“राजधानी पुलिस बिकती है बोलो खरीदोगे”

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०-सतेन्द्र सिंह भदौरिया
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। अंडरवल्र्ड डॉन अबू सलेम के पासपोर्ट प्रकरण के कारण दुनिया में बदनामी होने के बावजूद भोपाल पुलिस का रवैया नहीं बदला है। अभी पिछले महीने 26 दिसम्बर को राजधानी की मंगलवारा थाना पुलिस फर्जी पासपोर्ट बनवाने के जुर्म में 10 साल की सजा काटकर जेल से बाहर आए पाकिस्तानी नागरिक इमरान वारशी को बाघा बार्डर छोड़कर आई थी और अब टीटी नगर थाना पुलिस की क्लीनचिट पर शहर के गुंडा लिस्ट में शामिल एक कुख्यात अपराधी का पासपोर्ट जारी कर दिया गया है। चर्चा है कि कुख्यात को पुलिस वेरीफिकेशन में क्लीनचिट देने के लिए दो लाख रुपए में सौदा हुआ था, लेकिन रकम बंटवारे में मन-मुताबिक हिस्सा नहीं मिलने पर थाने के मुंशियाने से खबर लीक हो गई। मामला उजागर हुआ तो पुलिस के आला अफसर जांच प्रक्रिया की आड़ में बचने की जुगत में लग गए हैं।

०-कर दिया संभ्रात नागरिक घोषित:-

जी हां, चौकिंए नहीं। राजधानी में पैसा फेंकिए और तमाशा देखिए। पैसे के बदले बिकने को तैयार भोपाल पुलिस की कार्यशैली को समझने के लिए यह उदाहरण काफी हैं। टीटी नगर थाने की गुंडा लिस्ट में शामिल बदमाश करण सिंह उर्फ लालू के संगीन मामलों को नजरअंदाज करते हुए पुलिस वेरिफकेशन में एक संभ्रात नागरिक घोषित कर दिया। एनएसए और जिलाबदर हो चुके कुख्यात बदमाश करण सिंह उर्फ लालू पिता हयात सिंह पर हत्या के प्रयास, छेड़छाड़, घर में घुसकर मारपीट, घर में घुसकर महिलाओं से छेड़छाड़, आम्र्स एक्ट, उपद्रव, बलवा जैसे आइपीसी के करीब दो दर्जन अपराध और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के आधा दर्जन से अधिक अपराध दर्ज हैं।

०-पीवीआर में लगा दो माह का वक्त:-

सूत्रों की मानेें तो करण उर्फ लालू ने जे-187 जनता कॉलोनी हर्षवर्धन नगर के पते पर सितम्बर 2018 में पासपोर्ट के लिए एजेंट के जरिए ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन के बाद पुलिस वेरीफिकेशन (पीवीआर) में टीटी नगर थाने ने करीब दो महीने का वक्त लिया। अमूमन राजधानी भोपाल में महज तीन से सात दिन में पुलिस वेरीफिकेशन हो जाता है। लेकिन वेरीफिकेशन में दो महीने का वक्त लगने के पीछे की कहानी साफ नजर आती है। बदमाश का पासपोर्ट नवम्बर 2018 में बनकर जारी हो गया। बदमाश करण उर्फ लालू को क्लीनचिट के साथ जारी हुए पासपोर्ट का नंबर (एस-8093655) है। पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक बदमाश पर एक भी अपराध दर्ज नहीं है। राजधानी पुलिस पैसों के आगे कुछ भी कर सकती है, यह इस प्रकरण में जाहिर हो गया।

०-इन्होंने कहा:-

इस प्रकरण के संबंध में यदि नियम विरुद्ध कुछ किया गया है, तो संबंधित पर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। जांच में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
धमेन्द्र चौधरी, डीआइजी भोपाल शहर

अमूमन पासपोर्ट ऑनलाइन करने के लिए पांच ऑप्सन आते हैं, जिनमें पुलिस वेरीफिकेशन रिपोर्ट में भरी जाती है। इन पांच ऑप्सन में क्या रिपोर्ट भरी गई है। कितने मामलों में वह बरी हुआ है, कोर्ट ने क्या आदेश दिए हैं। यह जांच का विषय है। कानूनन देखा जाए तो हार्डकोर क्रिमिनल का पासपोर्ट जारी नहीं हो सकता।

धर्मवीर यादव, एसपी हेडक्वार्टर

जिसका भी पासपोर्ट बना है, वह पुलिस वेरीफिकेशन के बाद ही बना होगा।

आलोक श्रीवास्तव, टीआई टीटी नगर

राजधानी में बैठकर इस तरह की लापरवाही कहीं न कहीं सवालिया निशान खड़े करती है। जो बदमाश थाने की गुंडा लिस्ट में शामिल है, जिला बदर एनएसए हो चुका है। उसका रिकार्ड तो थाने के साथ (डीएसबी) स्पेशल ब्रांच में भी होगा। थाना स्तर पर लापरवाही हुई, फिर डीएसबी ने क्या देखा।

एससी त्रिपाठी, रिटायर्ड डीजीपी

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