मायावती को प्रतिमाओं पर खर्च हुआ जनता का पैसा लौटाना होगा -सुप्रीम कोर्ट

0
81

नई दिल्ली। (हिन्द न्यूज सर्विस)। सुप्रीम कोर्ट से बसपा सुप्रीमो मायावती से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बसपा प्रमुख मायावती को प्रतिमाओं पर खर्च जनता का पैसा लौटाना होगा। 2009 में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने ने यह आदेश दिया। मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीफ 2 अप्रैल को तय की गई। मायावती के वकील ने मामले की सुनवाई मई के बाद करने की अपील की, लेकिन कोर्ट ने यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया। लखनऊ और नोएडा में मायावती और उनकी पार्टी के चिह्न हाथी की प्रतिमाएं बनवाई गई थीं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में रविकांत ने 2009 में दायर अपनी याचिका में दलील दी है कि सार्वजनिक धन का प्रयोग अपनी मूर्तियां बनवाने और राजनीतिक दल का प्रचार करने के लिए नहीं किया जा सकता। जिसपर सुनवाई चल रही थी।

पीठ ने कहा कि इस याचिका पर विस्तार से सुनवाई में वक्त लगेगा, इसलिए इसे अप्रैल को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने पर्यावरण को लेकर व्यक्त की गई चिंता को देखते हुए इस मामले में अनेक अंतरिम आदेश और निर्देश दिए थे। निर्वाचन आयोग को भी निर्देश दिए गए थे कि चुनाव के दौरान इन हाथियों को ढंका जाये। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि मायावती, जो उस समय प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं का महिमामंडन करने के इरादे से इन मूर्तियों के निर्माण पर 2008-09 के दौरान सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं।
प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा, ”हमारे संभावित विचार में मायावती को अपनी और चुनाव चिह्न की मूर्तियां बनवाने पर खर्च हुआ सार्वजनिक धन सरकारी खजाने में वापस जमा करना होगा।

पीठ ने मामले की अंतिम सुनवाई के लिए दो अप्रैल की तारीख तय की है। पीठ ने यह स्पष्ट किया कि यह अभी संभावित विचार है क्योंकि मामले की सुनवाई में कुछ वक्त लगेगा। पीठ ने कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई दो अप्रैल को होगी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक करीब 2600 करोड़ रुपये का खर्च आया था। इसके अलावा गौतमबुद्ध विश्वद्यालय समेत कई और जगहों पर भी प्रतिमाएं लगाई गईं, जिससे अब करीब 4 हजार करोड़ रुपये तक का खर्च होने का अनुमान है। इस रकम में लागत समेत तमाम खर्च शामिल हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि मायावती के पक्ष का कहना है कि चूंकि कैबिनेट ने इस बजट को पास किया था इसीलिए ये रकम लौटाने की जिम्मेदारी सिर्फ व्यक्तिगत तौर पर उनकी नहीं बनती।

बता दें कि 2007 से 2011 के बीच उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ और नोएडा में दो पार्क बनवाए थे। इन पार्कों में मायावती ने अपनी, संविधान के संस्थापक भीमराव अंबेडकर, बसपा के संस्थापक कांशीराम और पार्टी के चिह्न हाथी की कई प्रतिमाएं बनवाई थीं।

००००००००००००

LEAVE A REPLY