यह गुपचुप अध्यादेश “नोटबंदी पार्ट 2 “

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अगर आप एक पिता हैं और आपको अचानक अपने बेटे की फीस के लिए बड़ी रकम की जरूरत पडती है। और अगर आप सोच। रहे हैं कि किसी दोस्त या पडौसी से पैसे उधार लेकर काम चल जाएगा तो मुगालते में मत रहिएगा। अब ऐसा करना गैर कानूनी है क्यों कि सरकार धीरे से एक नया कानून ला चुकी है। भले ही अपने टी वी पर प्रधानमंत्री को इसकी घोषणा करते हुए न सुना हो लेकिन मोदी सरकार ने ऐसा कुछ किया है जो “नोटबंदी रिटर्न ” ही है और जान लीजिए इसका असर आप पर पड़ेगा ही पड़ेगा। सरकार एक अध्यादेश लेकर आई है जिसका नाम है “द बेकिंग आँफ अनरेगुलेटेड डिपाजिट स्कीम आँर्डिनेस 2019 “हिन्दी में इसका मतलब है जिस डिपाजिट स्कीम की निगरानी रिजर्व बैंक न कर रहा हो वो तमाम व्यवस्था और स्कीम बेन। आपके लिए थोड़ा और आसान कर देता हूं। अगर आप केस या किसी और रूप में भी किसी से बिना किसी रेगुलेशन के मतलब भाईबंदी में कोई भी उधारी लेते हैं तो इस कानून के हिसाब से आपकी संपत्ति जब्त हो सकती है यहां तक उधार लेने वाले की गिरफ्तारी तक हो सकती है। देश के आम लोग जो शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी जरूरतों के लिए इमरजेंसी के वक्त आपस में छोटी मोटी उधारी ले लेते हैं वो भी इस आँर्डिनेस की जय में होंगे। वैसे अभी भी आप अपने किसी सगे रिश्तेदार, बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्रयूशंस से पहले की तरह ही उधार ले सकते हैं। सरकार की दलील है कि आँर्डिनेस से पैसा जमा करके धोखाधड़ी वाली पूंजी स्कीम चलाने वाले घोटालेबाज इन्वेस्टर्स पर लगाम लगेगा। और हवाला और ब्लैकमनी पर चोट होगी। इसलिए कुछ लोग इस आँर्डिनेस को नोटबंदी का पार्ट 2 बता रहे हैं। करो कि कई सारी काँओपरेटिव सोसायटी लोगों से पैसे जुटाकर कंपनियों में निवेश करती हैं। इसी चैनल के जरिए पाँलिटिकल फंडिंग के लिए पैसा जुटाया जाता है। अब चुनाव से ठीक पहले बिना रेगुलेशन के लोगों से पैसा जुटाने को गैर कानूनी कर देना दिमाग में शक की सुई पैदा करता है। इसलिए इस नए आँर्डिनेस को लाए जाने की टाइमिंग पर भी सबाल उठने लगा है। इस नए कानून का खासा असर पड़ेगा रायल एस्टेट इंडस्ट्री पर बिल्डर्स अपने कस्टमर से अब एडवांस नहीं ले सकेंगे। इससे इस सेक्टर के निवेश पर सीधा असर पड़ेगा। चैरिटेबल टेस्ट से कर्ज लेकर पढऩे वाले छात्र पर भी इस कानून का असर होगा। मतलब वो भी इसी कानून के तहत अनरेगुलेटेड ट्रांज़ैक्शन में आएगा। इसलिए सरकार के इस नए आँर्डिनेस के मद्देनजर कुछ सवाल उठ रहे हैं। पहला, क्या ये चुनाव के ठीक पहले ” नोटबंदी की तरह ” ही कालेधन पर प्रहार है ? दूसरा, क्या काँआँपरेटिव सोसायटी सरकार के निशाने पर हैं ? तीसरा, रोजमर्रा में होने वाले साधारण से ट्रांज़ैक्शन पर सरकार इतनी सख्ती क्यों कर रही है? अरे भाई सरकार भाई सरकार को किस बात की जल्दी है कि वो सीधे आँर्डिनेस ही ले आई वो भी चुपके -चुपके।
०-साभार – हिंदीक्विवंट)

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