भाजपा नेताओं की कैसी मजबूरी !

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। भारतीय जनता पार्टी के शर्ष नेताओं की मजबूरी समझ में नहीं आने वाली है। तीन राज्यों में सत्ता गंवाने और दो दूसरे राज्यों में बुरी तरह से पराजित होने के बाद दिल्ली में राष्ट्रीय परिषद की बैठक हो रही थी पर किसी ने इसे बारे में सवाल उठाना मुनाबित नहीं समझा। सब चुप रहे। उलटे दो दिन की राष्ट्रीय परिषद की बैठक के दूसरे दिन जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस भले जीते है पर भाजपा हारी नहीं है तो पार्टी के साधारण कार्यकर्ताओं के साथ-साथ शीर्ष नेता भी तालियां बजा रहे थे। सवाल है कि हारना किसको कहते हैं? पार्टी तीन राज्यों में सरकार से बाहर हो गई और अध्यक्ष कह रहे हैं कि हारे नहीं। राजस्थान में पार्टी को ९० सीटों का नुकसान हुआ, मध्यप्रदेश में ५४ सीटों का और छत्तीसगढ़ में तो पार्टी अपनी जीती दो तिहाई से ज्यादा सीटें हार गई। तेलंगाना में भाजपा पांच से एक सीट पर आ गई। पर पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा हारी नहीं है तो किसी ने इस पर सवाल नहीं उठाया। सवाल है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा का ३० फीसदी के करीब वोट बना रहे और वह एक सौ सीटें हार जाए तो क्या उसे हारना नहीं कहेंगे? दो दिन की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में इस बारे में चर्चा होनी चाहिए थी पार्टी क्यों हारी? पर अगर चर्चा होती तो यह सवाल उठता कि राज्यों की सरकारों की बजाय केन्द्र की नीतियों को लेकर ज्यादा नाराजगी थी। केंद्रीय नेतृत्व पर सवाल उठते। तभी मामले को दबा दिया गया। अगले चुनाव की रणनति भी कुल मिला कर वही रही, जो पांच साल पहले थी। ढाई लोगों की टीम के सदस्य अरुण जेटली केक नाम पर कार्यकर्ताओं ने कहा कि मोदी नाम का जाप करते रहो। दो दिन की बैठक का कुल जमा निष्कर्ष यह था कि मोदी ही भाजपा की सबसे बड़ी और एकमात्र पूंजी हैं जो उन्हीं के नाम पर चुनाव लडऩा है। पार्टी के तमाम नेता चाहे लालकृष्ण आडवाणी हों, मुरली मनोहर जोशी हों या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी हों, सब मूर्तिमान बैठे रहें। मंच पर मोदी को फूलों की भारी भरकम माला पहनाई गई तो उसमें भी दूसरे किसी को जगह नहीं मिली। माला पहनाने वालों में एक तरफ अमित शाह थे, जिनके चेहरे पर गर्व गौर खुशी का भाव था तो दूसरी ओर राजनाथ सिंह थे। उनकी नजरें झुकी थीं और शर्मिंदगी मजबूरी में पहले से तय किस्क्रप्ट के हिसाब से काम करते रहे।
०-नया इंडिया के कालम ”राजरंग” से साभार)
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