यह है भाजपा के महिला सशक्तिकरण की हकीकत

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। भारतीय जनता पार्टी हमेशा महिलाओं को आगे बढ़ाने से लेकर उन्हें अपनी पार्टी में अधिक प्रतिनिधित्व देने का दावा करती रहती है तो वहीं महिला सशक्तिकरण की जितनी दुहाई भाजपा देती है उसकी हकीकत इस चुनावी समर में दिखाई दे रही है। तो वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के १३ वर्षों में जितनी महिलाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं इस बात का संकेत देती हैं कि भाजपा महिलाओं की कितनी हितैषी है, भले ही भाजपा के विज्ञापनों और भाजपा नेताओं के श्रीमुख से निकले वचनों में महिलाओं के हितैषी होने का दावा किया जाता रहा हो लेकिन वहीं दूसरी ओर हकीकत यह भी है कि भाजपा महिलाओं के प्रति जरा भी जागरूक नहीं है बात यदि शिवराज के १३ वर्षों के शासनकाल की करें तो उनके शासकाल में साल दर साल महिलाओं ही नहीं अबोध बालिकाओं के साथ दुष्कर्म की घटनाएं घटित हुई लेकिन भाजपा जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दुहाई देती है वह उनकी सुरक्षा के लिये कोई पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाई तो वहीं दूसरी ओर महिला सशक्तिकरण के ढिंढोरे के साथ हमारा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सपनों का स्वर्णिम मध्यप्रदेश महिलाओं के दुष्कर्म के मामले में अव्वल रहा है।

दुष्कर्म और असुरक्षा की बात करें तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की माताश्री के गले से चेन तक खींचे जाने की घटना राजधानी में होना यह दर्शाती है कि जिस मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के महिलाओं की सुरक्षा के लाख दावे करते लेकिन उन्हीं की माताश्री उनके ही राज्य में सुरक्षित नहीं रह सकी और बदमाश उनके गले से चैन खींच भागे तो वहीं शिवराज सरकार में एक ओर जहां बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का भी खूब ढिंढोरा पीटा गया तो वहीं उनकी ही पार्टी के एक संगठन से जुड़े नेता द्वारा ऑनलाइन देह व्यापार का कारोबार भी धड़ल्ले से चलाया गया। इस घटना से भाजपा के नेताओं की महिलाओं के प्रति सोच का खुलासा होता है, महिलाओं को बढ़ावा नहीं देने की यही सोच इस चुनावी समर में भी दिखाई दिया। जिसमें भले ही उम्र का तकाजा का बहाना कर बुंदेलखण्ड के पन्ना की वह भाजपा नेत्री कुसुम मेहदेले जिन्होंने वर्षों से भाजपा के लिये बहुत कुछ किया तो वहीं उस बुन्देलखण्ड में जहां सामंती साम्राज्य से जुड़े लोगों का कांग्रेस में वर्चस्व होने के बावजूद भी भाजपा को कुसुम मेहदेले ने पन्ना में भाजपा का झण्डा बुलंद किया उन्हीं कुसुम मेहदेले को उम्र के मापदण्ड के बहाने चुनावी समर में न उतारा हो, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या कुसुम मेहदेले की तरह उन राजमाता स्वर्गीय विजयराजे सिंधिया जिन्होंने अपने जेवर बेचकर भाजपा को उस समय ताकत दी जब वह जनसंघ के रूप में सक्रिय थी उस समय बुंदेलखण्ड में ही नहीं पूरे देश में जनसंघ को हर तरह से मदद की और आज उन्हीं राजमाता की बदौलत भाजपा इस मुकाम पर है कि वह देश के कई राज्यों में शासन कर रही है उन्हीं राजमाता के परिजन माया सिंह को टिकट न देने को लेकर भी भाजपा की कथनी, करनी को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं कि तो वहीं भाजपा के नेता यह कहते भी नजर आ रहे हैं कि जिन राजमाता की त्याग, तपस्या और उनके सहयोग से भाजपा आज इस मुकाम पर है तो उनके परिजन माया सिंह के साथ जो अन्याय किया क्या यह भाजपा की कथनी-करनी यह साबित करती है कि भाजपा में यूज एण्ड थ्रो की परम्परा अमित शाह और नरेन्द्र मोदी के चलते स्थापित हो रही है जिसके चलते भाजपा के वह कद्दावर नेता जिनकी बदौलत आज भाजपा इस मुकाम पर है उन्हें और उनके परिजनों के साथ-साथ उन त्याग, तपस्वी और निष्ठावान देव दुर्लभ कार्यकर्ताओं जिन्होंने जिंदगीभर त्याग, तपस्या से भाजपा को इस मुकाम पर पहुंचाया। उन्हीं में से एक कुसुम मेहदेले भी हैं जिनको पार्टी ने टिकट से वंचित कर एक सामंत को टिकट दिया जिन सामंतों को लेकर जब शिवराज सिंह चौहान घिरे तो उनका एक ही बयान रहता था कि राजा-महाराज एक किसान के बेटे को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे देखना पसंद नहीं करते हैं। लेकिन कुसुम मेहदेले का टिकट काटकर २९ हजार से अधिक मतों से पराजित एक ठाकुर को वहां से चुनावी समर में उतार दिया? यह सब खेल शिवराज सिंह चौहान जो राजा-महाराजाओं को घेरने वाले शिवराज सिंह चौहान और नरेन्द्र सिंह तोमर के इशारे पर हुआ। ऐसे ही कुछ सवाल उठाते हुए शिवराज मंत्रिमण्डल में बुन्देलखण्ड की बड़ी नेता कुसुम मेहदेले इस कदर नाराज हैं कि उन्हें अपनी बात कहने के िलए किसी नेता के कान नहीं मिले बल्कि उन्हें ट्विटर का सहारा लेना पड़ा और उसमें जो कुछ कहा वह साबित करता है कि भाजपा में जनता और कार्यकर्ता तो छोडिय़े अपने बड़े नेताओं से ही सम्पर्क और संवाद कम हो गया है। कुसुम मेहदेले अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखती हैं ”यह कैसा अन्याय हे कि पवई से १२ हजार मतों से हारे प्रत्याशी को पन्ना से टिकट और पन्ना से २९ हजार से अधिक मतों से जीते प्रत्याशी का टिकट काटा, क्यों? कैसी पण्डित दीनदयाल जी और पण्डित श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की भारतीय जनता पार्टी है, तोमर जीÓÓ। यहां तोमर जी से मतलब केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर से है। कुसुम मेहदेले के इस बयान से यह साफ जाहिर हो जाता है कि भाजपा महिला सशक्तिकरण के नाम का जो ढिंढोरा पीटती है उसमें कितनी सच्चाई है कि एक ओर जहां उसके शासनकाल में महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामले में मध्यप्रदेश हमेशा अव्वल रहा तो वहीं जब चुनाव का समय आया तो जो भाजपा महिलाओं को आगे बढ़ाने का ढिंढोरा पीटती है उसने इस चुनाव में महिलाओं को अधिक टिकट तो दिये नहीं बल्कि वर्षों से भाजपा का झण्डा बुलंद करने वाली महिला नेत्रियों कुसुम मेहदेले और राजमाता के वंशज माया सिंह जैसी नेत्री का टिकट काटने में हिचक नहीं की इन दोनों महिला नेत्रियों के साथ हुए अन्याय से यह साफ हो जाता है कि भाजपा के नेताओं के महिला सशक्तिकरण के मामले में क्या सोच है?

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