भाजपा सरकारों की वित्तीय अनियमितता बनेगी कांग्रेस का हथियार

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०- अरुण पटेल
भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (कैग) के ताजा प्रतिवेदन में मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री रमनसिंह के कार्यकाल के दौरान हजारों करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। उसको लेकर कांग्रेस सरकारें दोनों ही राज्यों में पूर्ववर्ती भाजपा सरकारों की तगड़ी घेराबंदी का कोई अवसर हाथ से नहीं जाने देंगी। लोकसभा चुनाव में इसे इन राज्यों में एक बड़ा मुद्दा बनाने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि मध्यप्रदेश में वित्त मंत्री की अध्यक्षता में तत्काल मंत्रिमंडलीय समिति बनाकर जो खुलासे हुए हैं उसकी जांच की जाए और किसी भी दोषी को बख्शा न जाये। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार में हुए हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमिततओं की जांच के लिए जन आयोग गठित किया जायेगा। उन्होंने साफ किया कि कैग की रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि पिछली सरकार में किस तरह का गठजोड़ काम कर रहा था। वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि राज्य में सुपर सीएम के सुपर घोटालों का जो खुलासा हुआ है उसकी जांच की जायेगी। रमन सरकार के बारे में वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 4601 करोड़ के ई-टेंडर अफसरों की मिलीभगत से बांटे गये और 79 ठेकेदारों व विक्रेताओं के पास दो-दो पेन नम्बर थे। जिन कम्प्यूटरों से निविदाएं जारी हुई उन्हीं से अपलोड भी हुईं।

कैग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान प्रदेश में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। वाणिज्यिक कर, उत्पाद शुक्ल, वाहन कर, स्टाम्प पंजीकरण शुल्क, खनन और जल कर में वित्तीय अनियमितताओं के चलते सरकारी खजाने को कुल मिलाकर 6270 करोड़ 37 लाख का नुकसान हुआ है। मध्यप्रदेश की 15वीं विधानसभा के पहले सत्र में प्रस्तुत कैग की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि शिवराज सरकार के दौरान प्रदेश की पेंच परियोजना में 376 करोड़ रुपये की अनियमितता की गयी। इसी प्रकार सार्वजनिक उपक्रमों में 1224 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। जनजाति के लिए संचालित विद्यालय एवं छात्रावास के संचालन में भी 147 करोड़ 44 लाख की अनियमितता उजागर हुई है, वहीं यह भी पता चला है कि जल संसाधन विभाग, लोक निर्माण विभाग, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 9557 करोड़ 16 लाख की कुल 242 योजनाओं में से 24 परियोजनाओं की लागत में 4800 करोड़ 14 लाख की बढ़ोत्तरी हुई है। मुख्यमंत्री कमलनाथ का कहना है कि विधानसभा के पटल पर रखी गयी कैग की रिपोर्ट में शिवराज सरकार के कार्यकाल की सामने आई गड़बडिय़ों की जांच होगी। पिछली सरकार के कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं और वित्तीय प्रबंधन में कमजोरियां उजागर हुई हैं एवं करोड़ों रुपये के नुकसान की बात सामने आई है, इससे स्पष्ट है कि किस तरह का गठजोड़ पिछली सरकार में काम कर रहा था और भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा था। सारे मामलों की विस्तृत जांच करायेंगे और दोषियों पर कार्रवाई होगी। कमलनाथ का कहना है कि हम तो शुरु से ही कह रहे थे कि पिछली सरकार में बड़ा भ्रष्टाचार का खेल खेला गया है, अब सारे मामले एक जन-आयोग को सौंपे जायेंगे एवं किसी को बख्शा नहीं जायेगा।

हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की 31 मार्च 2017 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के प्रस्तुत प्रतिवेदन में हुआ है। इस रिपोर्ट से अनेक विभागों में चल रही वित्तीय अनियमितताओं का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान करने, पेनाल्टी न लगाये जाने, वसूले गये शुल्क को जमा करने में, तय रेट से ज्यादा रेट पर भुगतान किए जाने आदि के मामले शामिल हैं। जहां इन मामलों को लेकर कांग्रेस गंभीरता से जांच कराने की बात कर रही है वहीं भाजपा का कहना है कि जांच करा लीजिए सब बातें साफ हो जायेंगी। किसानों की कर्जमाफी का वायदा पूरा करने गंभीरतापूर्वक प्रयास कर रही तथा प्रदेश की खस्ताहाल आर्थिक संकट से जूझ रही कमलनाथ सरकार के लिए कैग रिपोर्ट ने एक रास्ता भी दिखाया है जिससे वह बकाया की वसूली कर बिना अतिरिक्त इंतजाम के किसानों की कर्जमाफी कर सकती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकार को 33138 करोड़ 36 लाख रुपये की वसूली डिफाल्टरों से करना है। यदि कमलनाथ सरकार सख्ती से इसकी वसूली कर ले तो वचनपत्र के वायदों को आसानी से पूरा कर सकती है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक शिवराज सरकार में 2016-17 की स्थिति में 11561 करोड़ 61 लाख का सीधा बकाया है जबकि 21576 करोड़ 37 लाख रुपये निराकरण की प्रक्रिया में उलझे हुए हैं। यह राशि उन डिफाल्टरों पर बकाया है जो या तो सरकार को चपत लगा चुके हैं या फिर रसूखदार होने के कारण जमा नहीं कराते। इनमें सभी विभागों के डिफाल्टर शामिल हैं।

किसानों की कर्जमाफी के लिए सरकार को 35 से 38 हजार करोड़ रुपये की जरुरत है जबकि 33 हजार से कुछ अधिक करोड़ की वसूली बकाया है। जिन लोगों से वसूली होना है उनमें प्रमुख रुप से 1192 करोड़ 12 लाख रुपये उत्पाद शुल्क ज्वार-बाजरा से मदिरा उत्पादन में वसूल नहीं हुआ है, 653 करोड़ 8 लाख रुपये का नुकसान केवल राज्य के मदिरा उत्पादकों की भागीदारी से हुआ है। जबकि 48 करोड़ 21 लाख रुपये की वसूली आबकारी नीति में हुए बदलाव के कारण नहीं हो पाई, 100 करोड़ 84 लाख रुपये परिवहन शुल्क के मामले में ज्यादा नहीं मिल सका, 63 करोड़ 3 लाख रुपये 24 ठेकेदारों से खनन के वसूल नहीं हो सके, तो वहीं 136 करोड़ 69 लाख रुपये खनिज निगम ने सरकारी खजाने में ठेकेदारों से लेकर जमा नहीं किये, 1627 करोड़ 54 लाख रुपये जल कर के उद्योगों से जल संसाधन विभाग ने वसूल ही नहीं किए। सार्वजनिक क्षेत्र के 57 उपक्रमों के जरिए जहां सरकार को 3672 करोड़ रुपये की चपत लगना बताया गया है वहीं यह भी कहा गया है कि 25 सार्वजनिक उपक्रमों ने 187 करोड़ रुपये के लाभ पर 37 करोड़ 49 लाख का लाभांश घोषित नहीं किया जबकि 120 करोड़ रुपये की सहायता अकार्यशील उपक्रमों को दी गयी। छत्तीसगढ़ के बंटवारे के बाद भी 36 करोड़ 98 लाख रुपये की राशि वसूली ही नहीं गयी और विभिन्न मामलों में 45 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त व्यय कर दिये गये।

और यह भी
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में लगभग 13 साल चली सरकार के कार्यकलापों की जांच को लेकर कितने गंभीर हैं इसका अंदाजा उनकी इस बात से लगता है कि- अभी तो केवल ट्रेलर सामने आया है पूरी फिल्म आना बाकी है और बहुत सारे खुलासे होंगे। वित्त मंत्री तरुण भानोट का कहना है कि वित्तीय अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार विभागवार जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी, इसमें चाहे कोई बड़ा दोषी हो या छोटा हम उसे बख्शेंगे नहीं, कैग रिपोर्ट को हम अत्याधिक गंभीरता से लेंगे। दोनों राज्यों में सत्ता परिवर्तन के बाद अब भाजपा सरकार के समय हुए घोटाले शनै:-शनै: सामने लाने का कोई अवसर कांग्रेस सरकार हाथ से नहीं जाने देगी। उसकी हरसंभव कोशिश होगी कि भाजपा की सरकार किस ढंग से चली है उसका पर्दाफाश करते हुए जनता के सामने उसके कारनामे उजागर करे।
०- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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