यदि शिवराज सरकार के कार्यकाल के डिफाल्टरों से की जाए वसूली तो भर जाएगा खजाना

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। भारतीय जनता पार्टी की सरकार के १३ वर्षों तक प्रदेश की सत्ता पर काबिज रहे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लगता है आज भी अपने आपको विपक्ष में बैठने का मन नहीं बना पा रहे हैं और वह आज भी वह प्रदेश का मुख्यमंत्री होने का भ्रम पाले हुए हैं तभी तो जो चिंता उन्होंने अपने १३ वर्षों के शासनकाल में नहीं की अब वही शिवराज सिंह चौहान जनता द्वारा बनाई गई कांग्रेस की सरकार के नेताओं से यह सवाल करते नजर आ रहे हैं कि कांग्रेस सरकार की कर्जमाफी पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं, कल उन्होंने अपनी चिर परिचित मुख्यमंत्री वाली शैली में कमलनाथ सरकार द्वारा लाये गये अनुपूरक बजट में पांच हजार करोड़ के प्रावधान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इसमें कौनसी कर्जमाफी होगी, तो वहीं उन्होंने यह भी सवाल किया कि कर्जमाफी में द्वितीय अनुपूरक बजट में पांच हजार करोड़ का प्रावधान किये जाने पर कहा कि इससे ज्यादा राशि तो फसल बीमा में हमने बांट दी थी इस राशि से किसका कर्ज माफ होगा, कर्ज माफी के लिये ४०-५० हजार करोड़ रुपये चाहिये बजट प्रावधान ऊंट के मुंह में ज़ीरा के समान है, उनकी इस तरह के सवालों पर पलटवार करते हुए हालांकि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि चिंता न करें आज दस जनवरी है, दस फरवरी और दस मार्च भी आएगी। जनता द्वारा शिवराज सिंह को और उनकी सरकार को सत्ता से अलग करने के बाद अपने आपको आज भी मुख्यमंत्री होने का भ्रम पाले हुए शिवराज सिंह ने इस विधानसभा के दौरान जिस तरह का व्यवहार किया उससे तो यही लगता है कि वह अभी तक विपक्षी नेता न होने का भ्रम पाले हुए हैं और जनता द्वारा कांग्रेस की सरकार बनाये २३ दिन हो गये हैं लेकिन वह आज भी अपने आपको इस प्रदेश के मुख्यमंत्री होने का भ्रम पाले हुए हैं। लेकिन उनकी १३ वर्षों की सरकार की पोल तो किसी पार्टी के नेता ने नहीं बल्कि कैग की रिपोर्ट जो कल विधानसभा में पेश की गई उसने खोलकर रख दी कि शिवराज सरकार में जहां भ्रष्टाचार की गंगोत्री बही ही है तो वहीं अपनों से राजस्व वसूली के खेल में भी गड़बड़झाला हुआ है। हालांकि चर्चा यह भी है कि प्रदेश में तमाम डिफाल्टरों के वसूली के मामले में जो मनमानी का दौर चला मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के स्वर्णिम मध्यप्रदेश में अपनी छवि बनाने के लिये करोड़ों रुपये बड़े-बड़े जलसों और आयोजनों में खर्च कर खजाना खाली किया गया लेकिन उस खजाने को भरने के भी प्रयास नहीं किये गये तभी तो शिवराज सरकार के कार्यकाल के समय ३३१३८.३६ कारोड़ रुपए आज भी डिफाल्टरों से वसूली न होने के कारण फंसे हुए हैं यदि यह राशि शिवराज सरकार के कार्यकाल में ईमानदारी से वसूली जाती तो न तो प्रदेश दो हजार करोड़ से अधिक का कर्जदार शायद न होता और न ही इस प्रदेश के प्रत्येक लगभग ४५ हजार रुपये का कर्ज शिवराज सरकार द्वारा थोपा गया होता। कैग की इस रिपोर्ट से प्रदेश की जनता द्वारा बनाई गई कांग्रेस की सरकार के मुखिया के लिये यह रिपोर्ट कुछ राहत भरी है जो खस्ताहाल सरकारी खजाने की समस्या से जूझ रही है उसके लिये कैग की रिपोर्ट ने एक रास्ता खोल दिया इसके अतिरिक्त बजट का इंतजाम किये बिना किसानों की कर्जमाफी की जा सकती है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक शिवराज सरकार में २०१६-१७ की स्थिति में ११५६१.६१ करोड़ का सीधा बकाया है, जबकि २१५७६.३७ करोड़ निराकरण प्रक्रिया में उलझे हैं। यह राशि उन डिफॉल्टर्स पर है, जो सरकार को चपत लगा चुके हैं या फिर रसूखदार होने के कारणज मा नहीं कराते हैं। इनमें सभी विभागों के डिफॉल्टर्स हैं। यदि सरकार ३३१३८.३६ करोड़ वसूल लेती हैं, तो अतिरिक्त बजट की जरूरत नहं पड़ेगी। किसानों की कर्जमाफी के लिए सरकार को ३५ से ३८ हजार करोड़ की जरूरत है। इसके लिए अनूपूरक बजट में सरकार ने ५००० करोड़ का प्रावधान किया है, इसलिए यदि ३३१३८.३६ करोड़ और यह ५००० करोड़ जोड़ लें तो ३८१३८.३६ करोड़ की राशि हो जाती है। ऐसे समझें बकाया का गणित – कैग रिपोर्अ के मुताबिक २०१६-१७ की स्थिति में ५२९१.६२ करोड़ बकाया वसूल नहीं हो सका है। इसमें १९२३.९२ करोड़ पांच साल से ज्यादा पुराना बकाया है। वहीं, भू-राजस्व, स्टाम्प, खनन व जलकर की ३९२ औद्योगिक इकाईयों से ९२७०.३७ करोड़ रुपए कम वसूले गए हैं। यह ऐसी राशि हैं, जो टैक्स में चोरी की गई या अन्य तरीके से चपत लगाई गई। इसे भी वसूली जाना है। इस तरह १५६१.६१ करोड़ का सीधा बकाया है। वहीं, २५७६.३७ करोड़ बकाया निराकरण की जद वाली राशि है। ३१ दिसम्बर २०१८ की स्थिति में इन तीनों राशि में तीन हजार करोड़ तक की वृद्धि होने का अनुमान है, लेकिन इसे अभी रिकार्ड पर नहीं लिया गया है। मुख्यत: इनसे होना है वसूली ११९२.१२ करोड़ के उत्पाद शुल्क का ज्वार-बाजरा से मदिरा उत्पादन में वसूल नहीं, ६५३.०८ करोड़ का नुकसान केवल राज्य के मदिरा उत्पादकों की भागीदार से हुआ, ४८.२१ करोड़ रुपए की वसूली आबकारी नीति में बदलाव के कारण नहीं हो पाई, १००.८४ करोड़ रुपए परिवहन शुल्क के मामले में ज्यादा नहीं मिल सका, ६७.०३ करोड़ रुपए २४ ठेकेदारों से खनन के वसूल नहीं हो सके, १३६.६९ करोड़ रुपए खनन निगम ने सरकार को ठेकेदारों से लेकर जमा नहीं किए और १६२७.५४ करोड़ रुपए का कर के उद्योगों से जल संसाधन विभाग ने नहीं वसूले।

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