो जाएगी। यानी बजट के बंडल में महंगाई की छड़ी छिप कर आई है।
अब अपना घर हो जाए
बहुत आहत हो गए हैं तो राहत की बात भी सुन लीजिए। ४५ लाख तक का मकान लेने पर ३.५ लाख तक के होमलोन ब्याज पर आयकर नहीं लगेगा। एक अच्छी बात ये भी हुई है कि होमलोन देने वाली वित्तीय कंपनियों पर अब आरबीआई का कंट्रोल रहेगा। यानी ठगी की संभावना कम होगी। आने वाले जमाने में सार्वजनिक उपक्रमों की जमीनों पर बने सस्ते घरों के रूप में आपके आशियाने का ख्वाब पूरा हो सकता है। कारोबारियों के लिए बजट में कुछ अच्छी बातें हैं। इस जगत के लिए सबसे बड़ी हेडलाइन ये है कि कॉरपोरेट टैक्स में बंपर राहत दी गई है। अब २५० करोड़ की जगह ४०० करोड़ के टर्नओवर तक की कंपनियों पर २५ प्रतिशत टैक्स ही देना होगा। इस टर्नओवर में देश की ९९ फीसदी कंपनियां आ जाती हैं। कारोबार शुरू करना है तो एंजल टैक्स से छुटकारा दे दिया गया है। इनके लिए दूरदर्शन पर प्रोग्राम भी दिखाए जाएंगे। कहा गया है- छोटे कारोबारियों को आसानी से कर्ज दिलाने की कोशिश की जाएगी। इन्हें लोन पर ब्याज में दो प्रतिशत छूट देने के लिए ३५० करोड़ का फंड भी रखा गया है। कराहते छोटे कारोबारी के दुख इन उपायों से दूर होंगे या नहीं, ये वक्त ही बताएगा। महिलाओं को उनके जनधन खातों में पाँच हजार रुपए का ओवरड्राफ्ट यानी एक तरह का कर्ज दिया गया है। युवाओं के लिए नई शिक्षा नीति लाने की बात कही गई है। टॉप संस्थानों के लिए ४०० करोड़ का प्रावधान किया गया है। रोजगार के लायक बनाने के लिए एक करोड़ छात्रों के लिए स्किल योजना का ऐलान किया गया है। खेलों में भारत योजना का विस्तार होगा। बजट का बड़ा जोर गांवों पर है। २०२२ तक १.९५ करोड़ घर और हर घर में बिजली, शौचालय और गैस कनेक्शन देने की योजना है। ग्रामीण इलाकों में १.२५ लाख किलोमीटर सड़क बनाने का इरादा है। पुराना वायदा फिर दोहराया गया है- २०२२ तक किसानों की आय दोगुनी।
बैंकों की बड़ी बीमारी, बड़ी दवा
सरकारी बैंक खराब होते लोन के फेर में फंसे हैं। उन्हें ७० हजार करोड़ की पूंजी देने का ऐलान हुआ है। लेकिन इतेनसे इनका दर्द कम होगा, हक नहीं सकते। सरकारी बैंकों को आंशिक के्रेडिट गारंटी भी दी जाएगी दस फीसदी की।
एविएशन, पावर और इन्फ्रा
बजट में देश को एविएशन हब बनाने की मंशा जाहिर की गई है। एक देश, एक ग्रिड की बात हे। यानी सभी राज्यों को एक नेशनल ग्रिड से बिजली देने की येाजना है। एक गैस ग्रिड बनाने की भी प्लान है। पावर सेक्टर के दर्द की दवा के लिए टैरिफ पैकेज का ऐलसान िकया गया है। इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सरकार पाँच साल में १०० लाख करोड़ का निवेश करना चाहती है। यानी हर साल २० लाख करोड़। एक बड़ा ऐलान ये हुआ है कि दिल्ली मेरठ के बीच मेट्रो चलाई जाएगी। रेलवे में निजी निवेश लाने की योजना है।
०-सुबह सवेरे के कालम ”प्रसंगवश” से साभार)
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