भगवान महाकाल ने भक्तों को छह रूपों में दर्शन दिये

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उज्जैन। (हिन्द न्यूज सर्विस)। राजाधिराज भगवान महाकाल भादौ माह के प्रथम सोमवार 14 अगस्त को अपनी प्रजा को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले। भगवान महाकाल ने अपनी प्रजा को छठी सवारी में छह रूपों में दर्शन दिये। सवारी निकलने के पूर्व श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन करने के बाद निर्धारित समय से भगवान महाकाल की पालकी को नगर भ्रमण के लिये रवाना किया गया। सभामंडप में पूजा-अर्चना के अवसर पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मप्र जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष प्रदीप पाण्डे, माखनसिंह चौहान, जिला पंचायत के अध्यक्ष महेश परमार, कलेक्टर संकेत भोंडवे, पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर आदि उपस्थित थे।

रजतजडित पालकी में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर विराजित थे और पालकी के पीछे हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड रथ पर श्री शिव तांडव की प्रतिमा और नंदी रथ पर श्री उमामहेश, डोल रथ पर होल्कर स्टेट का मुखौटा तथा रथ पर घटाटोप का मुखारविन्द विराजित होकर अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए शाही ठाट-बाट के साथ नगर भ्रमण पर निकले। भगवान महाकाल की अब अंतिम शाही सवारी सोमवार 21 अगस्त को नगर भ्रमण पर राजसी ठाट-बाट के साथ निकलेगी।

महाकाल मंदिर से जैसे ही पालकी मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंची, वैसे ही सशस्त्र पुलिस बल के जवानों के द्वारा सलामी दी गई। पालकी के आगे घुडसवार दल, सशस्त्र पुलिस बल के जवान आदि की टुकडियां मार्च पास्ट करते हुए चल रही थीं। राजाधिराज भगवान महाकाल की सवारी में हजारों भक्त भगवान शिव का गुणगान करते हुए तथा विभिन्न भजन मंडलियां झांझ-मंजीरे, डमरू बजाते हुए चल रहे थे। सवारी मार्ग के दोनों ओर हजारों श्रद्धालु पालकी में विराजित चन्द्रमौलेश्वर के दर्शन के लिए खड़े थे। जैसे ही पालकी उनके सामने से निकली वैसे ही भगवान के गुणगान एवं पुष्प वर्षा कर अपने आपको श्रृद्धालु धन्य मान रहे थे। श्री महाकालेश्वर भगवान की सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची, जहां पर शिप्रा के जल से भगवान महाकाल का अभिषेक कर पूजा-अर्चना की गई।

रामघाट पर पूजा-अर्चना के बाद सवारी अपने निर्धारित मार्ग से होते हुए पुन: महाकाल मंदिर को रवाना हुई। सवारी के साथ सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रदीप पाण्डे, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भरत पोरवाल, पूर्व विधायक राजेन्द्र भारती, तुलसी सिलावट, जिला पंचायत सदस्य करण कुमारिया सहित जन प्रतिनिधि, समाजसेवी, धर्मपरायण जनता आदि चल रहे थे और भगवान महाकाल के गुणगान करते हुए शिवमय हो रहे थे। कलेक्टर संकेत भोंडवे एवं पुलिस अधीक्षक सचिन अतुलकर सवारी मार्ग में व्यवस्थाओं पर पूर्ण रूप से निगरानी रख रहे थे और अपने मातहत अधिकारियों को व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश भी साथ में दे रहे थे।

भादौ मास के प्रथम सोमवार भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी बैण्ड-बाजों, हाथी-घोड़ों एवं कड़ाबीन के धमाके के साथ रामघाट पहुंची। रामघाट पर मां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल के चंद्रमौलेश्वर स्वरूप का जलाभिषेक व पूजन हुआ। पालकी में भगवान चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में विराजित थे। शिप्रा तट पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन पुरोहितों के दल द्वारा करवाया गया।

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