मंत्रियों की लापरवाही के चलते कमलनाथ सरकार की हो रही किरकिरी

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार की लगातार किरकिरी हो रही है। प्रदेश में कानून व्यवस्था हो या फिर बिजली कटौती मामला मंत्रियों के उदासीन रवैये से लगातार सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। जबकि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने प्रमुख एजेंडे में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी है। प्रदेश में बिजली, जल, कानून व्यवस्था बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं। मुख्यमंत्री लगातार मंत्रालय से ऐसे मंत्रियों की मानिटरिंग कर रहे हैं जिनका प्रदर्शन बेहद खराब रहा है और जो सरकार को शर्मसार होने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यह मंत्री अपने विभाग के अलावा उनके प्रभार वाले जिलों में भी निराशाजनक प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, उनके क्षेत्र में भी खास प्रदर्शन नहीं है। लोकसभा चुनाव में २२ मंत्रियों के क्षेत्र में कांग्रेस की हार का सामना करना पड़ा है। इन क्षेत्रों में कांग्रेस को तगड़ा झटका लगा है। इसके पीछे दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। पहला तो मोदी लहर का कायम रहना, दूसरा विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस का खराब प्रदर्शन। तो वहीं कमलनाथ मंत्रीमण्डल के राजधानी के मंत्री पीसी शर्मा की कार्यशैली के चलते जहाँ पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार भी पीसी शर्मा की कार्यशैली पर तमाम सवाल खड़े कर ही रही थी इसी बीच मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार पत्रकारों के हितों के लिये बनने वाली जनसम्पर्क कमेटियों की घोषणा और उस घोषणा के बाद उसमें कुछ ऐसे नाम सामने आये जिसको लेकर बवाल खड़ा हुआ जिसकी वजह से सरकार को तीन घण्टे पहले घोषित कमेटियों की सूची निरस्त करनी पड़ी इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और सवाल यह उठ रहा है कि जो पत्रकार कल तक भाजपा सरकार की तारीफों के पुल बांधने में लगे थे वह पत्रकार आखिर उस सूची में कैसे आ गये, इस सूची में उन पत्रकारों की उपेक्षा की गई जो पिछले १५ वर्षों से भाजपा के खिलाफ खबरों के माध्यम से आईना दिखाने का काम कर रहे थे, उन पत्रकारों की उपेक्षा किये जाने को भी सवाल उठ रहे हैं तो वहीं पीसी शर्मा के द्वारा जनसम्पर्क विभाग संभलाते ही जिस तरह की कार्यशैली अपनाई जा रही है उसको लेकर भी पीसी शर्मा की कार्यशैली चर्चाओं में इन घोषित और बाद में स्थगित कमेटियों की सूची में जो पत्रकारों के नामों को लेकर विवाद खड़ा हुआ है उसके पीछे जनसम्पर्क मंत्री की इस कार्यशैली से विभाग की छवि खराब तो हुई है तो वहीं इन समितियों की कार्यसूची बनाने में जनसम्पर्क विभाग के एक अधिकारी की कारगुजारी भी चर्चाओं में है जिसकी वजह से पीसी शर्मा और सरकार की किरकिरी हुई है। यूँ तो कमलनाथ मंत्रिमण्डल में अकेले पीसी शर्मा ही नहीं कई मंत्री ऐसे हैं जिनकी अपने विभाग की कमान संभालते ही कोई मंत्री स्थानान्तरणों के नाम पर तो किसी मंत्री के ओएसडी के द्वारा विभागों में जो अवैध वसूली का सिलसिला चला है, ऐसे कारनामों से मंत्रिमण्डल के कई मंत्री कमलाथ सरकार की छवि खराब करने में लगे हुए हैं इन्हीं सब कारणों से विपक्ष को कमलनाथ की सरकार को घेरने का अवसर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पद संभालते ही सभी मंत्रियों को काम करने के लिए फ्री हैंड दिया है। उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री सचिवालय के बजाए मंत्री अपने विभाग के फैसले खुद लें। बहुत जरूरी मामला होने पर ही फाइल उनके ऑफिस भेजी जाए। नाथ समेत मुख्य सचिव आरएस मोहंती पॉवर सप्लाई प्रबंधन का ट्रैक देख रहे हैं। इस मोर्चे पर ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह सिंह पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। सिंह सुधार के बजाए बिजली कटौत्ी का ठीकरा भाजपा पर फोड़ रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी से पलड़ा झाड़ते नजर आ रहे हैं। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री तुलीस राम सिलावट भी अपना मंत्रालय संभालने में नाकाम साबित हुए हैं। प्रदेश में लगातार स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में लापरवाही के मामला सामने आ रहे हैं। लेकिन फिर भी अस्पतालों की हालत में सुधार हनीं हो रहा है। हेल्थ विभाग की योजनाओं को अस्पतालों में सही तरह से क्रियान्वित नहीं किया जा रहा है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में भी कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला है। मेडिकल शिक्षा मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ भी यहां कुछ खास करने में नाकाम रही हैं। प्रदेश में सरकार कानून व्यवस्था के भले बड़े दावे करे लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। प्रदेश में कानून व्यवस्था पूरी तरह से ट्रैक से उतर गई है। जिसने छह महीने में ही सरकार को घेरने का मौका दिया है। सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री बाला बच्चन अपने विभाग पर कोई खास नियंत्रण नहीं रख पा रहे हैं। पुलिस विभाग का प्रदर्शन कोई पहले से भी बदतर होता जा रहा है। इनके अलावा अन्य कई मंत्रियों का भी यही हाल है। इनमें मंत्री इमरती देवी, ओमकार सिंह मरकाम, लखन घनघोरिया और सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट विस्तार में इन मंत्रियों पर गाज गिर सकती है। इसकी जगह नए चेहरों को काम सौंपा जा सकता है।

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