राजनीति ने समर्थक को भक्त में बदल दिया

0
13

०-रविश कुमार
उसका सीना ५६ इंच का तो नहीं मगर उम्र ५६ साल है। वह कंगाल हो चुका है। कंगाल होने से पहले कपड़े उतारकर नृत्य करता था। जिम में शरीर को बलशाली बनाती रहा। वह सफल होना चाहता था, फुटबाल पसंद करता था मगर असफलता ने उसका दाम नहीं छोड़ा। असफलता ने उसके अच्छे शरीर को भीतर से खोखला कर दिया। वह राष्ट्रपति टं्रप का समर्थक बनने लगा। उनमें पिता को देखने लगा। धीरे-धीरे वह अपने लिखने बोलने के स्पेस में सामान्य से कट्टर समर्थक बदलने लगा। ट्रंप का समर्थन उसके लिए सफलता तब भी नहीं लाई। वह घर बेचकर चैन से रहने लगा। वैन के चारों तरफ कई स्ट्रीकर लगे हैं। वह ट्रंप का समर्थक है और उनके विरोधी को अपना शत्रु समझता है। इन स्ट्रीकर को देखने पर आपको भारतीय वाट्सएप यूनिवर्सिटी की मीम की याद आ जाएगी। इन तस्वीरों पर डेमोक्रेट का मजाक उड़ाया गया है। उन्हें मार देने के प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है। वैन पर ट्रंप के सवाल करने वाले मीडिया को बेईमान मीडिया लिखा है। सीएनएन को निशाना बनाया है। ट्रंप की रैलियों में सीएनएन के खिलाफ बैनर लेकर दिखाता था। इसका वीडियो भी मिला है। वैन के बाहर छपे ये स्ट्रीकर और उनकी सामग्री उसके दिमाग में भर गई है। वह जहर से भरा हुआ एक इंसान है, जो अपनी गरीबी को भूल ट्विटर और फेसबुक पर ट्रंप विरोधियों के प्रति नफरत की आग उगलता है। इसका नाम है सीजर सायोक। जिसे बाहर लोगों को चौदह बम भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ट्रंप ने उसे लेकर जांच एजेंसी की तारीफ की है लेकिन सीजेर केराजनीतिक पक्ष को उभारने के लिए मीडिया पर जमकर हमला बोला है। रिपब्लिकन पार्टी की राजनीति ने समर्थक को भक्त में बदल दिया है। उसके भीतर नफरत की बातों से एक झूठे गौरव का भाव भर दिया है। इसलिए वह अपने हालात की बेहतरी छोड़ फिर से अमेरिका को महान बनाना चाहता है जैसे भारत को विश्व गुरु बनाने वाले बातें करते हैं। भारत में कई मामलों में बनी भीड़ ऐसे ही लोगों से बनी था मगर इनके बारे में ऐसा डिटेल सामने नहीं आया। किसी ने प्रयास भी नहीं किया। सीएनएन ने सीजर की वैन की खिड़की पर चिपके स्ट्रिकर को लेकर गंभीर विश्लेषण किया है। हर स्ट्रिकर के डिटेल की चर्चा हुई है। मैंने अपनी किताब में द फ्री वॉइस में एक चैप्टर रोबो रिपब्लिक के बारे में लिखा था कि कैसे गलत इमोशन और फैक्ट फीड कर इंसान के ‘होनेÓ (बिलाँगिंग) को अतीत में शिफ्ट कर दिया गया है। उसकी कल्पना में हिन्दू राष्टश् आ गया है और वो उसका वास्तविक नागरिक समझता है। बहुत सारे लोगों को झूठ और नफरत से प्रोग्राम्ड कर दिया गया जिन पर किसी भी सत्य या तथ्य का असर नहीं होता है। ये लोग कभी भी किसी फ्री बात से अपने आप ट्रिगर हो सकते हैं। और लिंच मॉब में बदल कर लोगों को मार देते हैं। मरने वालों में ज्यादातर मुस्लिम होते हैं जिनके बारे में अनगिनत प्रकार की नफरत भर दी गई है। वो गाय, पाकिस्तान, कश्मीर, बांग्लादेश, आबादी का नाम सुनते हुए अपेन सह-नागरिक मुस्लिम को दूसरी निगाह से देखने लगते हैं। उनके भीतर कुछ ट्रिगर हो जाता है। जब लिंच मॉब बनकर हत्या नहीं करते हैं, तब वे नफरत की बातों को लिखकर विरोधियों के मारने की बात कर मनमाफिक अभ्यास कर रहे होते हैं। ये लोग इतने प्रोग्राम्ड हो चुके हैं कि नौकरी नहीं है या बिजनेस डूब गया है इन बातों का कोई असर नहीं पड़ता है। इनके लिए राजनीति और सत्ता अपनी बेहतरी के लिए नहीं बल्कि दूसरों से नफरत करने, मार देने और उन पर विजय प्राप्त करने का साधन हो गई है। समस्या इस भीड़ की है। अमेरिका में जो पकड़ा गया है वह एक रोबोट है। ऐसे कई रोबोट तैयार हो चुके हैं। भारत में ऐसे रोबोट बन चुके हैं जिनके भीतर मेरा पोस्ट देखते ही कुछ ट्रिगर होता है। बिना पढ़े और समझे वे इनबॉक्स और कमेंट बॉक्स में गाली देने चले आ जाते हैं। रोबो रिपब्लिक का प्रोजेक्ट रोज गड़ा हो रहा है। अमित शाह ने कहा था कि यूपी में ३२ लाख वाट्सएप के ग्रुप बनाए हैं। इनमें ऑनआफिशियल कुछ होता है, अनऑफिशियल कुछ और होता है। ऐसे अनगिनत ग्रुप में अलग-अलग संगठनों के नाम से इन समूहों में धर्मान्धता की बातें फैलाई जाती रहती हैं। सोचिए तीन करोड़ से अधिक लोग वाट्सएप यूनिवर्सिटी में झूठ और नफरत की मीम पढ़ रहे हैं। खुद को प्रोग्राम्ड होने दे रहे हैं। कई राज्यों में न जाने कितने करोड़ लोग वाट्सएप यूनिवर्सिटी केक इस जहर का नशा ले रहे हैं, इंतजार कीजिए अमित शाह खुद ही किसी साइबर सेल की कार्यशाला में बता देंगे। भाजपा के समर्थक और कार्यकर्ता पहले भी थे मगर वे सामान्य राजनीतिक प्राणी थे। सहमति-असहमति को समझते थे लेकिन इस वक्त वाट्सएप मीम से प्रोग्राम्ड लोग इन समर्थकों से काफी अलग हैं। अब भी समझ नहीं आ रहा तो आप बिल्कुल उन्हीं प्रोग्राम्ड हो चुके लोगों में से है। आइये अब ट्रिगर हो जाइये और मुझे गाली देना या कुछ ऐसा बकना शुरू कीजिए जिसका मेरी पोस्ट से कोई लेना देना नहीं है।
०- लेखक एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार हैं
०००००००००००००००००

LEAVE A REPLY