युवाओं का दिल जीत फतह का रास्ता खोजेंगे शिवराज

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०- अरुण पटेल

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान युवाओं से संवाद के माध्यम से युवाओं का दिल जीतकर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात कार्यक्रम की तर्ज पर आकाशवाणी से ‘दिल से कार्यक्रम के द्वारा माह में एक बार प्रदेशवासियों से संवाद का सिलसिला प्रारंभ करने जा रहे हैं जिसका मकसद 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव में फतह का रास्ता खोजने की दिशा में आगे बढऩा है। ‘दिल से कार्यक्रम के माध्यम से वे विभिन्न मुद्दों पर जनमानस से रूबरू होंगे। जहां एक ओर कांग्रेस को प्रदेश में शिवराज के मुकाबले के लिए एक अदद चेहरे की तलाश है तो वहीं अब दूसरी ओर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ का मानना है कि किसी एक चेहरे से सफलता नहीं मिल सकती बल्कि सबको मिलकर लडऩा होगा, तभी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीत पायेगी। कांग्रेस अभी चेहरे को लेकर अनिर्णय और उहापोह की स्थिति में है तो वहीं भाजपा 200 से अधिक विधानसभा की सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ चुनावी समर में उतरेगी और उसका चेहरा शिवराज सिंह चौहान ही होंगे। ऐसा प्रस्ताव प्रदेश भाजपा की कार्यकारिणी में पारित हो चुका है।

शिवराज की राजनीति हमेशा सामाजिक सरोकारों से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों से रिश्ते और संवाद बनाने की रही है। विधानसभा चुनाव में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभायेंगे इसलिए उनकी कोशिश अब यह होगी कि नए बने मतदाताओं व अन्य युवाओं के बीच किस ढंग से भाजपा के प्रति रुझान पैदा किया जाए। भारत छोड़ो आंदोलन की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर युवा संवाद का आयोजन हो रहा है जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान युवा पीढ़ी में स्वतत्रता आंदोलन की स्मृति को संजोये रखने की दृष्टि से संवाद करेंगे। जिला मुख्यालयों पर भी युवा संवाद के कार्यक्रम होंगे। नौ अगस्त को राजधानी भोपाल में शौर्य स्मारक पर सायंकाल 6 बजे शिवराज युवाओं से संवाद करेंगे जिसका दूरदर्शन व आकाशवाणी के सभी केंद्रों व एफएम चैनलों से सीधा प्रसारण किया जाएगा। शिवराज का कहना है कि भारत छोड़ो आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण संघर्ष था। इस आंदोलन ने ब्रिटिश राज से मुक्ति के लिए पूरे देश को संकल्पित कर दिया था। हमारी युवा पीढ़ी इस गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर सशक्त भारत के निर्माण में सहभागी बने। युवाओं से संवाद का सिलसिला एक दिन का न होकर आगे भी चलता रहेगा और विभिन्न आयोजनों और कार्यक्रमों के तहत समय-समय पर शिवराज युवाओं से संवाद करते रहेंगे। यह सिलसिला प्रदेश के अन्य स्थलों पर भी जारी रहने की संभावना है। इससे जहां सीधे-सीधे युवा मानस को समझने की कोशिश होगी वहीं उनके मन में अपने नजरिए की भी छाप छोड़ी जाएगी।

प्रदेश में 14 से 19 अगस्त तक इंडिया यूथ समिट का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन इंडिया फाउंडेशन, केंद्रीय खेल एवं युवा कल्याण मंत्रालय और मध्यप्रदेश सरकार संयुक्त रूप से करने जा रही है। इसकी व्यवस्थाओं का जायजा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने ले लिया है। इस आयोजन में भारत के साथ ही सिंगापुर, मलेशिया, फिलीपीन्स, थाईलैंड, कम्बोडिया, म्यांमार, वियतनाम सहित कई देशों के युवा प्रतिनिधि भाग लेंगे। इसमें मूल्यों और परम्पराओं के आदान-प्रदान के साथ ही एक लक्ष्य भी तय किया जाएगा। इसके उद्घाटन सत्र में कई देशों के युवा प्रतिनिधियों से संवाद करने का अवसर शिवराज को मिलेगा। इस आयोजन के माध्यम से प्रदेश का माहौल भी युवामय हो जाएगा। इसके बाद युवाओं से संवाद का सिलसिला किसी न किसी रूप में आगे भी जारी रहेगा ताकि उनका दिल शिवराज जीत सकें और युवा मानस में उनकी छवि सामाजिक सरोकारों के पैरोकार के रूप में अंकित हो सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात कार्यक्रम पूरे देश में काफी लोकप्रिय रहा है उसी की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह आकाशवाणी से ‘रमन की गोठ कार्यक्रम के माध्यम से माह में एक बार अपने मन की बात और अपनी योजनाओं की जानकारी राज्य के लोगों को देते हैं। तेरह अगस्त को शिवराज सिंह चौहान भी आकाशवाणी से ‘दिल से कार्यक्रम प्रारंभ करने जा रहे हैं। पहली कड़ी के बाद माह में एक बार वे अपने दिल की बात प्रदेशवासियों के सामने रखेंगे। लोगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार व्यक्त करेंगे और सरकार की प्राथमिकताएं भी बतायेंगे। इस प्रकार मतदाताओं से सीधे संवाद का एक सेतु यह भी होगा। देखने की बात यह रहेगी कि यह कार्यक्रम मोनो डायलॉग बनकर रह जाता है या लोगों द्वारा यदि कुछ पूछा जाता है तो उसका समाधानकारक उत्तर उन्हें मिलता या नहीं।

कांग्रेस को लम्बे समय से प्रदेश में एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो शिवराज का मुकाबला कर सके और उनके आभामंडल को निस्तेज करते हुए 2018 के विधानसभा चुनाव में फतह प्राप्त कर पन्द्रह साल जारी वनवास को समाप्त करा सके। इस मामले में कांग्रेस के सामने केवल दो ही चेहरे हैं एक कमलनाथ और दूसरा ज्योतिरादित्य सिंधिया। लेकिन आलाकमान अभी तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं कर पाया और अनिर्णय के चलते ही लगता है कि अब दावेदारों को भी यह भरोसा होने लगा है कि किसी एक चेहरे पर दाँव लगाने की जगह कांग्रेस चुनाव बाद विधायक दल का नेता चुनने की अपनी पुरानी लीग पर ही चलना चाहती है। कमलनाथ का कहना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में किसी एक चेहरे से सफलता नहीं प्राप्त हो सकती सबको एकसाथ मिलकर लडऩा होगा तभी पिछले 14 वर्षों से मध्यप्रदेश में फलते-फूलते भ्रष्टाचार को समाप्त किया सकेगा। उनके कहने का अर्थ यह है कि किसी एक चेहरे को सामने कर जीत की इबारत नहीं लिखी जा सकती। कमलनाथ का यह भी कहना है कि प्रदेश में पूरी अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है, बेरोजगारी बहुत ज्यादा है, इसलिए बदलाव के लिए सबको एक साथ मिलकर संघर्ष करना होगा।

जिस प्रकार भाजपा ने 2003 के विधानसभा चुनाव पूर्व तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को “मिस्टर बंटाढार निरूपित कर कांग्रेस के विरोध में जनमानस तैयार किया था उसी प्रकार कमलनाथ ने शिवराज को “घोषणावीर मुख्यमंत्री का तमगा दिया है। वैसे प्रदेश भाजपा के एक बड़े नेता रघुनंदन शर्मा ने शिवराज को पूर्व में “घोषणावीर कहा था लेकिन वह बात काफी पुरानी हो गई है, अब नए संदर्भों में इसके सहारे शिवराज की घेराबंदी करने का कांग्रेस ने मन बना लिया है। जहां तक चेहरा सामने करने का सवाल है ज्योतिरादित्य सिंधिया कई माहों से लगातार कह रहे हैं कि एक चेहरा सामने कर चुनाव लडऩा जरूरी है लेकिन इसके साथ ही वे यह भी कहते हैं कि कोई अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर पायेगा बल्कि सबको मिलकर एक रोड-मैप तैयार कर चुनावी समर में जाना होगा। कमलनाथ और उनके विचारों में कोई अधिक अन्तर नहीं है बल्कि दोनों का ही यह मानना है कि एकजुट कांग्रेस ही शिवराज का मुकाबला कर पायेगी। अगस्त माह के द्वितीय सप्ताह में होने जा रहे शहरी निकाय चुनाव के नतीजे यह बतायेंगे कि कांग्रेस केवल नकारात्मक मुद्दों के सहारे जनमानस का दिल जीत पायेगी या नहीं। यदि इन चुनावों में कांग्रेस को पूर्व की तुलना में अच्छी सफलता नहीं मिली तो फिर उसे नकारात्मक मुद्दों को छोड़कर सकारात्मक कार्यक्रमों के सहारे जनता के सामने जाना होगा, जैसा कि कई मर्तबा ज्योतिरादित्य सिंधिया कह चुके हैं कि हमें एक वैकल्पिक व सकारात्मक कार्ययोजना भी मतदाताओं के सामने प्रस्तुत करना होगी।
०- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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