महत्वपूर्ण पदों पर महाकौशल का कब्जा

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०- देवदत्त दुबे
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, विधानसभा अध्यक्ष एमपी प्रजापति, विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कांवरे सभी महाकौशल से, प्रदेश में राजनीति का चक्र कुछ ऐसा घूमा कि अधिकांश महत्वपूर्ण पद महाकौशल के खाते में आ गए। कांग्रेस और भाजपा दोनेां के प्रदेश अध्यक्ष महाकौशल क्षेत्र से थे और कांग्रेस की सरकारें बनने के बाद इसी क्षेत्र के मुख्यमंत्री कमलनाथ बने जिन्होंने बाद में विधानसभा अध्यक्ष और विधानसभा उपाध्यक्ष के पद महाकौशल की झोली में डाल दिए। गुुरुवार को समाप्त हुआ विधानसभा का शीतकालीन सत्र भले ही हंगामेदार रहा और सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हों, एक-दूसरे पर परंपरा तोडऩे का आरोप लगे और एक-दूसरे को जमकर कोसा लेकिन इस सबके बावजूद महाकौशल को एक ओर उपलब्धि मिल गई जब महाकौशल की विधायक हिना कांवरे को विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ महाकोशल क्षेत्र के ही छिंदवाड़ा क्षेत्र से नौ बार लोकसभा चुनाव जीते और लगभग २५ वषों से भी ज्यादा केन्द्र सरकार में मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने महाकौशल क्षेत्र में व्यापक जनाधार बनाया। लगभग हर चुनाव में अपने समर्थकों को टिकट दिलवा दे रहे हैं। कांग्रेस में पद दिलवा दे रहे और अब जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं तब उनका फोकस महाकौशल क्षेत्र पर बना हुआ है। पहली बार मालवा, चंबल, मध्य भारत जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय इलाकों में सत्ता के गलियारों में प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण पदों पर कम हुआ है। बुंदेलखण्ड को जरूर नेता प्रतिपक्ष का पद मिल गया है, जहां रहली विधानसभा क्षेत्र से लगातार आठ बार विधानसभा का चुनाव जीत रहे गोपाल भार्गव को पार्टी ने वरिष्ठता के आधार पर नेता प्रतिपक्ष बनाया है। अब जबकि प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं, ऐसे में क्षेत्रों से प्रत्याशियों की खोज भी शुरू हो गई। अब तक दोनों ही दल विधानसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र को लेकर व्यस्त थे लेकिन १४ जनवरी के बाद जैसे ही सूर्य उत्तरायण होगा वैसे ही लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह जहां जबलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ेंगे, वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ छिंदवाड़ा या फिर सौंसर विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। विधानसभा चुनाव में से भी ज्यादा महाकौशल क्षेत्र में लोकसभा के चुनाव को लेकर गहमागहमी रहेगी। दोनों ही दलों की ओर से इस क्षेत्र को अधिकतम प्रतिनिधित्व दिया गया है।
०-नया इंडिया के कालम ”राजनैतिक गलियारा” से साभार)
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