राहुल का लक्ष्य मोदी को हराना या सीटें बढ़ाना?

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा गलती कर रहे हैं। ये नरेन्द्र मोदी को जितवाने वाली शतरंज बिछा रहे हैं। मतलब ये उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र प्रदेश में कांग्रेस की ताकत जाया करेंगे, जिससे नरेन्द्र मोदी-अमित शाह की सीटें बढ़ेंगी। तथ्य को जानें (राहुल-प्रियंका भी इस तथ्य की अनदेखी किए हुए होंगे) कि राहु और प्रियंका की पहली प्राथमिकता यदि नरेन्द्र मोदी को हराना है तो उन्हें इन ढाई सौ सीटों पर ताकत झोंकनी चाहिए जहां भाजपा से कांग्रेस (एलांयस सहित) का सीधा मुकाबला है और जिनमें २०१९ में भी मोदी-शाह को सर्वाधिक सीटों की उम्मीद है। हां, राहुल और प्रियंका कांग्रेस गलती करेंगे, जो मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, असम, तेलंगाना, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गोवा की ११३ सीटें जीतने के लिए अपने को हनीं झोंकेंगे। ये वे दस राज्य हैं, जहां की ११३ लोकसभा सीटों पर राहुल-प्रियंका पूरा फोकस करें तो मोदी-शाह एक-चौथाई सीट नहीं जीत सकते जबकि २०१४ में इनमें सौ से ऊपर भाजपा जीती थी। फिर महाराष्ट्र, झारखंड, कर्नाटक, बिहार की १३९ सीटें हैं, जहां कांग्रेस एलायंस में है। इन राज्यों में भी राहुल-प्रियंका को पूरी ताकत लगानी चाहिए ताकि मोदी-शाह को लेने के देने पड़ें। इसके बावजूद कांग्रेस में दम लगाने से जीत सकने वाली बनती है। सो, कांग्रेस के लिए करो-मरो वाली २६९ सीटें हैं। क्या २६९ सीटें कम हैं? इन्हीं पर राहुल-प्रियंका को चौबीसों घंटे अपने को झोंकना चाहिए। मगर इनकी बजाय प्रियंका को बनारस, रायबरेली से नहीं बल्कि छिंदवाड़ा या अजमेर या महाराष्ट्र की मजबूत सीट से चुनाव लडऩा चाहिए ताकि प्रदेश विशेष की सभी सीटों पर हवा बने। कांग्रेस के कोर इलाके में हवा, आंधी वाला नेरेटिव व घमासान हो। जाहिर है राहुल गांधी की भारी गलती है जो यूपी के लिए प्रियंका और ज्योतिरादित्य सिंधिया को तैनात करके मैसेज दिया कि कांग्रेस को यूपी में करो-मरो करना है। इससे निश्ििचत हीयूपी में विपक्ष के वोट बटेंगे ओर अमित शाह का ४५ सीट जीतने का टारगेट सधेगा। हां, कांग्रेस और पूरे विपक्ष को जान लेना चाहिए कि मोदी-शाह की रणनीति में सर्वाधिक उम्मीदें उत्तर प्रदेश, बंगाल, बिहार, पूर्वोत्तर और महाराष्ट्र ासे हैं। और ये गलत नहीं है क्योंकि इन राज्यों में मोदी-भाजपा विरोधी वोट बटेंगे। यूपी में सपा-बसपा का एलायंस अलग लड़ेगा तो कांग्रेस अलग लड़ेगी। बंगाल मेंममता अलग लड़ेंगी तो कांग्रेस और लेफ्ट अलग-अलग लड़ेंगे। राहुल गांधी ने प्रियंका, ज्योतिरादित्य सिंधिया को यूपी में उतार कर फ्रंट फुट से लडऩे की थीसिस दी है और कांग्रेसी नेताओं का तर्क है कि यदि पार्टी ने वहां गंभीरता से चुनाव नहीं लड़ा तो क्या पार्टी वहां खत्म हो जाए? अपनी जगह यह दलील सामान्य हालातों, देश में सहज-सामान्य राजनीति में वाजिब है लेकिन राहुल-प्रियंका-विपक्ष के लिए २०१९ का चुनाव अंतिम चुनाव समान है। इसलिए कि यदि मई २०१९ में नरेन्द्र मोदी ने दो सौ सीटें जीत लीं तो वे फिर साम-दाम-दंड-भेद से न केवल राष्ट्रपति कोविंद से अपनी शपथ करवाएंगे, बल्कि धनबल-बाहुबल से क्षत्रों का जुगाड़ करके सतत बना कर फिर कांग्रेस, विपक्ष का जो करेंगे तो वह राहुल-प्रियंका-सोनिया-विपक्ष और लोकतंत्र के लिए अंतिम ही बनेगा। हां, सबसे बड़े दल के नाते मोदी येन केन प्रकारेण शपथ लेंगे। बहुमत न होने के बावजूद वे कोविंद के हाथों शपथ लेंगे। क्या इसका राहुल, प्रियंका या मामता, मायावती, अखिलेश आदि ने अनुमान लगाया हुआ है? शायद नहीं। येसब नेता इस गलतफहमी में आ गए हैं कि नरेन्द्र मोदी तो हर रहे हैं, वापिस प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे। इसलिए मौका है जो फ्रंट फुट से चुनाव लड़ अपनी सीटें बढ़ाएं। इस सोच को कांग्रेस से अधिक हवा मिली है। प्रियंका गांधी के लांच होने के बाद मीडिया और कांग्रेसजनों ने फिजूल, आत्मघाती हल्ला बनाया है कि अब वे आई हैं तो यूपी में कांग्रेस कमाल दिखाएगी। ऐसा नहीं होगा। उलटे यूपी में मोदी विरोधी वोटों में इतना कंफ्यूज बनेगा कि विपक्षी फूट का फायदा उठा कर मोदी-शाह ३५ से ४५ सीटें जीत लेंगे। कांग्रेस भले दस सीटें जीत जाए पर बसपा-सपा २०-२० सीटें जीत जाए लेकिन भाजपा ३० सीटें कम से कम जीतेगी जबकि यदि सपा-बसपा-कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ें या कांग्रेस दिखावे का चुनाव लड़े तो भाजपा दस सीटों से नीचे जा सकती है। इससे भी अधिक समझने वाली बात है कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, असम, तेलंगाना, उत्तराखंड, झारखंड, कर्नाटक, बिहार की १३९ और हरियाणा व दिल्ली की १७ सीटों सहित कुल २६९ सीटों पर पूरा फोकस बना कर राहुल-प्रियंका-कांग्रेस यदि चुनाव लड़ें तो इन्हीं में से कांग्रेस को १५० सीटें मजे से मिल सकती हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रियंका गांधी यदि मध्यप्रदेश, राजस्थान पर ही फोकस करें, खुद दोनों इन राज्यों में किसी एक सीट पर चुनाव लड़ें या राहुल गांधी भी अमेठी की बजाय इन २६९ सीटों में कहीं से चुनाव लड़ें तो कांग्रेस की उस प्रदेश विशेष में हवा बनेगी। मध्यप्रदेश की २९ या राजस्थान की २५ सीटों में राहुल, प्रियंका के लिए कांग्रेस की दो-तिहाई से ज्यादा सीटें जिताना आसान है जबकि यूपी में आठ-दस सीटें जीतना भी मुश्किल है। मतलब प्रियंका गांधी को राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र में घूमना चाहिए न कि यूपी में अपने को जाया करना चाहिए। हां, मोदी-शाह गुजरात में सभी २६सीटें, मध्यप्रदेश में २२, राजस्थान में २० सीटें जीतने के ख्याल व तैयारियों में हैं। यों ऐसा नहीं होगा लेकिन यह भी लग रहा है कि मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार होते हुए भी कांग्रेस पचास-पचास फीसदी सीटें जीतने से अधिक का आत्मविश्वास लिए हुए नहीं है। मगर यदि राहुल-प्रियंका के इन्हीं राज्यों में फोकस देने, दौरों जनसभाओं, खुद उम्मीदवार बनने का ऐलान हो, माहौल बने तो मध्यप्रदेश, राजस्थान, में भाजपा को पांच-पांच सीटें जीतने के भी लाले पड़ेंगे। मोदी-शाह के लिए कांग्रेस से सीधे मुकाबले की २६९ सीटों पर प्रियंका गांधी की सभाएं, राहुल का चौकीदार चोर का हल्ला ज्यादा मारक हो सकता है बनिस्बत यूपी, बंगाल, आंध्र आदि में घूमना या समय जाया करना क्या नहीं?
हरिशंकर व्यास०-(नया इंडिया के कालम ”अपन तो कहेंगे!’ से साभार)
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