भाजपा : गढ़ बचाने दिग्गजों पर दांव

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०- देवदत्त दुबे
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मध्यप्रदेश में भाजपा अपने गढ़ बचाने अब एक बार फिर दिग्गजों पर दांव लगाने की कोशिश में है। हाईकमान को प्रदेश नेतृत्व यह नहीं समझा पाया कि आखिर कौन सा नया प्रत्याशी शेष बची सीटों पर बेहतर रहेगा। यही कारण है कि अब पार्टी अपने जाने-माने चेहरों को न आजमाते हुए दिग्गज नेताओं पर दांव खेलने जा रही है। दरअसल प्रदेश में विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद भाजपा की जीत की राह कठिन हो गई है। प्रदेश में जो भी मौजूदा नेतृत्व है वह है एक-एक सीट पर एक या दो नाम या फिर तीन नाम नहींसमझा पाया, बल्कि आठ से दस नाम की पैनल अधिकांश सीटों पर बना कर दी, जिससे पार्टी हाईकमान अब नाराज है और वह कोई रिस्क ना लेते हुए दमदार नेताओं को चुनाव मैदान में उताकर अपने गढ़ों को बचाने की कोशिश कर रही है। पार्टी को अंदेशा है कि कहीं पार्टी में बगावत ना हो जाए। यही कारण है कि अब उन नेताओं को चुनाव मैदान में उतारने की पार्टी इसे अंतिम रूप ले रही है जो कभी मुश्किल सीओं पर पार्टी को जीत दिला चुके हैं। बहरहाल प्रदेश की राजधानी भोपाल लोकसभा सीट काफी हाई प्रोफाइल सीट हो गई है अब से कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है और भाजपा को उनके खिलाफ प्रत्याशी चयन करने में लगभग एक महीना हुआ जा रहा है लेकिन पार्टी प्रत्याशी तय नहीं कर पाई और अब संघ की सलाह पर भाजपा पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को भोपाल से लोकसभा का चुनाव लड़ा सकती है। शुक्रवार को दिन भर सोशल मीउिया पर उमा भारती के प्रत्याशी बनाए जाने की खबरें चलती रही। क्योंकि देर रात तक कोई भी पार्टी का बड़ा नेता इस संबंध में कुछ भी कहने को तैयार नहीं था लेकिन दबी जुबान से सभी कह रहे थे। उमा भारती ही भोपाल में प्रत्याशी होंगी और यदि ऐसा हुआ तो फिर इन्दौर लोकसभा सीट पर सुमित्रा महाजन या कैलाश विजयवर्गीय प्रत्याशी हो सकते हैं। उधर कांग्रेस में शुक्रवार शाम को तीन प्रत्याशी और घोषित करके भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं अब वह भी प्रत्याशी घोषित करे। कांग्रेस ने गुना से ज्योतिरादित्य सिंधिया, विदिशा से शैलेन्द्र पटेल और राजगढ़ से मोना सुस्तानी का नाम फाइनल घोषित होने के बाद अब भाजपा का इन्दौर और विदिशा से निर्णय लेनूे में आसानी होगी। अब तक ज्योतिरादित्य सिंधिया के इन्दौर या फिर गुना से चुनाव लड़ाए जाने की अटकलें लगाई जा रहही वहीं कांग्रेस भी अब ग्वालियर में प्रत्याशी की घोषणा करने में आसानी महसूस करेगी। पार्टी को अब तक यह भी लग रहा था कि हो सकता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर से चुनाव लड़ जाएं। भाजपा हाईकमान ने अपनी चुनावी घोषणाओं के चलते भले ही अब तक शेष बची सीटों पर उम्मीदवार घोषित नहीं किए लेकिन इससे यह संदेश जरूर चला गया है कि भाजपा की आसान सीटेकं भी अब मुश्किल हो गई हैं। यदि उमा भारती भोपाल से चुनाव लडऩे तैयार नहीं हुई तो पार्टी को नए सिरे से भोपाल लोकसभा सीट पर दिग्विजय सिंह के खिलाफ तलाश रहेगी। भाजपा को प्रत्याशी चयन में हिचकिचाहट इसलिए भी हो रही है जिन सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए जा चुके हैं उनमें से अधिकांश में अभी तक विरोध का सिलसिला थमा नहीं है। अब जबकि देश में पहले चरण का मतदान हो चुका है और प्रदेश में २९ अप्रैल को छ: सीटों पर वोट डाले जाएंगे तब पार्टी का दबाव है कि वैसे सीटों पर अतिशीघ्र प्रत्याशी घोषित करें और माना जा रहा है कि आज शाम तक या फिर कल तक सभी प्रत्याशी घोषित कर देगी।
०-नया इंडिया के कालम ”राजनैतिक गलियारा” से साभार)
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