मध्यप्रदेश के रामराज्य की ओर बढ़ते कदम ?

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार का प्रारंभ जिस प्रकार से उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के द्वारा अपनी पहचान छुपाकर डम्पर खरीदने से हुई थी और इसी के साथ प्रदेश के अधिकारियों और पार्टी के नेताओं ने शिवराज सिंह के राज्य की मंशा ‘पूत के पांव पालने में नजर आते हैं की तर्ज पर शिवराज के राजकाज का पूरा खाका अपने मन मस्तक में तैयार कर लिया था और उसी के अनुरूप इस प्रदेश में शिवराज सिंह के ११ साल का शासनकाल चला, जिसमें कितने घोटाले हुए और कितनी विभिन्न सरकारी योजनाओं के नाम और कितने किसानों की खेती को लाभ का धंधा बनाने के नाम पर जिस प्रकार के घोटाले दर घोटाले हुए यही नहीं इसी के साथ शिवराज सिंह के कार्यकाल में व्यापमं जैसा महाघोटाला हुआ जिसमें हजारों छात्रों का भविष्य अंधकार की ओर ढकेल दिया गया, इस नीति के चलते प्रदेश में स्थिति यह रही कि सरकारी योजनाओं की फर्जी आंकड़ों की रंगोली सजाकर मुख्यमंत्री को सरकारी योजनाओं में सबकुछ हरा भरा बताने का काम किया और उसे देखकर मुख्यमंत्री प्रफुल्लित होकर अपनी पीठ थपथपाते रहे, तो वहीं उनके ही राज्य में सरकारी योजनाओं की स्थिति यह रही कि भ्रष्ट अधिकारियों ने सरकारी योजनाओकं में फर्जीवाड़ा के कारनामे उनके गृह जिले में भी दिखा दिये तभी तो मुख्यमंत्री के गृह जिले में धरातल पर नहीं बल्कि कागजों पर सैंकड़ों बलराम तालाब बना दिये गये और जब इसकी जांच हुई तो मुख्यमंत्री इन अधिकारियों के पक्ष में खड़े दिखाई दिये तो वहीं उनके ही परिवार के सदस्य जिला जनपद अध्यक्ष के नाते यह दावा करते नजर आए कि सीहोर में बलराम तालाब कागजों पर बने जिनकी सूची मेरे पास है, ऐसे कई सरकारी योजनाओं के कागजी कारनामे सामने आए लेकिन हर बार मुख्यमंत्री उनके पक्ष में खड़े दिखाई दिये, इसके पीछे के क्या कारण थे, यह तो वही जानें लेकिन आज इस प्रदेश के तमाम भारतीय जनता पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता और प्रदेश के नागरिक भाजपा के ही राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भोपाल प्रवास के बाद शिवराज सिंह की कार्यप्रणाली में जिस तरह से बदलाव के संकेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के श्रीमुख से उनके मंत्रीमण्डल के साथियों, पार्टी नेताओं, अधिकारियों और प्रदेश की जनता को जो सुनाई दे रहा है उससे अब लोग यह सोचने पर मजबूर हो रहे हैं कि क्या सच में इस प्रदेश में उसी शिवराज सिंह के राज्य में जहां एक समय ऊपर से लेकर नीचे तक भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही थी और उस गंगोत्री में डुबकी लगाकर राज्य के अधिकारियों, राजनेताओं, सत्ता के दलालों के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी के वह नेता जिनकी हैसियत शिवराज सिंह के शासनकाल के आने के पूर्व टूटी साइकिल की नहीं थी आज वह शिवराज में बही भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाकर आलीशान भवनों और लग्जरी कारों में फर्राटे लेते नजर आ रहे हैं? लेकिन अमित शाह के भोपाल प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के श्रीमुख से जिस तरह के निर्देश प्रदेश के अधिकारियों को दिये जा रहे हैं उससे तो अब यह लगता है कि अब प्रदेश में भ्रष्टाचार की गंगोत्री नहीं बहेगी। यही नहीं मुख्यमंत्री के इस तरह के दिशा-निर्देशों को सुनकर लोग चकित और अचंभित तो हैं ही तो उसके साथ ही अब वह एक दिन के मुख्यमंत्री वाले हीरो अनिल कपूर फिल्म नायक के चंद दृश्यों को स्मरण कर यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या सच में अब प्रदेश में लक्ष्मी दर्शन का खेल बंद हो गया है और अब आम जनता को अपने कामकाज के लिये पटवारी से लेकर उच्च अधिकारियों तक जो भजकलदारम् की खनक दिखाने की प्रथा अब बंद होने वाली है और सारा कामकाज अब अपने नियमानुसार चलेगा और जहां-जहां प्रदेश के कार्यालयों में भजकलदारम् की खनक सुनाई देगी, मुख्यमंत्री ऐसे अधिकरियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त निर्णय लेंगे, हालांकि इससे पहले इस तरह के सख्त निर्णय कभी डंडा लेकर निकला हूँ, तो कभी अधिकारियों को उल्टा टांग दूंगा और अब भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची बनाई जाएगी और इसका काम प्रदेश के जिलों में पदस्थ विकास अधिकारियों (कलेक्टर) को सौंपा गया अब देखना यह है कि प्रदेश के जिलों में पदस्थ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के विकास अधिकारी अपने जिले के कितने भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची मुख्यमंत्री को सौंपते हैं यह तो भविष्य बताएगा। हालांकि मुख्यमंत्री के श्रीमुख से इन दिनों जिस तरह के धारा प्रवाह आदेश और निर्देशों का सिलसिला चल रहा है सच में यदि यह सब कुछ हो गया तो यह मध्यप्रदेश अब रामराज्य की ओर बढ़ता दिखाई देगा, जिसमें न तो अब मुख्यमंत्री के परिजन अवैध रेत के उत्खनन करते नजर आएंगे और न ही प्रदेश के तमाम वह जनप्रतिनिधि जिनके संरक्षण में राज्य में शराब की यह स्थिति है कि लोगों को अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए रात ११ बजे के बाद भले ही दुकानों पर दूध नहीं मिले लेकिन सुरा प्रेमियों को सुरा २४ घंटे उपलब्ध है, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यप्रणाली में आये अब इस तरह के बदलाव के बाद अब न तो भाजपा के वह जनप्रतिनिधि जिनके संरक्षण में शराब का कारोबार फल-फूल रहा था अब उस पर बंदिश लग जाएगी और न ही भाजपा के वह नेता जिन्होंने राज्य के कई जिलों में दलितों की जमीनों पर कब्जा करने के साथ-साथ तमाम लोगों की जमीनों पर कब्जा कर रखा है वह सब उन्हें तिलक लगाकर वापस करते दिखाई देंगे और वह भाजपा के जनप्रतिनिधि जिनकी सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले स्कूलों को पड़ाने के लिये शिक्षकों की भर्ती में रुचि नहीं बल्कि कमीशन के फेर में निर्माण कार्यों की ओर ज्यादा दिखाई देती थी अब उनकी इस तरह की कमीशन खाने की नीति में परिवर्तन आ जाएगा, अब राज्य की वह सड़कें जो कमीशन के फेर में ठेकेदारों, अधिकारियों और राजनेताओं की मिलीभगत के चलते गुणवत्ताविहीन बनाई जा रही थीं, अब उन सड़कों में गुणवत्ता नजर आएगी फिर चाहे वह मुख्यमंत्री के अध्यक्षता वाले मध्यप्रदेश राज्य सड़क विकास निगम के द्वारा बनाई जाने वाली टोल वाली सड़कों पर भी अब टोल देने के साथ गड्ढे नजर नहीं आएंगे। लेकिन यह सब खेल भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भोपाल प्रवास के बाद जो परिवर्तन शिवराज सिंह की सरकार में आया है और इसके बाद ही मुख्यमंंत्री के श्रीमुख से जिस तरह के अच्छे-अच्छे निर्देश जो कि इस प्रदेश की जनता वर्षों से सुनती आई है आज उसे फिर सुनाई देने लगे अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री के श्रीमुख से निकलने वाले एक-एक निर्देशों का पालन अक्षरश: राज्य की वर्षों से बिगड़ी नौकरशाही जिसको लेकर अमित शाह के सामने भी मामला उठा अब उसमें भी परिवर्तन कितना आता है इस पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं और लोग यह कल्पना करते नजर आ रहे हैं मुख्यमंत्री के १२ वर्षों के शासनकाल में नहीं कम से कम अनिल कपूर की तरह एक दिन के नायक की फिल्म की तरह भाजपा के मिशन-२०१८ के दौरान तो इस प्रदेश के नागरिकों को ऐसा कुछ अनुभव का अहसास हो कि जिस शिवराज सिंह के राज्य का श्रीगणेश उनकी धर्मपत्नी की द्वारा अपनी पहचान छुपाकर डंपर खरीदने से हुई अब उसी सरकार में अब जो कुछ भी होगा वह बिल्कुल पारदर्शी होगा और ऐसी भी लोगों को संभावना नजर आ रही है कि आनेवाले समय में पार्टी जो भी आयोजन करेगी उसके एक-एक पैसे का हिसाब अपने हर आयोजन का इस प्रदेश की जनता के सामने पेश करेगी और अब लोगों के मन में यह भी उम्मीद जागती नजर आ रही है कि अब इस प्रदेश में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों और पार्टी के कार्यक्रमों के नाम पर जो चंदा मामाओं का चंदा वसूली का गोरखधंधा चलता है उस पर भी प्रतिबंध लग जाएगा और हर किसी के जहांगीर की तर्ज पर ही पीडि़त की दुखड़ा सुनने के लिये अब प्रदेश में कई जगह जहांगीरी घंटे लगाये जाने का भी दौर चलेगा और उन घंटा बजाने के बाद प्रदेश के हर पीडि़त की समस्या का समाधान तुरत-फुरत होगा, अब इस प्रदेश के किसान को अपनी खसरा खतौनी लेने के लिये किसी पटवारी को लक्ष्मी दर्शन कराने की जरूरत नहीं है, कहने वाले तो यह भी दावा करते नजर आ रहे हैं कि मुख्यमंत्री अब अपने निवास और कार्यालय में जहांगीरी घंटे की तरह जहांगीरी काल सेंटर स्थापित करने जा रहे हैं जिसमें हर पीडि़त को किसी अन्य अधिकारी के समक्ष नहीं बल्कि स्वयं मुख्यमंत्री से अपनी दास्तान सुनने की मुख्यमंत्री व्यवस्था करने जा रहे हैं अब इस बात में कितनी सच्चाई है यह वह जानें लेकिन यह जरूर है कि आने वाले समय में इस प्रदेश की वर्षों से भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों से जूझ रही जनता को अब मुक्ति मिलने वाली है और अब जो कुछ भी इस प्रदेश में होगा सबकुछ आइने की तरह होगा?

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