भाजपा दृष्टि पत्र नहींं शपथ-पत्र पेश करे ?

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। २००३ में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जिस भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की जनता से भय, भूख और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने का वायदा कर २००३ से लेकर २०१८ तक प्रदेश में बही भ्रष्टाचार की ऊपर से लेकर नीचे तक बही भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाकर वह भाजपा के नेता जिनकी हैसियत एक टूटी साइकल तक खरीदने की नहीं थी बल्कि उमा भारती के शब्दों में यदि कहें तो एक समोसा खरीदने तक की नहीं थी। शिवराज सरकार में वही भाजपा के नेता आज करोड़पति तो हो गये हैं तो वहीं आलीशन भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे भरते नजर आ रहे हैं तो वहीं २००३ और शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुए २००८ और २०१३ में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने जो अपने घोषणा पत्र या दृष्टि पत्र में कुछ वायदे इस प्रदेश की जनता से किये थे उनमें से प्रमुख किसानों की खेती को लाभ का धंधा बनाने का वायदा तो प्रमुख था ही तो वहीं बेरोजगारों को रोजगार जैसे मुद्दे भी प्रमुख थे लेकिन शिवराज सरकार के इन १३ वर्षों के शासनकाल के दौरान किसानों की आर्थिक स्थिति में किस तरह का इजाफा तो नहीं हुआ। हाँ, यह जरूर है कि उनके मंत्रीमण्डल के कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन की सम्पत्ति में बेहताशा वृद्धि हुई तभी तो उनके पिछले दिनों सोशल मीडिया में वायरल हुए वीडियो में यह कहते नजर आ रहे हैं कि १०० करोड़ रुपये देने पर वह केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में कृषि राज्यमंत्री पद का ठेका ले सकते हैं, बिसेन के इस वायरल वीडियो में कहे गये शब्दों से यह साफ जाहिर हो जाता है कि इस प्रदेश में शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान किसानों की आय में वृद्धि तो नहीं हाँ उनके कृषि मंत्री के आय में जरूर वृद्धि हुई तभी तो वह अपनी बड़ी हुई सम्पत्ति की बदौलत १०० करोड़ रुपये केन्द्रीय मंत्रीमण्डल जिसके मुखिया वह नरेन्द्र मोदी हैं जिनका यह दावा है कि न खाऊंआ और न खाने दूंगा, उन्हीं के मंत्रीमण्डल में कृषि राज्यमंत्री का पद पाने के लिये १०० करोड़ रुपये के बिसेन के दावा करने से यह साफ जाहिर हो जाता है कि भाजपा के भ्रष्टाचार के मुद्दे की कितनी हकीकत है और चाहे नरेन्द्र मोदी हों या मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जिन्होंने अपने शासकाल के दौरान जीरो टालरेंस से लेकर भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कभी डंडा लेकर आया हूं, किसी को नहीं बख्शूंगा, जैसे जुमलों से इस प्रदेश की जनता को खूब प्रभावित किया लेकिन प्रदेश में भ्रष्टाचार की स्थिति का इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिवराज सरकार के १३ वर्षों के कार्यकाल में मंत्रालय में बैठे प्रमुख सचिव से लेकर पीडब्ल्यूडी के केयरटेकर तक जहां भी जांच एजेंसियों ने छापे की कार्यवाही की वह सभी करोड़पति निकले लेकिन उन निकले करोड़पतियों द्वारा अनुचित रूप से कमाई गई सम्पत्ति के अरोपियों पर जांच एजेंसियों द्वारा कार्यवाही करने की जब-जब मुख्यमंत्री से स्वीकृति मांगी गई तो उसे कभी भी सफलता नहीं मिली और उन भ्रष्टाचारियों की फाइल आज भी वल्लभ भवन की किसी अलमारी में फाइल में बंद होकर धूल खा रही है, यह है शिवराज सरकार का जीरो टालरेंस और डंडा लेकर आया हूं, किसी को नहीं बख्शूंगा की हकीकत का एक नमूना? तो वहीं मुख्यमंत्री द्वारा चौथी बार सत्ता में काबिज होने के लिये आये दिन नई-नई घोषणायें उस स्थिति में जब प्रदेश दो लाख करोड़ से अधिक का कर्जदार है और शिवराज सरकार में कर्मचारियों को वेतन देने के लिये हर माह कर्ज लेने की स्थिति से गुजरना पड़ रहा है। तो सवाल यह उठता है कि शिवराज और भाजपा द्वारा जो चौथी बार सत्ता में काबिज होने के लिये घोषणायें की जा रही हैं क्या उनकी भी स्थिति २००३ में दिये गये भय, भूख और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने जैसे वायदे जैसी होगी। इसीलिये प्रदेश की जनता अब यह मांग करती नजर आ रही है कि भाजपा अपने घोषणा पत्र या दृष्टि पत्र की जगह शपथ पत्र देकर यह परम्परा कायम करे तो वह अपने द्वारा किये गये हर वायदे को पूरा करने में कितने सक्षम रहेंगे। तो वहीं शिवराज सरकार के कार्यकाल में अपनी छवि बनाने के लिये चले महंगे कार्यक्रमों की बदौलत प्रदेश का खजाना खाली तो है ही तो वहीं दो लाख करोड़ से ज्यादा प्रदेश कर्जदार है और ऐसी स्थिति में भाजपा अपने घोषणा पत्र में दिये गये वायदों को किस तरह से पूरी करेगी उसका खुलासा भी घोषणा पत्र में भाजपा को करना चाहिए कि वह किस तरह से प्रदेश के खाली खजाने और कर्जदार प्रदेश की हालत में कैसे पूरा कर पाएंगे। नहीं तो यह साफ जाहिर होता है कि यह घोषणा पत्र या दृष्टि पत्र की हालत वही होगी जिस प्रकार से २००३ के घोषणा पत्र में इस प्रदेश की जनता को भय, भूख और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के वायदे के बाद भी शिवराज सरकार में जिस तरह का भ्रष्टाचार की गंगोत्री ऊपर से नीचे तक बही और उस गंगोत्री में डुबकी लगाकर प्रदेश की जनता या गरीबों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ भाजपा के उन जनप्रतिनिधियों जिनमें से अधिकांश पर भरोसा कर भाजपा ने २०१८ के चुनावी समर में उतारा है वह सभी अपनी पुरानी आदत के अनुसार हर प्रकार के अवैध कारोबार चाहे फिर वह रेत खनन हो या अवैध शराब या जुए या सट्टे के अड्डों को संरक्षण देकर इस प्रदेश की कुल आबादी की तुलना में पांच करोड़ ४४ लाख लोगों को गरीबी रेखा ने नीचे के लिये जीने के लिये मजबूर कर दिया और आज भी भाजपा के सबका साथ सबका विकास के ढिंढोरे के बावजूद गरीबी रेखा से नीचे जीवन वाले लोगों की संख्या कम होने की बजाए लगातार वृद्धि हो रही है तो ऐसी स्थिति में चौथी बार सत्ता में आने के बाद इन गरीबों की हालत क्या होगी? तो वहीं शिवराज सरकार में पनपे हर प्रकार के अवैध कारोबार की स्थिति क्या रहेगी इसका तो अंदाजा ही लगाया जा सकता है?

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