भूरिया के उपचुनाव में जल संकट आड़े न आये इसलिये आज पीएचई के ईएनसी का झाबुआ दौरा

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। वर्षों तक लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सेवा में रहे जीएस डामोर जो विभाग प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हो उस झाबुआ जिले की राजनीति में इस तरह से सक्रिय हुए कि उनकी इस सक्रियता से एक लम्बे अरसे तक झाबुआ के सांसद और विधायक के साथ-साथ मंत्री के पद पर रहे कांतिलाल भूरिया को अपनी सल्तनत खिसकते देख प्रदेश में कमलनाथ सरकार की सत्ता का लाभ उठाकर जीएस डामोर के कार्यकाल के उन घोटालों जिन घोटालों की एक बार नहीं अनेकों बार जाँच हो चुकी और सभी मामलों में हर जांच करने वाले विभागों से क्लीनचिट मिल गई थी लेकिन चूँकि डामोर की बढ़ती लोकप्रियता से कांतिलाल भूरिया इतने भयभीत हुए कि उन्होंने पीएचई विभाग के तत्कालीन प्रमुख अभियंता केके सोनगरिया को डामोर का समर्थक मानकर उन्हें हटाकर ही दम लिया तो इसका लाभ उठाते हुए संकुले विभाग के मुखिया बन बैठे, लेकिन संकुले के इस पद पर बैठते ही संकुल की कार्यशैली के चलते विभाग में इस तरह की स्थिति निर्मित होने लगी जिसके चलते अधिकारियों में असंतोष व्याप्त है क्योंकि भूरिया की नजर में पीएचई विभाग में हर किसी अधिकारी और कर्मचारियों का डामोर का समर्थक होने का भय व्याप्त है और उनकी स्थिति यह हो गई कि विभाग के हर किसी ईई या अन्य अधिकारी को डामोर का समर्थक मानकर उससे बदला लेने में लगे हुए हैं क्योंकि वर्षों तक पीएचई विभाग की सेवा में रहे जीएस डामोर के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने जो विधानसभा के चुनाव में कांतिलाल भूरिया की तरह उनके पुत्र विक्रांत भूरिया जो कि अपने आपको झाबुआ और अलीराजपुर जिले के साथ-साथ अन्य जिलों का आदिवासी नेता होने का भ्रम पाले हुए हैं उनको डामोर ने बुरी तरह पराजित किया तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेसी प्रत्याशी अपने पुत्र विक्रम भूरिया की करारी हार के बाद चुनावी समर में कांतिलाल भूरिया को भी डामोर ने चुनावी समर में पराजित कर वर्षों तक सांसद रहे कांतिलाल भूरिया से सांसदी छीनने में कामयाबी हासिल कर ली, इन सभी से घबराये भूरिया इन दिनों पीएचई विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से इस तरह से भयभीत हैं और वह हर किसी को डामोर का समर्थक मानकर चल रहे हैं और उसके स्थानान्तरण कराने में भिड़ जाते हैं, डामोर से भयभीत भूरिया की इस स्थिति का लाभ उठाते हुए पीएचई विभाग के मुखिया का पद हथियाने में संकुले ने बाजी तो मार ली लेकिन प्रदेश के साथ-साथ कांतिलाल भूरिया के जिले के निवासी जो जल संकट से जूझ रहे हैं उसका समाधान संकुल के पास नहीं है, यदि विभागीय सूत्रों पर भरोसा करें तो पिछली वर्ष प्रदेश में पैदा हुई जल संकट की स्थिति से जिस कुशल प्रबंधन और सटीक रणनीति के चलते पूर्व विभाग प्रमुख ईएनसी केके सोनगरिया ने प्रदेश में व्याप्त जल संकट का जिस तरह से मुकाबला किया था जिसकी सराहना शासन द्वारा की गई लेकिन मजे की बात यही है कि वह केके सोनगरिया के द्वारा डामोर से भयतभीत भूरिया के द्वारा जब उन्हें इस पद से हटाने में कामयाबी हासिल की तब तक प्रदेश में संभावित जलसंकट को देखते हुए सोनगरिया ने एक सफल योजना तैयार कर रखी थी अब उस योजना को ठीक से क्रियानवयन करने का जिम्मा वर्तमान एएनसी संकुल पर है वह उन नीतियों को ठीक से क्रियान्वयन करने में असफल नजर आ रहे हैं चूंकि अब झाबुआ में उन्हीं डामोर जिनके भय से भयभीत कांतिलाल भूरिया हैं उन्हीं डामोर के लोकसभा संासद बनने के कारण झाबुआ विधानसभा के प्रतिनिधि के रूप में त्यागपत्र देने के कारण रिक्त हुई झाबुआ विधानसभा के होने वाले उपचुनाव के दौरान जिन भूरिया और डामोर के बीच चली जंग से विभाग प्रमुख का पद पाये संकुले अब झाबुआ जिले का दौरा इसलिये करने जा रहे हैं कि उपचुनाव के दौरान कहीं भूरिया की जीत में उक्त विधानसभा में चल रहा जलसंकट बाधा न बने इसलिये वह झाबुआ का दौरा करने निकले हैं अपने इस दौरे के माध्यम से वह झाबुआ जिले का जल स्तर बड़ाने में महारथ हासिल करेंगे ऐसी उम्मीद है। मजे की बात है कि उसी झाबुआ से लगे अलीराजपुर जहां के अधिकांश आदिवासी फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से मजबूर हैं ही तो उसी अलीराजपुर भयंकर जल संकट से जूझ रहा है उस अलीराजपुर की जलसंकट से जूझ रही जनता की उन्हें परवाह तक नहीं है।

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